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कौन रोकेगा शाहरुख़ के कपड़े उतरने से, हिलेरी या ट्रम्प?

भारत के लिए कौन बेहतर अमेरिकी राष्ट्रपति होगा, बहुत ही जटिल है निश्चित करना.

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28 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2016, 12:45 PM IST)
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हिलेरी क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अमेरिकी प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार बन गई हैं. डॉनल्ड ट्रम्प पहले ही रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बन चुके हैं. अब सवाल ये है कि दोनों में से कौन इंडिया के लिए बेहतर साबित होगा? कौन होगा जो न्यूयॉर्क एअरपोर्ट पर शाहरुख़ खान के कपड़े उतरवाने से रोक देगा?
ट्रम्प के थूक से भरे भाषण देख के ऐसा लगता है कि उनका जीतना बाज़ार में 'गोमांस' बिकने के बराबर है. एकदम हर तरफ लोग पगला जायेंगे. किसी को कुछ समझ ही नहीं आएगा कि क्या हो रहा है. और कई जगह काली पोलीथिन में मुर्गा ले जाने वाले भी पिट जायेंगे.
हिलेरी की बेसाख्ता हंसी भी बहुत प्यारी नहीं है. उनकी कहानी उन चुड़ैलों की कहानी की तरह है जो सुन्दर साड़ी में लिपटी लम्बे बालों वाली कन्या की तरह हैं. पास जाने पर पता चलेगा कि उसके पैर पीछे की तरफ हैं.
तो होगा क्या? ये हम लोग अब तथ्यों के आधार पर देखेंगे. कि कहां-कहां इंडिया और अमेरिका उलझ रहे हैं:
1. कश्मीर: कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिका कभी भी इंडिया के पक्ष में नहीं रहा है. साफ-साफ पाकिस्तान के पक्ष में. पर ट्रम्प के अलग विचार हैं. अलग आदमी ही है वो. ट्रम्प के पाकिस्तान पर वो विचार हैं, जो इंडिया सुनना चाहता है. आतंकवाद पर बहुत पिनका हुआ है. यहां वो पाकिस्तान के खिलाफ हो सकता है. बिजनेस का आदमी है, पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं. वहीं हिलेरी की पार्टी भीतरघाघ है. हां, हां करेंगे. पर आग में घी डालते रहेंगे.
फोटो क्रेडिट: REUTERS
कश्मीर फोटो क्रेडिट: REUTERS

2. व्यापार: इसमें कई पेच हैं. ट्रम्प को अमेरिका में काम कर रहे सस्ते इंडियन नापसंद हैं. इस H-1B वीजा के मामले में ट्रम्प भारतीय लोगों को जहाज पर बैठा के भेज सकते हैं. वहीं हिलेरी की पार्टी भी इसमें बिना बोले यही काम करती है. ओबामा ने पूरे वक़्त भारत के सॉफ्टवेयर इंजीनियर समुदाय को तंग किया. बस बोला नहीं.
ट्रम्प खुद को इकॉनोमिस्ट समझते हैं. उनकी अपनी थ्योरी है. पर वो जो भी धमकी देते हैं, वो पूरी नहीं हो सकती. सुनने में अच्छी लगती है. अमेरिका व्यापार के मामले में साउथ एशिया पर बहुत ज्यादा निर्भर होता जा रहा है. सारे रिश्ते तोड़ लेना संभव नहीं है. धमकी देना संभव है. हालांकि इंडिया के राष्ट्रवादी इस बात से खुश हैं कि अगर ट्रम्प ने सुन्दर पिचाई को अमेरिका से इंडिया भेज दिया तो हमारा अपना गूगल हो जायेगा.
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3. हथियार: इस मामले में ट्रम्प ने अपने पत्ते खोले नहीं हैं. पर व्यापारी आदमी ठहरे. हथियार बेचने जाना ही है. 'इस्लाम' से दिक्कत है. तो पाकिस्तान को थोड़ा कम देंगे. हो सकता है कि इंडिया को थोड़ा सस्ते में बेच दें. हिलेरी अपनी पार्टी से अलग नहीं जाएंगी. इनको भारत और पाकिस्तान दोनों को बेचना है. ओबामा इंडिया आये थे F-22 बेचने. फिर अमेरिका जा के पाकिस्तान को F-16 बेच दिया.
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4. अनुभव: इस मामले में ट्रम्प निल बटे सन्नाटा लगते हैं. उनका विदेशी अनुभव वही है कि मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड को पार्टी पर बुलाते रहते हैं. बाकी दुनिया के नेताओं को नाम ले के गाली दे देते हैं. बाद में कहते हैं कि I was just joking. अभी रूस से रिश्ते सुधरने के चक्कर में कहा है कि दम है तो हिलेरी का ईमेल अकाउंट हैक कर के दिखाएं.
पर हिलेरी को अच्छा-ख़ासा अनुभव है. अपने पति बिल क्लिंटन के साथ 'राष्ट्रपति आवास' में रह चुकी हैं. सारी राजनीति पता है. बिल ने ही भारत और अमेरिका के सम्बन्ध को आगे बढ़ाया था. फिर अमेरिका को दुनिया में झंझट बढ़ाने से भी रोका था. तो हिलेरी क्लिंटन हैं क्लिंटन 2.0. अपनी आत्मकथा में भी उन्होंने एशिया से रिश्ते सुधारने पर बड़ा फोकस किया है.
अब कोई कहे कि बिल क्लिंटन लड़कियों के मामले में फंसे थे. तो हमको उससे क्या? उनका प्राइवेट मैटर था.
बिल और हिलेरी क्लिंटन
बिल और हिलेरी क्लिंटन

