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मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष को हाई कोर्ट से ज़मानत की असल वजह यह है!

लखीमपुर-खीरी केस में मोदी के मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष को हाई कोर्ट ने ज़मानत क्यों दी?

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10 फ़रवरी 2022 (अपडेटेड: 11 फ़रवरी 2022, 09:04 AM IST)
लखीमपुर-खीरी केस में मोदी के मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष को हाई कोर्ट ने ज़मानत क्यों दी?
लखीमपुर-खीरी केस में मोदी के मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष को हाई कोर्ट ने ज़मानत क्यों दी? फोटो- आजतक
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इलाहाबाद हाई कोर्ट से आज आशीष मिश्रा को ज़मानत मिल गई है. आशीष मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं. इस मामले का थोड़ा बैकग्राउंडर भी याद दिला देते हैं. 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में प्रदर्शनकारी किसानों को गाड़ी से कुचल दिया गया था. इस घटना में कुल 8 लोगों की मौत हुई. जिनमें से 4 किसान थे, 3 बीजेपी कार्यकर्ता और 1 स्थानीय पत्रकार थे. ये घटना तब हुई थी जब कृषि कानूनों को लेकर किसान केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के काफिले का विरोध करने के लिए जुटे थे. उस दिन कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को भी आना था. तो कृषि कानून और कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों पर टेनी के एक धमकी भरे बयान के खिलाफ किसान जुटे थे. जिस रास्ते पर किसान जुटे थे, डिप्टी सीएम का काफिला उस रास्ते से गुज़रना था. लेकिन प्रदर्शन के चलते नहीं गुज़रा. इसलिए शाम को किसान वापस लौट रहे थे. फिर कुछ गाड़ियां आई और कथित रूप से किसानों को रौंदते हुए आगे बढ़ गई. कार सवार कुछ लोगों को किसानों ने पकड़ कर पीट दिया. किसानों ने आरोप लगाया कि गाड़ी मंत्री टेनी की थी, और गाड़ी में टेनी का बेटा आशीष मिश्रा ऊर्फ मोनू भी सवार था. इसलिए पुलिस ने IPC की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया. और फिर घटना के कुछ दिन बाद आशीष मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया. फिर यूपी पुलिस की SIT की रिपोर्ट आई, जिसमें घटना को सुनियोजित साजिश बताया गया. 3 जनवरी को यूपी पुलिस ने लखीमपुर के लोकल कोर्ट में चार्जशीट भी दायर कर दी थी. 5000 पन्नों की चार्जशीट में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को माना. हालांकि आशीष के पिता और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी का नाम चार्जशीट में नहीं था. आशीष मिश्रा ने लोअर कोर्ट से ज़मानत मांगी थी. नहीं मिली तो हाई कोर्ट का रुख किया. और फिर आज यानी 10 फरवरी को हाई कोर्ट ने आशीष मिश्रा को ज़मानत दे दी. तो आरोपी आशीष मिश्रा को ज़मानत देने पर, उसकी टाइमिंग पर विरोधी सवाल उठा रहे हैं. क्योंकि ज़मानत वाले दिन ही यूपी में पहले फेज की वोटिंग शुरू हुई. और आरोपी केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बड़े नेता का बेटा है. इसलिए सवाल उठना लाजिमी है. पर हमें यहां देखना ये भी होगा कि ज़मानत किसी सरकार ने नहीं दी, हाईकोर्ट ने दी है. इसलिए हाईकोर्ट ने किस ग्राउंड पर ज़मानत दी है और जिरह में क्या बातें हुई हैं, उसको समझना ज़रूरी है. कानूनी मामलों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, ज़मानत पर जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने सुनवाई की.  