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आज ही के दिन यूरोपियन यूनियन के सांसद कश्मीर क्यों पहुंचे? महबूबा मुफ्ती की बेटी ने बताया

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यूरोपियन यूनियन. यूरोप के 28 देशों का समूह. इस यूनियन के 27 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल यानी डेलिगेशन कश्मीर दौरे पर है. 29 अक्टूबर की सुबह इस डेलिगेशन ने दिल्ली से कश्मीर के लिए उड़ान भरी. जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 370 के अधिकांश प्रावधानों को संसद में कानून लाकर खत्म कर दिया गया. अगस्त में संसद में कानून पास हुआ था. करीब तीन महीने बीत चुके हैं. इन बदलावों के बाद ये पहला विदेशी प्रतिनिधिमंडल है, जो कश्मीर के दौरे पर है. इसके पहले कई बार विपक्ष के नेताओं, सांसदों और पत्रकारों ने कश्मीर के हालात का जायजा लेने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने किसी को भी परमिशन नहीं दी. कई नेता कश्मीर जाकर एयरपोर्ट से ही बाहर लौट आए.

यूरोप के सांसद कश्मीर में क्यों?

आर्टिकल 370 में बदलाव होने के बाद कश्मीर के हालात क्या हैं, वहां के लोग क्या सोच रहे हैं, कैसे जी रहे हैं. ये सब देखने के लिए यूरोपियन यूनियन के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल (MEPs)वहां जा रहा है. डेलिगेशन का कहना है कि वो कश्मीर जाकर स्थानीय लोगों से बात करेंगे. देखेंगे कि ये सब कुछ (आर्टिकल 370 में बदलाव) कैसे हुआ.

वेल्स के सांसद नाथन गिल ने कहा,

‘एक विदेशी डेलिगेशन के तौर पर हम कश्मीर जा रहे हैं. ये हमारे लिए बहुत अच्छा मौका है. हम खुद ये देख सकेंगे कि वहां के हालात क्या हैं.

कश्मीर में कहां जाएंगे?

श्रीनगर. पहले कुपवाड़ा भी जाने वाले थे. लेकिन बाद में इसे कैंसिल कर दिया गया. MEPs श्रीनगर के स्कूलों में जाकर बच्चों से बातें करेंगे. लेकिन 29 अक्टूबर को कई सारे स्कूलों में परिक्षाएं हैं. इसलिए ज्यादातर बच्चे बिजी रहेंगे. इन 27 में से 24 सांसद राइट विंग पॉलिटिक्स को सपोर्ट करने वाली पार्टियों के हैं.

एक दिन पहले पीएम मोदी से मुलाकात की थी

28 अक्टूबर के दिन डेलिगेशन ने पीएम नरेंद्र मोदी और उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात की थी. पीएम मोदी ने कहा था,

‘आतंकवाद को सपोर्ट करने वाले, उसे बढ़ावा देने वाले या ऐसी गतिविधियों और संगठनों का समर्थन करने वाले या स्टेट पॉलिसी के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए.’

सभी सांसदों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी. फोटो- ट्विटर.
सभी सांसदों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी. फोटो- ट्विटर.

नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल ने सभी सांसदों को 28 अक्टूबर के दिन लंच पर इनवाइट किया था. यहां उन्होंने डेलिगेशन को जम्मू कश्मीर की वर्तमान हालत के बारे में जानकारी दी. कहा कि कश्मीर में इस वक्त किसी तरह की रोक-टोक नहीं है. ये भी कहा कि सभी मोबाइल और लैंडलाइन कनेक्शन चालू हैं. सभी तरह की मेडिकल सुविधाएं भी दी जा रही हैं. उन्हें बताया कि कश्मीर में सब बढ़िया है, सब ‘नॉर्मल’ है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन एंबेसी ने ये साफ कहा है कि ये सरकारी दौरा नहीं है. और सारे सांसद अपनी ‘व्यक्तिगत क्षमता’ के आधार पर कश्मीर जा रहे हैं. वहीं विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय इन सभी सांसदों के दौरे का भार नहीं उठा रहा है. इस डेलिगेशन को WESTT नाम के एक NGO ने इनवाइट किया है.

