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राजस्थान: गरीब बेटियों के सिर से उठ गया था पिता का साया, किन्नरों ने करा दी शादी

हुआ ये कि 2017 में रजनी की अगुवाई में किन्नरों का एक समूह कुम्हार समाज की बस्ती में एक बच्चे के जन्मदिन पर बधाई देने पहुंचा था. लेकिन, जब वो ग्रुप नेग लेने पहुंचा, तो वहां परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था. किन्नरों को पता चला कि बच्चों के पिता की मौत हो गई है.

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1 मई 2022 (अपडेटेड: 2 मई 2022, 06:24 PM IST)
Bikaner Kinnar marriage
किन्नर समुदाय ने 1,500 बारातियों के स्वागत का इंतजाम किया. (फोटो- सोशल मीडिया)
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शादी-ब्याह जैसे खुशी के मौकों पर अकसर किन्नर आते हैं. नेग लेने. दुआएं देने. लेकिन, उन्होंने किसी की शादी कराई हो, ये खबर जितनी अनोखी है, उतनी ही सुखद भी. मामला राजस्थान के बीकानेर (Bikaner Kinnar) का है. यहां किन्नर समुदाय ने दो लड़कियों की शादी का खर्चा उठाया. दोनों लड़कियों की शादी में करीब 1,500 बारातियों की व्यवस्था की गई थी.

दोनों लड़कियों का नाम बसंती और ममता है. इनके परिवार में कुल 9 सदस्य हैं. जिनमें मां, सात बहनें और एक भाई शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 लड़कियों के पिता रामलाल की मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद से मां बुद्धि देवी ही परिवार को संभाल रही थीं. परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण बेटियों की शादी कराना बुद्धि देवी के लिए काफी मुश्किल था. लेकिन, किन्नर समुदाय की बदौलत दोनों की शादी काफी धूमधाम से हुई.

2017 में किया वादा निभाया

हुआ ये कि 2017 में रजनी की अगुवाई में किन्नरों का एक समूह कुम्हार समाज की बस्ती में एक बच्चे के जन्मदिन पर बधाई देने पहुंचा था. लेकिन, जब वो ग्रुप नेग लेने पहुंचा, तो वहां परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था. किन्नरों को पता चला कि बच्चों के पिता की मौत हो गई है. इस बड़े दुख के साथ परिवार को ये भी सदमा था कि उन सात बेटियों की शादी कैसे होगी. लोग कह रहे थे कि अब परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा. परिवार की ये हालत देखते हुए रजनी ने वादा किया कि सात बेटियों में से दो की शादी वो कराएंगी.

किन्नरों ने पांच साल पहले किया वादा निभाया. फोटो- सोशल मीडिया.

रजनी ने वादा किया और परिवार से एक रिश्ता बन गया. रजनी परिवार का हालचाल पूछती रहीं. लेकिन, बेटियों की शादी से पहले ही उनकी भी मौत हो गई. हालांकि, जाते-जाते उन्होंने मंडली को ये कह दिया कि उस परिवार से किया हुआ वादा पूरा करना है. इसके बाद 21 अप्रैल को बसंती और ममता की शादी तय हुई.

अपने मुखिया के वादे और अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उनकी शिष्या मुस्कान अग्रवाल आगे आईं. उन्होंने शादी का पूरा खर्च उठाया. सिर्फ इतना ही नहीं किन्नरों ने सभी मेहमानों का अच्छे से स्वागत सत्कार किया. किन्नरों की इस दरियादली ने समाज में एक मिसाल कायम की है.

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