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यूरोपीय संसद में 'मणिपुर हिंसा' पर बहस, नाराज विदेश मंत्रालय ने क्या जवाब दे दिया?

12 जुलाई को यूरोपीय संसद में बहस हुई, 13 को वोटिंग होनी है.

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13 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 13 जुलाई 2023, 01:31 PM IST)
European Parliament
यूरोपियन यूनियन में आज इस प्रस्ताव होगा. (AFP)
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यूरोपीय संसद में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर बहस की बात सामने आने पर भारत ने आपत्ति जताई है. भारत ने कहा है कि ये देश का आंतरिक मसला है. यूरोपीय संसद में ये मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जुलाई को फ्रांस की दो दिवसीय यात्रा शुरू कर रहे हैं. इस दौरान वह बैस्टिल डे परेड में अतिथि होंगे. दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए, विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा-

यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है. हम यूरोपीय संसद में होने वाली घटनाओं से अवगत हैं और हमने संसद के संबंधित सदस्यों से संपर्क किया है. हमने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है.

हालांकि, विदेश सचिव ने मणिपुर के अखबार की एक रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने यूरोपीय संसद तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ब्रुसेल्स में एक प्रमुख लॉबिंग फर्म 'अल्बर एंड गीगर' से संपर्क किया है, जिसने कथित तौर पर भारत सरकार की ओर से एक पत्र भेजा था. यूरोपीय संसद में आठ राजनीतिक समूहों में से कम से कम छह ने ये प्रस्ताव रखा, जो बहस के बाद 13 जुलाई को इस मुद्दे पर मतदान करेंगे.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे कुछ प्रस्तावों में बीजेपी के नेताओं पर हेट स्पीच और केंद्र सरकार पर विभाजनकारी नीति लागू करने का आरोप लगाया गया है. वहीं दूसरी ओर आफ्स्पा (आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट), UAPA, FCRA जैसे कानूनों के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया.

इन प्रस्तावों में "बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और कुकी आदिवासी समूह के बीच" झड़पों पर चर्चा में हमलों पर विशेष जोर दिया गया है.

प्रस्ताव में सरकार से मणिपुर में "इंटरनेट शटडाउन" खत्म करने का भी आग्रह किया और यूरोपीय संघ के नेतृत्व को भारत के साथ मानवाधिकारों पर बातचीत में मणिपुर मुद्दे को उठाने का निर्देश दिया. रिपोर्ट के मुताबिक "वामपंथी समूह" के कम से कम एक प्रस्ताव में मणिपुर से जम्मू-कश्मीर की स्थिति की तुलना की गई और सरकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध हटाने और वहां गिरफ्तार किए गए मानवाधिकार के लिए लड़ने वालों को रिहा करने के लिए कहा गया है.

यूरोपीय संसद में यह मुद्दा तब उठा जब हाल ही में भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गारसेटी ने मणिपुर में स्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी मदद की पेशकश की थी. उन्होंने कहा था कि यह एक "रणनीतिक" मुद्दा नहीं है, बल्कि एक "मानवीय" मुद्दा है. 

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