हम टोल टैक्स क्यों देते हैं? और ये भरने से हमें मिलता क्या है?
टोल टैक्स देकर हमें कौन से अधिकार मिल जाते हैं?
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एक लाइन में कहें तो सड़क को बनाने और मेंटेन रखने की लागत में सरकार को दिया हमारा हिस्सा है- टोल टैक्स. (सांकेतिक फोटो- PTI)
23 दिसंबर की भोर की बात है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे. वो रास्ता, जो आगरा को लखनऊ से कनेक्ट करता है. इसी सड़क पर खंदौली जिले के पास एक कंटेनर खड़ा था. तेजी से आ रही कार इस कंटेनर से भिड़ गई. भिड़ंत होते ही तेज धमाका हुआ. कार ने आग पकड़ ली. पांच लोग थे कार में. सभी ज़िंदा जल गए. मौके पर ही मौत हो गई. गांव वालों में से जिसने भी ये हादसा देखा, सिहर गया. अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक, हादसे के बाद एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड पहुंचने में करीब-करीब 45 मिनट से घंटे भर तक का समय लग गया. ये हैरत वाली बात रही कि एक्सप्रेसवे पर भी मदद पहुंचने में इतनी देर हुई. क्योंकि एक्सप्रेसवे को देश के सबसे ज़्यादा टोल वसूलने वाले रास्तों में गिना जाता है. यहां लगातार पेट्रोलिंग किए जाने के दावे किए जाते हैं.
इस ख़बर से ज़ेहन में ये सवाल आया कि टोल टैक्स और रोड सुविधाओं में क्या वास्ता है? हम टोल टैक्स देते क्यों हैं? और टोल टैक्स देने से क्या उस रोड पर हम कुछ अतिरिक्त सुविधाएं पाने के अधिकारी हो जाते हैं? टोल से जुड़े ऐसे ही हर सवाल का जवाब आइए जानते हैं.
पढ़ सकते हैं. हालांकि NHAI ने कहा है कि 1 जनवरी से सिर्फ उन्हीं वाहनों को टोल पार करने दिया जाएगा, जिन पर फास्टैग लगा होगा.
टोल टैक्स की दुनिया में नई क्रांति है फास्टैग. (फाइल फोटो- PTI)
इसीलिए जब 23 दिसंबर के हादसे में समय पर मदद नहीं पहुंची और कार में बैठे लोगों की जलकर मौत हो गई, तो सवाल उठ रहे हैं कि एक्सप्रेसवे पर ये हाल है तो बाकी रोड्स पर कैसे समय पर मदद मिलेगी?
क्या है टोल टैक्स?
हम जिस रोड पर चलते हैं, उसे कौन बनाता है? सरकार. जब बात हाइवे या एक्सप्रेसवे की होती है तो रोड बनाने की ये लागत भी लंबी-चौड़ी बैठती है. इन सड़कों की लागत और मेंटिनेंस निकालने के लिए सरकार मदद लेती है जनता से. कैसे? टोल टैक्स के ज़रिये. सरकार कई सड़कों को बनाने का ठेका प्राइवेट कंपनियों को दे देती है. बदले में उन्हें तय समय के लिए टोल वसूलने का अधिकार दिया जाता है. जो नए बने हुए हाइवे या एक्सप्रेसवे होते हैं, उन पर टोल टैक्स ज़्यादा होता है. जब रोड की लागत निकल जाती है, तो सरकार टोल टैक्स कम कर सकती है या खत्म कर सकती है.किस आधार पर तय होता है टोल टैक्स
किसी रोड पर टोल टैक्स तय करने के कई पैरामीटर होते हैं.किस तरह दिया जाता है टोल
दो तरह से. फास्टैग के बारे में और जानना हो तो यहांपढ़ सकते हैं. हालांकि NHAI ने कहा है कि 1 जनवरी से सिर्फ उन्हीं वाहनों को टोल पार करने दिया जाएगा, जिन पर फास्टैग लगा होगा.
टोल टैक्स की दुनिया में नई क्रांति है फास्टैग. (फाइल फोटो- PTI)
टोल देने से मुझे क्या फायदे होते हैं?
टोल टैक्स देने से रोड अपनी नहीं हो जाती. लेकिन हम जो टोल दे रहे हैं, उससे उस रोड पर कुछ ज़रूरी सुविधाएं ज़रूर सुनिश्चित की जाती हैं. जैसे कि – अगर आप कभी यमुना एक्सप्रेसवे जैसे रास्तों से जाएंगे तो आपको कम-बेसी में तमाम ऐसी सुविधाएं मिलेंगी, जिनसे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हमारा टोल टैक्स कहां जाता है. आठ लेन की सड़क. गड्ढामुक्त. जगह-जगह स्पीडोमीटर. हर गाड़ी की लेन अलग. डिवाइडर पर पेड़ वगैरह ताकि रात के समय दूसरे लेन से आने वाली गाड़ी की हेडलाइट आंखों में न चुभे. ये सब चीजें टोल टैक्स के पैसे से ही मेंटेन रहती हैं. ये नागरिक के वो अधिकार हैं, जो उसके टोल टैक्स से उसे मिलते हैं.इसीलिए जब 23 दिसंबर के हादसे में समय पर मदद नहीं पहुंची और कार में बैठे लोगों की जलकर मौत हो गई, तो सवाल उठ रहे हैं कि एक्सप्रेसवे पर ये हाल है तो बाकी रोड्स पर कैसे समय पर मदद मिलेगी?

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