राहुल, महुआ, अखिलेश के iPhone हैकिंग आरोपों पर Apple ने अब ये जानकारी दी है
ऐपल ने बयान में ये भी कहा है कि खतरे के नोटिफिकेशंस क्यों भेजे गए, हम ये नहीं बता सकते. इससे हैकर्स अपना तरीका बदल लेंगे.

विपक्ष के कई नेताओं (Opposition leaders) ने सरकार पर उनके आईफोन को हैक कर जासूसी करने का आरोप (Iphone hacking) लगाया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों का जिक्र किया है. आरोप लगाने वाले नेताओं ने अपने दावे में ‘ऐपल की तरफ से भेजे गए थ्रेट अलर्ट’ का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया है. ऐपल के इस नोटिफिकेशन में लिखा है कि सरकार द्वारा स्पॉन्सर्ड (सरकार द्वारा वित्त-पोषित) अटैकर्स आपके आईफ़ोन को हैक कर रहे हो सकते हैं. हालांकि, इसी बीच ऐपल ने एक बयान जारी कर ये भी कहा कि 'थ्रेट अलार्म की सूचनाएं गलत होने और कई बार कुछ हैकिंग अटैक पकड़ में न आने की भी संभावना होती है'. ये भी कहा कि खतरे के नोटिफिकेशंस क्यों भेजे गए, हम ये नहीं बता सकते. इससे हैकर्स अपना तरीका बदल लेंगे.
कितने नेताओं को अलर्ट मैसेज आया?कल और आज, 31 अक्टूबर को विपक्ष के कई नेताओं ने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करके ये आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार, उनके ऐपल आईफ़ोन को हैक करवाने की कोशिश कर रही है. इन नेताओं ने अपने दावे में स्क्रीनशॉट शेयर किए. जिनके मुताबिक, ऐपल ने इन सभी को एक 'खतरे का अलर्ट' भेजा है. TMC सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर और पवन खेड़ा, कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा जैसे नेताओं ने ऐपल अलर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है.
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इस अलर्ट में लिखा है,
ऐपल का क्या बयान आया?"सरकार द्वारा वित्तपोषित अटैकर्स आपके आईफ़ोन पर हमला कर रहे हो सकते हैं.ऐपल का मानना है कि आपको स्टेट-स्पॉन्सर्ड (सरकार द्वारा वित्त-पोषित) अटैकर्स निशाना बना रहे हैं. जो दूर बैठकर आपकी ऐपल ID से जुड़े आईफ़ोन को कॉम्प्रोमाइज़ (हैक) करने की कोशिश कर रहे हैं. आशंका है कि ये अटैकर्स आपको अकेले इसलिए टारगेट कर रहे हैं कि आप कौन हैं और क्या करते हैं (शख्सियत के आधार पर). अगर आपकी डिवाइस कॉम्प्रोमाइज़ हो जाती है तो वो लोग आपका संवेदनशील डेटा, आपकी बातचीत और यहां तक कि आपका कैमरा और माइक्रोफ़ोन भी दूर बैठकर एक्सेस कर सकेंगे. हालांकि, ये भी हो सकता है कि ये झूठा-अलार्म हो, लेकिन इस चेतावनी को गंभीरता से लीजिए."
इस बीच ऐपल ने एक बयान जारी कर स्थिति को और स्पष्ट करने की कोशिश की है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने कंपनी के हवाले से बताया,
BJP ने आरोपों को खारिज किया“हम इस बारे में जानकारी नहीं दे सकते कि हमें किस वजह से थ्रेट नोटिफिकेशंस जारी करने पड़ रहे हैं, क्योंकि ऐसा करने से ये स्पॉन्सर्ड अटैकर्स, आगे भविष्य में हैकिंग पकड़े जाने से बचने के लिए नए तरीके अपना लेंगे.”
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के आरोपों के जवाब में सरकार का कहना है कि एल्गोरिदम की गड़बड़ी (यानी किसी तकनीकी दिक्कत) के चलते. अलर्ट मेल आ सकते हैं. वहीं BJP के आईटी सेल चीफ़ अमित मालवीय ने आरोप लगाने वाले नेताओं को हर बार इसी तरह का नाटक करने वाला बताया.
उन्होंने कहा,
"इन Usual suspects का 'स्टेट-स्पॉन्सर्ड. अटैक पर हंगामा खड़ा करना और इसका शिकार होने का नाटक करना अच्छा है. ये हंगामा, पहले की ही तरह, पूरी संभावना है कि एक बेकार व्यंग्य (damp squib) की तरह ख़त्म हो जाएगा."
बता दें कि इससे पहले, युगांडा, थाईलैंड, अल साल्वाडोर जैसे कई देशों में भी कथित तौर पर राजनेताओं के आईफ़ोन पर इसी तरह के अलर्ट मैसेज आते रहे हैं.
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