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मैनपुरी के स्कूल पर आरोप- दलित बच्चों के बर्तन अलग रखे जाते थे, उनसे ही धुलवाए जाते थे

रसोइयों ने कहा- इनके बर्तन नहीं धुलेंगे.

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26 सितंबर 2021 (अपडेटेड: 26 सितंबर 2021, 09:00 AM IST)
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सांकेतिक फोटो.
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उत्तर प्रदेश का मैनपुरी जिला. यहां के बेवर प्रखंड का दाउदपुर सरकारी प्राइमरी स्कूल. स्कूल में 80 स्टूडेंट्स हैं. इनमें से 60 अनुसूचित जाति से हैं. अधिकारियों को इस स्कूल की शिकायत मिली. पता चला कि SC समुदाय के बच्चे मिड-डे मील के लिए जिन बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अलग रखा जाता है. ये बर्तन इन बच्चों को ही धोने पड़ते थे. शिकायत मिलने के बाद शुक्रवार, 24 सितंबर को अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया. प्रधानाध्यापिका गरीम राजपूत को सस्पेंड कर दिया. दो रसोइयों को उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया. क्योंकि उनका कहना था कि वे अनुसूचित जाति के छात्रों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तनों को छू नहीं सकतीं. क्या है मामला? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मैनपुरी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कमल सिंह ने कहा कि नवनिर्वाचित सरपंच मंजू देवी के पति द्वारा स्कूल में की गई जातिगत भेदभाव की शिकायत को सही पाया गया. उन्होंने कहा,
हमें शिकायत मिली. निरीक्षण के लिए एक टीम को स्कूल भेजा गया.अनुसूचित जाति के बच्चों और अन्य बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन अलग-अलग रखे गए थे. प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य पदाधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया. दौरे के दौरान, रसोइया सोमवती और लक्ष्मी देवी ने अनुसूचित जाति के छात्रों के बर्तनों को छूने से इनकार कर दिया. कहा कि अगर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया तो वे स्कूल में काम नहीं कर पाएंगी. उन्होंने जातिसूचक गालियों का भी इस्तेमाल किया. रसोइयों के खिलाफ कार्रवाई स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा की गई थी.
सरपंच मंजू देवी के पति साहब सिंह का कहना है,
कुछ बच्चों के माता-पिता ने उन्हें 15 सितंबर को इस छूआछूत के बारे में बताया था. 18 सितंबर को मैं एक बैठक के लिए स्कूल गया था. मैंने देखा कि रसोई गंदी थी. उसमें केवल 10-15 प्लेटें रखी थीं. मैंने रसोइयों से पूछा कि बाकी थालियां कहां हैं, तो उन्होंने कहा कि रसोई में जो थालियां थीं वे पिछड़े और सामान्य वर्ग के छात्रों की थीं, जबकि 50-60 थालियां अलग-अलग रखी गई थीं. मुझे यह भी बताया गया कि अनुसूचित जाति के छात्रों को अपने बर्तन धोने और अलग रखने के लिए मजबूर किया जाता है, क्योंकि अन्य जातियों का कोई भी उन्हें छूने को तैयार नहीं होता है.
उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद स्थानीय पत्रकारों और अधिकारियों ने इस मामले को उठाया. साहब सिंह ने कहा कि गांव की करीब 35 फीसदी आबादी दलित है, वहीं ठाकुरों की संख्या इतनी ही है, बाकी पिछड़े वर्ग से हैं. जिला पंचायत सदस्य ने BJP को घेरा मैनपुरी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का गढ़ है. एसपी द्वारा समर्थित मैनपुरी जिला पंचायत सीट जीतने वाले शुभम सिंह का कहना है कि उन्होंने गांव का दौरा किया था. भाजपा दलित उत्थान के बड़े-बड़े दावे करती है. वे समुदाय के कुछ नेताओं को सांकेतिक पद देते हैं, लेकिन यह यूपी की वास्तविकता है. दशकों पहले डॉ बी आर आंबेडकर को अपने स्कूल के दिनों में इस तरह की छूआछूत का सामना करना पड़ा था. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अधिकारियों द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद से, कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इसमें दाउदपुर स्कूल के बच्चे अपनी थालियों को धोने के लिए हैंडपंप का उपयोग करते दिखते हैं. जबकि दूसरे बच्चे अपनी क्लास में होते हैं. एक पैरेंट का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था. वीडियो में वह कहते हैं कि यहां बच्चे आते हैं. यहां बर्तन धुलवाए जाते हैं. मास्टर लोग धुलवाते हैं. मैने खुद देखा है. मास्टर से कहा, उन्होंने अनसुनी कर दी. बच्चों ने भी बताया. घर पर भी बताया.

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