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बूटी के हेरफेर से हुई कंफ्यूजन और टल गया परशुराम का जन्म

परशुराम के जनम की अजब कहानी.

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24 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 24 फ़रवरी 2016, 08:51 AM IST)
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हाथ में फरसा और नाक पर गुस्सा. ये हैं परशुराम जो जाने जाते हैं इस धरती को 21 बार क्षत्रियों से खाली करने के लिए. सीता के स्वयंवर में धनुष तोड़े जाने से परशुराम भयंकर भड़के थे, जिसके बाद लक्ष्मण से हुई उनकी डायलॉगबाजी बहुत मशहूर है. परशुराम आम आदमी नहीं थे, इसलिए उनके जन्म की कहानी भी आम नहीं है. परशुराम को जिसके गर्भ से पैदा होना था, वह उसकी बेटी के पोते के रूप में पैदा हुए. पूरी कहानी इस तरह है. राजा गाधि की बेटी थीं सत्यवती, जिसकी शादी शुक्राचार्य के बेटे ऋचीक से हुई थी. ऋचीक ने पत्नी और सासू मां के लिए बेटा पैदा करने वाली दो अलग-अलग बूटियां तैयार कीं. फिर पत्नी सत्यवती को बुलाकर समझाया कि ये वाली बूटी तुम लेना, इससे तुम्हें एक धीर, तपस्वी और पीसफुल ब्राह्मण पुत्र होगा और दूसरी बूटी अपनी मां को दे देना. उससे उन्हें एक तेजस्वी, बड़े बड़े क्षत्रियों का संहार करने वाला उग्र पुत्र होगा. यह कहकर ऋचीक चले गए जंगल में तपस्या करने. सत्यवती दोनों बूटियां लेकर अपनी मां के पास गई तो लेकिन मां ने चालाकी दिखाई और बूटियां बदल दीं. इससे सत्यवती को समस्त क्षत्रियों का विनाश करने वाला गर्भ धारण हो गया. ऋचीक योगी आदमी थे, सब जान गए. बोले तुम्हारी मम्मी ने तुमको ठग लिया है. बच्चा अभी पेट में ही था. सत्यवती ने कहा कि मैं ऐसा बेटा नहीं चाहती. मुझे सॉफ्ट स्पोकेन सिंपल बेटा दे दो और ये उग्र टाइप की संतान को एक पीढ़ी के लिए टालकर हमारा पोता बना दो. ऋचीक को बात जंच गई, बोल- ऐसा ही होगा. तब जो है सत्यवती ने भृगुवंश जमदग्नि को जन्म दिया. जमदग्नि और रेणुका के जो बेटा हुआ, वही परशुराम थे. उधर चालाकी करने वाली सत्यवती की मां को धर्मपारायण बेटा मिलना ही था, सो मिला. उसका नाम था- विश्वरथ, जिन्हें महर्षि विश्वामित्र के नाम से जाना जाता है. (ब्रह्मपुराण से)

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