The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • 96 kids fall sick after eating ‘lizard’ contaminated mid-day meal in Jharkhand

छिपकलियों, तुम मिड डे मील स्कीम को ही खा डालो

मिड डे मील में थी छिपकली. खाना खाने से 96 प्यारे बच्चे बीमार हो गए हैं. और हां, 'जांच करेंगे' वाली लाइन कह दी गई है.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो क्रेडिट: NPR मीडिया
pic
विकास टिनटिन
7 जून 2016 (अपडेटेड: 6 जून 2016, 04:23 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
Embed
छोटे मासूम बच्चे. स्कूल जाते हैं. स्कूल में खाना भी मिलता है. मिड डे मील स्कीम है न. लेकिन इस खाने में कई बार मिल जाती है छिपकली. जहर. सांप. नतीजा ये होता है कि बच्चे बीमार हो जाते हैं. कई बार मर भी जाते हैं. स्कूल ले जाया गया बस्ता कोई और ढो कर घर ले जाता होगा. मर चुके बच्चे का बस्ता घर में देख बच्चे की मां को कितना चुभता होगा न. पर इसपर ध्यान देने की क्या ही जरूरत है. स्कीम है, चल रही है. कुछ होगा तो जांच करेंगे न. झारखंड के जमुआ में करीब 96 बच्चों को सोमवार को मिड डे मील स्कीम की वजह से जो खाना मिला, उस खाने में छिपकली पड़ी हुई थी. खाना खाने के बाद बच्चों के पेट दर्द और उल्टी शुरू हो गईं. बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. झारखंड का मामला है. ओबी वैन आसानी से नहीं जा पाती है. और जंगलराज टैग तो बिहार के साथ चल रहा है. इसलिए न्यूज चैनल वाले 'रामवृक्ष की छांव' में बैठ इंतजार कर रहे हैं. विजुअल्स का.  या शायद बीमार पड़े बच्चों के मरने का. बच्चों के बीमार पड़ने के बाद पुलिस आई और हर बार की तरह इस बार भी वही बात बोली. 'हम मामले की जांच करेंगे.' रब्बा जाने ये कौन सी जांच है कि हर बार होती है. लेकिन फिर इस हैडिंग के साथ खबर दिख जाती है. 'मिड डे मील खाने से बच्चे बीमार.' अभी कुछ रोज पहले मथुरा में 2 बच्चों की मौत हो गई थी. इस नाशपिटे मिड डे मील को खाने से. सैकड़ों बच्चे बीमार हुए सो अलग.
Embed
फरवरी में महाराष्ट्र में 50 बच्चे बीमार हो गए थे. और भी कई खबरें हैं. मिड डे मील में छिपकली, सांप गिरने की. बच्चों के मरने और बीमार पड़ने की. भारत सरकार ने नैशनल लेवल पर मिड डे मील स्कीम को 1995 में  शुरू किया. 2011 तक 11 करोड़ बच्चों की पहुंच में ये स्कीम रही. इंडियन गवर्मेंट की स्कीम है. ताकि स्कूली बच्चों को बढ़िया खाना मुहैया कराया जाए. ये मिड डे मील स्कीनम अब नैशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट 2013 के अंतर्गत कवर की जाती है. हालांकि तमिलनाडु में स्कूली बच्चों को खाना देने का काम सालों साल पहले 1962-63 में तमिलनाडु के सीएम के कामराज ने चेन्नई से इस स्कीम की शुरुआती की थी. बाद में कई स्टेट्स ने स्कूली बच्चों को खाना मुहैया कराने का काम किया. सबकी स्कीम का नाम अलग-अलग था. मकसद एक था, स्कूली बच्चों को बढ़िया क्वालिटी का खाना खिलाना. क्वालिटी यानी जिसमें छिपकली, सांप या जहर मिला हो.

Advertisement

Advertisement

()