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  • Bangladesh Crisis hits fish market in Delhi CR Park along with West Bengal, Bihar especially for the hilsa variety

बांग्लादेश संकट से भारत के मछली प्रेमियों को टेंशन, दिल्ली के पॉश इलाके में तो बेचैनी पसर गई

Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में चल रही अशांति के चलते भारत के फिश लवर्स परेशान दिख रहे हैं. Kolkata में हिल्सा मछली (Hilsa Fish) का आयात कम हो गया है. जिसके चलते कारोबारी इसे महंगे दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैं.

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22 अगस्त 2024 (पब्लिश्ड: 04:38 PM IST)
 हिल्सा मछली (photo-aajtak)
हिल्सा मछली (फोटो - आजतक)
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दिल्ली का चितरंजन पार्क (CR Park) ‘मिनी कोलकाता’ के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि बंगाल के बाद दिल्ली के CR पार्क में ही दुर्गा पूजा बेहद धूम-धाम से मनाई जाती है. दिल्ली के इस पॉश इलाके के फ़ूड जॉइंट्स भी खासे मशहूर हैं. मछली खाने के शौकीन यहां ऑथेंटिक बंगाली पकवानों का मजा लेने के लिए जरूर पहुंचते हैं. लेकिन इन दिनों इलाके में बांग्लादेश में चल रही अशांति की वजह से एक असामान्य स्थिति देखने को मिल रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में हुए तख्तापलट का भारत के मछली कारोबार पर असर पड़ा है. बांग्लादेश की हिल्सा मछली का आयात बंद हो गया है. इसकी वजह से दक्षिणी दिल्ली स्थित CR पार्क के बाजार समेत देश के अन्य हिस्सों में मछली की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. हिल्सा मछली की कम आपूर्ति के चलते कई होटलों के मेन्यू से इस मछली के विभिन्न व्यंजनों को बाहर तक कर दिया गया है. अगर बांग्लादेश से मछली आयात जल्द शुरू न हुआ, तो हिल्सा यहां की थाली से गायब हो सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, हिल्सा मछली की आपूर्ति में कमी के चलते सप्लायरों को देश के अन्य हिस्सों से इसे मंगवाना पड़ रहा है. लेकिन, CR पार्क जैसे पॉश इलाके के लिए यह पर्याप्त नहीं है. इस संकट पर यहां की मार्केट के एक दुकानदार ने दुलाल चंद्रा ने बताया, 

"ज्यादातर बंगाली, भारतीय मूल की मछली की किस्मों के साथ सहज नहीं हैं. वे गुजराती इलिश की तुलना में पद्मा इलिश (पद्मा नदी से प्राप्त हिल्सा) को एक तिहाई कीमत पर खरीदने के बजाय ₹3,000 प्रति किलो पर खरीदना पसंद करते हैं. वे आंध्रा किस्म के ₹900 की तुलना में ₹1,800 प्रति किलो वाले ढाकई पाबदा को पसंद करते हैं."

बांग्लादेश से हिल्सा के अलावा शोल, पडबा, शिंग और कोइ जैसी मछली किस्मों की आपूर्ति भी खत्म हो गई है. इससे लोगों को स्थानीय बाजार में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है. CR पार्क की मार्केट 2 में मछली विक्रेता प्रदीप मन्ना के अनुसार, 

“बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उसके कारण पिछले कुछ दिनों से इलिश की आपूर्ति कम हो गई है. बहुत से लोग जिनके पास कुछ स्टॉक है वे इसे जमा कर रहे हैं और इसे प्रीमियम दाम पर बेच रहे हैं.”

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले इस तरह का मछली संकट साल 2012 में देखने को मिला था. तब ढाका ने उत्पादन की कमी और तीस्ता जल-बंटवारे समझौते पर असहमति का हवाला देते हुए भारत में इलिश मछली के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, साल 2013 में बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधामंत्री शेख हसीना ने हर साल दुर्गा पूजा से पहले के हफ्तों में सीमित आयात की अनुमति दी थी, जिसे "हिल्सा कूटनीति" के रूप में जाना जाता है.

रिपोर्ट में व्यापारियों के हवाले से बताया गया है कि CR पार्क में एक महीने में लगभग 60 क्विंटल और पूरी दिल्ली में 300 क्विंटल मछली की खपत होती है. बांग्लादेश की किस्मों का इसमें एक तिहाई हिस्सा है. और अब इस आपूर्ति के लगभग समाप्त हो जाने से मछली के शौकीनों को दिक्कत महसूस हो रही है. साथ ही दुकानदार ग्राहकों को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

मछली आयात की कमी के चलते बाजारों में पड़े स्टॉक अब बेस्वाद और बासी हो रहे हैं. ग्राहकों की मानें तो पद्मा इलिश की कीमत ₹2,600 प्रति किलोग्राम से अधिक हो चली है और उन मछलियों से भी बदबू आ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक़, 4 अक्टूबर से शुरू होने वाली दुर्गा पूजा पर भी इसका असर पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल में मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने कहा कि वे त्योहार से पहले आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं.

मकसदू ने बताया कि क़ानूनी तौर पर, आपूर्ति पर प्रतिबंध है. बांग्लादेश आमतौर पर दुर्गा पूजा से पहले लगभग 3,900 टन हिल्सा निर्यात करने की अनुमति देता है. हालांकि, इस साल वे अनिश्चित हैं कि सत्ता परिवर्तन को देखते हुए ऐसा होगा या नहीं.

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