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टैगोर की बनाई विश्व भारती यूनिवर्सिटी में क्या नया विवाद छिड़ गया कि हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा?

अक्टूबर 2018 के बाद से एक के बाद एक विवाद सामने आ रहे हैं.

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9 सितंबर 2021 (अपडेटेड: 9 सितंबर 2021, 10:23 AM IST)
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रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती यूनिवर्सिटी का विवाद पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. अब नया झगड़ा खड़ा हो गया. (यूनिवर्सिटी की फाइल फोटो आज तक)
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विश्व भारती यूनिवर्सिटी ( Visva-Bharati University). नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगोर ने इसकी स्थापना की थी. मई 1951 में इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी और 'राष्ट्रीय महत्व का संस्थान' घोषित किया गया था. यह देश की सबसे पुरानी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में से एक है. पीएम मोदी इसके चांसलर है. ये यूनिवर्सिटी पिछले कुछ समय से फिर विवादों में है. तीन स्टूडेंट्स के रेस्टिकेशन और बड़ी तादाद में स्टाफ मेंबर्स के निलंबन को लेकर. विश्वविद्यालय में क्या बवाल चल रहा है, समझने की कोशिश करते हैं. 3 स्टूडेंट्स का रेस्टिकेशन, छात्र भूख हड़ताल पर 23 अगस्त को यूनिवर्सिटी के तीन छात्र सोमनाथ सो, फाल्गुनी पान और रूपा चक्रवर्ती को रेस्टिकेट कर दिया गया था. इन पर विश्वविद्यालय में अनावश्यक विरोध प्रदर्शन और अराजकता फैलाने का आरोप था. मामला कोलकाता हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में तीन छात्रों को क्लास ज्वाइन करने की अनुमति दे दी. कोर्ट का कहना था कि तीन साल के लिए छात्रों के निष्कासन की सजा ज्यादा है. कोर्ट ने आदेश में ये भी कहा कि विश्व भारती यूनिवर्सिटी की एकेडमिक बिल्डिंग के 50 मीटर के दायरे में स्टूडेंट्स कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे. कोर्ट ने पुलिस से कुलपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कहा था.
रविंद्रनाथ टैगोर ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी. रविंद्रनाथ टैगोर ने विश्व भारती यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी.

कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद निष्कासित स्टूडेंट्स में से एक रूपा चक्रवर्ती ने कहा,
हमने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है. हम जो चाहते थे, कोर्ट की तरफ से हमें मिल गया. हम कभी भी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को बाधित नहीं करना चाहते थे. हमने केवल अपने निष्कासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. हमने भूख हड़ताल खत्म कर दी है. लेकिन वीसी और विश्वविद्यालय में अनियमितताओं के खिलाफ हमारा आंदोलन एक अलग रूप में जारी रहेगा.
कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है. 22 स्टाफ मेंबर सस्पेंड, 150 पर तलवार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, नवंबर 2019 से 22 स्टाफ मेंबर्स को सस्पेंड किया जा चुका है. इनमें 11 फैकल्टी मेंबर्स और 11 नॉन टीचिंग कर्मचारी हैं. इसके अलावा 150 से अधिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इन लोगों को किस वजह से एक्शन का सामना करना पड़ रहा है? सस्पेंड किए गए कुछ शिक्षकों ने इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की. इनमें से कुछ ने दावा किया कि उनके खिलाफ इसलिए कार्रवाई हुई, क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी में कथित अनियमितताओं के खिलाफ पीएम मोदी को लेटर लिखा था. वहीं कुछ ने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने और वित्तीय अनियमितताओं के चलते सस्पेंड किया गया. सस्पेंड किए गए 5 शिक्षकों ने अपने निलंबन को कोर्ट में चुनौती दी है.
विश्व भारती यूनिवर्सिटी फैकल्टी एसोसिएशन (VBUFA) के अध्यक्ष सुदीप्त भट्टाचार्य भी निलंबित किए गए लोगों में हैं. उनका कहना है-
विश्वविद्यालय ने मुझ पर एक महिला सहकर्मी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगाकर निलंबित किया है. यह निराधार आरोप है. हममें से कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को कुलपति के खिलाफ एक मेल लिखा था. लेटर लिखना कोई अपराध नहीं हैं, जो निलंबन का आधार बने.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भट्टाचार्य ने पीएम को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के ही हिस्सा पाठ भवन के एक प्रिंसिपल की नियुक्ति में अनियमितता का आरोप लगाया था. उनका निलंबन शुरू में तीन महीने के लिए था, जिसे दो बार बढ़ाया गया. पहले तीन महीने के लिए और फिर दो महीने के लिए.
अर्थशास्त्र के प्रोफेसर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया,
जिन लोगों ने वीसी की बात नहीं मानी या उनके कामकाज के खिलाफ बात की, उन्हें निशाना बनाया गया. भौतिकी विभाग के एक शिक्षक को एक प्रोफेसर से मिलने पर निलंबित कर दिया गया. वह मेरे खिलाफ आरोपों की जांच कर रही एक समिति का नेतृत्व कर रहे थे. क्या यह निलंबन का कारण हो सकता है?
हालांकि VBUFA के अध्यक्ष सुदीप्त भट्टाचार्य मानते हैं कि निलंबित प्रोफेसरों में से कुछ के खिलाफ आरोप सही हो सकते हैं. लेकिन क्या सभी दोषी हैं, यह जांच का विषय है. बड़ी संख्या में गलत तरीके से टीचर्स को निलंबित किया गया है.  निलंबन के अलावा, नौ शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है. Vbu1 विश्व भारती यूनिवर्सिटी इन दिनों फिर विवाद में है, मीडिया की सुर्खियां बटोर रही है.
विवादों से रहा है पुराना नाता कुलपति विद्युत चक्रवर्ती के अक्टूबर 2018 में कार्यभार संभालने के बाद से यूनिविर्सिटी में कोई ना कोई विवाद उठता रहा है.
# इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जनवरी 2020 में बीजेपी सांसद स्वप्न दासगुप्ता नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने वाले थे. उनका SFI कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया था. SFI ने इस कार्यक्रम को रोक दिया था. स्वप्न दासगुप्ता को सात घंटे तक एक कमरे में बंद कर दिया था.
# जुलाई 2020 में यूनिवर्सिटी की Executive Council ने वाइस चांसलर के साथ मिलकर एक फैसला लिया. पौष मेला को पूरी तरह से खत्म करने का. यह 125 साल पुरानी परंपरा थी. काउंसिल ने दलील दी कि यूनिवर्सिटी इस तरह के आयोजन को संभालने में सक्षम नहीं है.
#अगस्त 2020 में पौष मेला मैदान के चारों ओर बाड़ लगाने को लेकर परिसर के अंदर तोड़फोड़ हुई. इसके बाद यूनिवर्सिटी को बंद कर दिया गया. आरोप लगा कि टीएमसी नेताओं के नेतृत्व में एक ग्रुप ने VBU के गेट को तोड़ दिया. इसी मैदान में पौष मेला का आयोजन होता रहा था. इस मैदान के चारों ओर दीवार बनाने के लिए जुटाई गई निर्माण सामग्री को भी तहस नहस कर दिया गया था. इस मामले में 8 लोग गिरफ्तार हुए थे. यूनिवर्सिटी ने मामले की CBI जांच की मांग की थी.
#अगस्त 2020 में ही कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने शांतिनिकेतन में टैगोर को "बाहरी" बता दिया था. इसकी खूब आलोचना हुई. उसके बाद वीसी को माफी मांगनी पड़ी.
#दिसंबर 2020 कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने राज्य सरकार को एक लेटर लिखा. इसमें नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का नाम उन लोगों में शामिल बता दिया, जिन्होंने कैंपस में गैरकाननूी तरीके से प्लॉट लिया. अमर्त्य सेन ने आरोपों का खंडन किया. इस पर विश्व भारती एस्टेट ऑफिस की ओर से कहा गया कि उसने अवैध कब्जाधारियों की एक सूची तैयार की थी, जिसमें सेन का नाम शामिल है. वो इसलिए कि सेन का घर 138 decimals पर है जबकि मूल पट्टा 125 decimals पर दिया गया था. यूनिवर्सिटी ने आरोप लगाया कि उनके पिता को कानूनी रूप से पट्टे पर 125 decimals भूमि दी गई थी. इसेके अलावा उन्होंने 13 decimals भूमि पर कब्जा कर लिया है.
Amartya Sen Mamata Banerjee यूनिवर्सिटी ने सीएम ममता बनर्जी को लेटर लिख अमर्त्य सेन की शिकायत की थी. (फाइल फोटो- PTI)

#मार्च 2021 में कुलपति ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले वह यूनिवर्सिटी को बंद कर देंगे. 15 मार्च को टीचर्स और नॉन टीचिंग स्टाफ के साथ वर्चुअल मीटिंग हुई थी. इसमें कुलपति ने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें ठीक से काम नहीं करने दिया जा रहा है. इसलिए वह अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले यूनिवर्सिटी को बंद करना सुनिश्चित करेंगे. उनका कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था.
#मई 2021 में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक वर्चुअल लेक्चर को कैंसिल कर दिया था. नीति आयोग के संयुक्त सलाहकार संजय कुमार ये लेक्चर देने वाले थे. इसका विषय था 'बीजेपी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने में विफल क्यों रही. इस पर भी खूब बवाल हुआ था.

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