आशीष मिश्रा के वकील थे वरिष्ठ वकील . उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि जिस थार गाड़ी ने कथित रूप से किसानों को कुचला, उसे आशीष मिश्रा नहीं चला रहे थे. दूसरी दलील ये थी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी को गोली लगने की बात नहीं आई है. मतलब हथियार चलाने की बात साबित नहीं हुई. इसके बाद आशीष मिश्रा के वकील ने दलील दी कि, अगर अभियोजन पक्ष की कहानी मान भी लें, कि आशीष मिश्रा थार गाड़ी में ड्राइवर के पास बैठे थे, और घटना के बाद मौके से भाग गए. तो भी ये साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि आशीष के कहने पर ही ड्राइवर ने थार गाड़ी किसानों पर गाड़ी चढ़ाई. और अगर ये मान भी लिया जाए कि किसानों को जानबूझकर कुचला गया, तो भी ये नहीं कहा जा सकता कि परोक्ष रूप से भी मिश्रा इस काम में शामिल था. ये तो हुई आशीष मिश्रा के पक्ष की दलील. अब आते हैं दूसरे पक्ष की दलीलों पर. केस दर्ज कराने वाले जगजीत सिंह के वकील ने क्या कहा, उस पर भी गौर करिए. उसकी दलील थी कि आशीष मिश्रा के आदेश के बिना उसका ड्राइव किसानों पर गाड़ी नहीं चढ़ा सकता, क्योंकि केंद्रीय मंत्री का बेटा होने के नाते वो बहुत प्रभावशाली है. हालांकि ये बात साबित करने के लिए वकील की तरफ से कोर्ट में कोई सबूत पेश नहीं किया गया. तो अभियोजन पक्ष की तरफ से सबूत पेश नहीं किए गए कि आशीष मिश्रा मौके पर थे.  लेकिन आशीष मिश्रा के वकील ने कहा कि उनके पास सबूत हैं कि वो घटनास्थल पर थे ही नहीं. उस वक्त वो गांव में हो रहे दंगल में थे. इसके वीडियो सूबत हैं और मोबाइल की लोकेशन है. इसके बाद वकील ने आगे कहा कि चलो मान लेते हैं कि अभियोजन पक्ष यानी आरोप लगाने वाला पक्ष जो कहानी बता रहा है, वो सही हो, तब भी तो आशीष मिश्रा को IPC की धारा 97 और 103 के तहत अपना बचाव करने का हक है. इस सेल्फ डिफेंस वाली बात को साबित करने के लिए आशीष मिश्रा के वकील ने कई दलील दीं. एक एक करके बताते हैं आपको. आरोपी के वकील ने कहा कि किसान आरोपी के पिता यानी अजय मिश्रा के एक बयान का बदला लेने के लिए जुटे थे. उन किसानों में सिख समुदाय के लोग थे. और कुछ की टीशर्ट पर खालिस्तान टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन का लोगो था. उनके पास खतरनाक हथियार थे और उन्होंने गुस्से में हेलिपेड पर कब्जा कर लिया था. किसानों को ये पता था कि वो गाड़ियां आरोपी के पिता की हैं और उनके घर से आ रही हैं. इसलिए उन्होंने आक्रामकता दिखाई. थार गाड़ी के ड्राइवर को चोट लगी थी, तो मुमकिन है कि उसका संतुलन बिगड़ गया हो, या फिर अपने निजी डिफेंस में ऐसा किया हो. और इसमें आशीष मिश्रा की कोई ग़लती साबित नहीं होती. तर्क ये भी दिया गया कि वो वाहन फुल स्पीड में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को लाने जा रहे थे. और हथियारों के साथ जमा हुए तथाकथित किसानों का जमावड़ा गैरकानूनी था.  गैरकानूनी इसलिए था कि ज़िला प्रशासन से परमिशन के बगैर 5 हज़ार लोग एक साथ नहीं जुट सकते. और उन्होंने परमिशन नहीं ली थी. तो इस तरह से खूब सारी दलीलें हुईं. हाई कोर्ट में आरोपी का पक्ष मजबूत दिखा, अभियोजन का पक्ष कमज़ोर दिखा. और फिर जज ने आशीष मिश्रा को 4 महीने की ज़मानत दे दी है. हम एक बार फिर बता देते हैं, ये सारी जानकारी हमें कानूनी मामलों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ से मिली है. अब इस मामले में दूसरे पक्ष के पास ये विकल्प बचता है कि वो जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर देंगे. बहरहाल मंत्री का बेटा जेल से छूट गया है. अब इस मामले में राजनीति वाले पहले पर आते हैं. यूपी में चुनाव हो रहे हैं, नेता दूसरे चरण के चुनाव प्रचार में जुटे हैं, तो आशीष मिश्रा की ज़मानत पर बयान आने स्वाभाविक ही थे. बयान आए भी. प्रियंका गांधी ने ज़मानत को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा
भाजपा के मंत्री के पुत्र ने 6 किसानों को कुचला, क्या उसने अपना इस्तीफ़ा दिया? लोग कहते हैं हमारे देश के प्रधानमंत्री बहुत नेक हैं, प्रधानमंत्री ने किया मौन से इस्तीफ़ा नहीं लिया? क्या उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं बनती थी?
राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने ट्विटर पर लिखा कि -
"क्या व्यवस्था है!! चार किसानों को रौंदा, चार महीनों में ज़मानत…"
तो कुल मिलाकर मंत्री के बेटे को ज़मानत मिल गई है. और इस पर राजनीति भी हो ही रही है. बाकी आप खुद समझदार हैं, सारी चीज़ें समझ ही रहे होंगे.

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