इस्लाम भारत का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है. पूरी जनसंख्या का करीब 15 प्रतिशत मुसलमानहैं. लगभग 18 करोड़ मुसलमान हैं यहां. ख़ूब घुले-मिले हैं लोग. फिर भी अक्सर ये पायागया है कि एक दूसरे के धर्म से जुड़े काफी सारे शब्द लोग समझ नहीं पाते. इसकी वजहशायद ये रही हो कि तमाम धर्मों, मज़हबों की बोलचाल की भाषा और धार्मिक कर्मकांडों कीभाषा अलग-अलग है. जैसे संस्कृत, गुरमुखी, अरबी. इसी वजह से कई बार कई शब्द आप सुनतेज़रूर हैं लेकिन उनका मतलब आपको नहीं पता होता. गौर किया जाए तो इसकी एक वजह दूसरेधर्म को समझने के प्रति उदासीनता भी है. लोग जानना ही नहीं चाहते कि अपने आस-पासरहते लेकिन दूसरे धर्म में पैदा हुए लोगों की भाषा, रीति-रिवाज, मान्यताएं क्याहैं. एक दीवार है कोई जो उस पार झांकने ही नहीं देती. कल ऐसे ही न्यूज़ रूम में बातहो रही थी. तो हमारे सब-एडिटर साहब से किसी बात पर मज़ाक में मैंने कहा कि ये ‘कबीरागुनाह’ है. उन्होंने तुरंत पूछा ये क्या होता है. मैंने समझाया. ये भी बताया किइस्लाम में गुनाहों की दो कैटेगरीज़ हैं. ‘कबीरा गुनाह’ और ‘सगीरा गुनाह’. उन्हेंबात दिलचस्प लगी. तो सोचा पाठकों से भी साझा की जाए. आइए बताते हैं.गुनाह-ए-सगीरा:ये वाले यूं समझ लीजिए गुनाहों के राजपाल यादव हैं. बहुत छोटे-छोटे गुनाह. ऐसे जोहम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कदम-कदम पर करते हैं. जैसे, किसी को गाली दे दी.किसी की चुगली कर दी. किसी का दिल दुखा दिया. मां-बाप की बात नहीं मानी. वादा कर केतोड़ दिया. झूठा वादा किया. किसी का अपमान किया. वगैरह-वगैरह. इस तरह के तमामगुनाहों को ‘गुनाह-ए-सगीरा’ कहा जाता है. ऐसे गुनाह जिनसे कोई गंभीर नुकसान नहींहुआ हो. लेकिन ऐसा नहीं है कि इन बातों को बुरा नहीं समझा जाता. इनकी एंट्री भीरजिस्टर में गुनाह के तौर पर ही होती है. इस्लाम के मुताबिक़ इसकी सज़ा पाने से आप बचसकते हैं. आपकी दुनिया में की हुई नेकियां, अच्छे काम या खुदा के सामने किया हुआसच्चे दिल से पश्चाताप आपको इन गुनाहों से बरी करा देगा.गुनाह-ए-कबीरा:ये वाले गुनाह सीरियस किस्म के होते हैं. इनमें क्षमा का प्रावधान नहीं है. ‘कबीरागुनाह’ वो होते हैं जिनके लिए कुरआन में सज़ा मुक़र्रर की गई हो या जहन्नुम में डालदेने का फरमान हो. बहुत से गुनाह इस कैटेगरी में आते हैं. जिनमें प्रमुख ये रहे:किसी की जान ले लेना. चोरी करना. डाका डालना. बलात्कार करना. अमानत में ख़यानत करना.किसी गरीब का हक़ मार लेना. इसके अलावा भी बहुत सारे. इन गुनाहों के लिए सज़ा मुक़र्ररहै. इनसे महज़ अच्छे चाल-चलन के दम पर नहीं बचा जा सकता. इस्लामी मान्यता के अनुसारइसके लिए आपको दोनों दुनिया में सज़ा भुगतनी पड़ेगी. नोट कर लें कि कबीरा शब्द काकबीर से कोई ताल्लुक नहीं है. तो अब हमने, जिनको नहीं पता था उन पाठकों को दो नएशब्द सिखा दिए हैं. ख़ूब इस्तेमाल करना. और याद रखना कि पब्लिक प्लेटफार्म परगंदी-गंदी गालियां देना ‘गुनाह-ए-अज़ीम’ है. अब इस 'गुनाह-ए-अज़ीम' को समझने के लिएआपको कोई और आर्टिकल ना पढ़ना पड़े इसलिए बताए देते हैं. 'गुनाह-ए-अज़ीम' यानी बहुतबड़ा गुनाह. हम यहां मेहनत कर रहे हैं आपको अच्छी-अच्छी जानकारियां देने के लिए.हमें गालियां देना यकीनन 'गुनाह-ए-अज़ीम' है दोस्तों! आपका दिन शुभ हो!--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: बूचड़खाने बैन होंगे तो सबसे ज्यादा फायदा जनता को, खुश होंगे मीटव्यापारी सत्ता किसी की भी हो इस शख्स़ ने किसी के आगे सरेंडर नहीं किया इस शख्स नेजिसके कंधे पर हाथ रखा वो देश का बड़ा नेता बन गया