अपनी तपस्या पूरी करके ध्रुव घर वापस आ गए थे और राजा बन गए थे. एक दिन उनको न्यूज़मिली कि उनके भाई उत्तम को कुबेर भगवान के चेलों यानी यक्षों ने मार डाला है. बस,ध्रुव को 'माझी सटकली' लेवल का गुस्सा आया और धनुष-बाण लेकर यक्षों के शहर अलकानगरीनिकल लिए. वहां पहुंच कर उन्होंने अपना शंख बजाया. यक्षों को मिला सिग्नल और हो गईफाइट स्टार्ट. एक-एक कर के उन्होंने कई यक्षों को निपटा डाला. एक के बदले तीन औरतीन के बदले 6-6 तीर चलाए. जब सब यक्ष मर गए तो उनको सुंदर सुंदर दिख रही अलकानगरीदेखने का मन हुआ. पर उन्होंने सोचा की यह यक्षों की माया हो सकती है और वो रुक गए.इत्ते में आसमान से खून, हथियारों, मरे हुए शरीरों और कटे हुए हाथ-पैरों की बारिशहोने लगी. ध्रुव का गुस्सा और बढ़ गया. उन्होंने निकाला भगवान से लिया हुआ सॉलिडतीर. उसको धनुष पर चढ़ाते ही जो यक्षों ने ध्रुव को डराने के लिए जो पिच्चर चलाई थी,उसका हो गया 'दी एंड'. फिर ध्रुव ने मार-काट शुरू कर दी. बहुत कत्ले-आम हो गया तोमनु और कुबेर वहां आये और ध्रुव से लड़ाई रोकने की रिक्वेस्ट की. ध्रुव ने शांत मनसे बात को समझा और सीजफायर कर दिया. फिर कुबेर ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो'डाउन टू अर्थ' ध्रुव ने बस इतना ही मांगा कि हमेशा उनके मन में भगवान की याद रहे.वरदान का असर ऐसा होली के कलर की तरह परमानेंट निकला, कि आखिरी दिनों में ध्रुव बसभगवान को याद करते. यह भी भूल गए कि खुद कौन हैं. उनकी सरकार 36,000 साल चली. फिरएक दिन उन्हें भगवान के चेले सुनंद और नंद, एक सुंदर से रथ पर बैठाकर ले गए. रथइतना झमाझम था कि आज के जमाने की BMW फीकी पड़ जाए. जीवन भर भगवान की सेवा करने केलिए रिटायरमेंट स्कीम में ध्रुव को भगवान विष्णु के अपार्टमेंट 'बैकुंठ' में ही घरमिला. (श्रीमद्भगवत महापुराण)