भारत में इस दौरे का विरोध क्यों?

यूरोप से भारत आए हुए सांसद कश्मीर जा रहे हैं, उन्हें सरकार ने परमिशन भी दे दी है. इस बात को लेकर विपक्ष ने नाराजगी जाहिर की है. विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है. राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा,

‘यूरोप के सांसदों को जम्मू और कश्मीर का दौरा करवाया जा रहा है. उनके दौरे का स्वागत हो रहा है. वहीं भारत के ही सांसदों को वहां नहीं जाने दिया जा रहा है. उन पर रोक लगा रखी है. कुछ तो बहुत गलत है.

शशि थरूर ने भी इस दौरे का विरोध किया. कहा,

‘लोकसभा में आर्टिकल 370 पर हुई बहस के दौरान मैंने एक अपील की थी. सभी पार्टियों के सांसदों के एक डेलिगेशन को कश्मीर भेजे जाने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन उसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है. लेकिन यूरोपियन पार्लियामेंट के मेंबर्स सरकार के मेहमान बनकर वहां जा सकते हैं? ये तो भारत के लोकतंत्र का अपमान है.

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती 5 अगस्त से नजरबंद हैं. उनकी बेटी इल्तिजा उनके ट्विटर अकाउंट को हैंडल कर रही हैं. महबूबा के ट्विटर अकाउंट से कई सारे ट्वीट करके डेलिगेशन के दौरे का विरोध किया गया. लिखा गया,

‘अगर जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, तो राहुल गांधी को कश्मीर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा? उनकी जगह राइट विंग के सपोर्टर्स और फ़ासिस्ट सोच वाले यूरोपियन सांसदों को जाने दिया जा रहा है? आपकी कश्मीर की टिकट केवल तभी हो सकती है, जब आप फ़ासिस्ट सोच वाले और मुस्लिमों से नफरत करने वाले हो.’

महबूबा ने बच्चों के एग्जाम होने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा,

‘ये कोई संयोग नहीं है कि सांसदों का दौरा उसी दिन है, जिस दिन 60 हजार बच्चों के एग्जाम हैं. बच्चों के पास एग्जाम देने जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है. ‘सब कुछ नॉर्मल है’ दिखाने की नाटकिय कोशिशें हो रही हैं.’

एक और बात, इसके पहले यूएस सीनेटर क्रिस वन होलेन ने भी श्रीनगर जाने की मंशा जाहिर की थी. लेकिन 3 अक्टूबर के दिन उनकी अपील को भी भारत सरकार ने ठुकरा दिया था. इसके अलावा और भी कई लोगों ने कश्मीर जाने की इच्छा रखी थी, सबको भारत सरकार ने मना किया था. लेकिन यूरोपियन यूनियन के सांसदों को परमिशन मिल गई.

आपको बता दें कि इस डेलिगेशन का कश्मीर दौरा 30 अक्टूबर के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ खत्म होगा. जाहिर सी बात है इस कॉन्फ्रेंस में ये सारे सांसद ये बताएंगे कि कश्मीर में क्या हालात हैं. लोगों की क्या स्थिती है. इनका दौरा खत्म होने के अगले दिन यानी 31 अक्टूबर के दिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अधिकारिक तौर पर केंद्र शासित राज्य बन जाएंगे. जम्मू-कश्मीर राज्य की खुद की विधानसभा होगी लेकिन लद्दाख पूरी तरह से केंद्र शासित राज्य होगा. सीनियर आईएएस अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल होंगे. वहीं राधाकृष्ण माथुर लद्दाख के पहले एलजी बनाए गए हैं. दोनों 31 अक्टूबर के दिन कार्यभार संभालेंगे.


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