5. बात Vs. काम: यहां पर जटिल हो गया है मामला. ट्रम्प बोलते तो बहुत फटहा हैं, पर उतने फुद्दू हैं नहीं. बिजनेस सेंस बहुत तगड़ा है. मुंबई में इनका ट्रम्प टावर भी है. रियल एस्टेट के भूखे हैं. तो इंडिया के साथ बिजनेस जम सकता है. बिजनेस के अलावा कभी कुछ किया नहीं है.
हिलेरी का अलग अंदाज है. अमेरिका के बिजनेस को वो एशिया में फैलाना चाहती हैं. अच्छी-अच्छी बातें बोलती हैं. पर उनके बिजनेस के अंदाज को समझना थोड़ा मुश्किल है. एक तरफ अमेरिका के बड़े बिजनेस हिलेरी की ओर देख रहे हैं.
दूसरी तरफ उनके पति बिल क्लिंटन के संगठन को सऊदी अरब और क़तर से फंडिंग मिलने के आरोप हैं. उन देशों पर आतंकवादियों को भी फंडिंग करने के आरोप हैं. तो कहीं ऐसा ना हो कि बिजनेस में ही मामला हाथ से निकल जाए.
ट्रम्प टावर,मुंबई
ट्रम्प टावर,मुंबई

अब अगर भारत अमेरिका के राष्ट्रपति को लेकर बहुत उत्तेजित है, तो एक सच्चाई याद कर लेते हैं:
1999 में जॉर्ज बुश से पूछा गया कि भारत के प्रधानमंत्री का नाम क्या है? तो जवाब आया: 'इंडिया के नए प्रधानमन्त्री... नहीं याद है.'
पाकिस्तान के मामले में तो बुश ने अति कर दी. भविष्यवाणी कर दी जो सच हो गई. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का नाम बताते हुए कहा: 'वो जनरल है वहां....'
उस वक़्त नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे. पर कुछ समय बाद जनरल परवेज मुशर्रफ ने सत्ता हथिया ली.
जो भी हो अमेरिका का चुनाव मजेदार तो होता ही है. हर चार साल में ये त्योहार एक बार आता है. पर उसके बाद स्थिति वही रही रहती है. इस बार देखना है क्या बदलता है. वो तो शाहरुख़ के अमेरिका जाने के बाद ही पता चलेगा.
पढ़िए हिलेरी क्लिंटन के बारे में:

अमेरिकी प्रेसिडेंट रहे बिल क्लिंटन की जमकर धुनाई करती थीं हिलेरी

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