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शराब पर सऊदी अरब का गेम प्लान!

सऊदी अरब के जेद्दाह में पार्टी चल रही थी. मेज़बान थे, ब्रिटिश राजनयिक सिरिल उस्मान. उन्होंने शाही परिवार को भी न्योता भेजा था. इस पार्टी में शराब का भी इंतज़ाम था. पीने वालों ने क़ायदे से पीया, मगर एक ने हद कर दी.

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liquor in saudi arabia
आसान भाषा में - सऊदी अरब में शराब
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25 जनवरी 2024 (Updated: 30 जनवरी 2024, 10:45 IST)
Updated: 30 जनवरी 2024 10:45 IST
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शुरुआत से पहले एक वैधानिक चेतावनी. इस खबर में अल्कोहल का जिक्र कई बार आएगा. हम इसके इस्तेमाल का समर्थन नहीं करते हैं. ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इसके सेवन से बचना चाहिए.

आपने वैधानिक चेतावनी सुनी. अब कहानी शुरू करते हैं.

तारीख़, 16 नवंबर 1951. सऊदी अरब के जेद्दाह में पार्टी चल रही थी. मेज़बान थे, ब्रिटिश राजनयिक सिरिल उस्मान. उन्होंने शाही परिवार को भी न्योता भेजा था. इस पार्टी में शराब का भी इंतज़ाम था. पीने वालों ने क़ायदे से पीया, मगर एक ने हद कर दी. जब अति हो गई तो उस्मान ने उसको रुकने के लिए कहा. सामने वाला शख़्स नाराज़ हो गया. उसने पहले ख़ूब सारा हंगामा किया. फिर बंदूक निकाली और उस्मान की गोली मारकर हत्या कर दी. हत्यारे का नाम था, प्रिंस मिशारी बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद. सऊदी अरब के तत्कालीन राजा अब्दुलअज़ीज़ का बेटा.

हत्याकांडा के बाद दो अहम फ़ैसला लिया गया.

- प्रिंस मिशारी शाही परिवार से था. इसलिए, सज़ाए मौत की बजाय उसको आजीवन कारावास हुई.

- दूसरी चीज़ ये हुई कि राजा ने सऊदी अरब में शराब पर पूर्ण बैन लगा दिया. इसके बाद शराब रखने या पीने के लिए ज़ुर्माने, जेल, कोड़े और कुछ मामलों में देशनिकाले तक की सज़ा दी जाने लगी.

 ये क़ानून 72 बरसों से चला आ रहा है. अब सऊदी सरकार इसमें ढील देने की तैयारी कर रही है. 07 दशकों में पहली बार सऊदी अरब में अल्कोहल की दुकान खुलने जा रही है. लेकिन कुछ शर्तों के साथ.

आसान भाषा में समझेंगे,

- सऊदी में शराब की वापसी कैसे हुई?

- शराब को लेकर सऊदी अरब और दूसरे इस्लामी देशों में क्या नियम है?

- और, सऊदी अरब की पोस्ट-ऑयल इकोनॉमी की कहानी क्या है ?


पहले देश के बारे में जानते हैं.

 नीचे दिख रहे नक्शे को देखिए, आपको दिख रहा होगा सऊदी अरब. एरिया के मामले में वेस्ट एशिया का सबसे बड़ा देश. इसका पश्चिमी किनारा रेड सी यानी लाल सागर से मिलता है. रेड सी पार करते ही अफ़्रीका शुरू हो जाता है. सऊदी अरब की ज़मीनी सीमा 8 देशों से मिलती है- जॉर्डन, इराक़, कुवैत, बहरीन, क़तर, यूएई, ओमान और यमन.  सऊदी अरब की आबादी लगभग 03 करोड़ 60 लाख है. सऊदी अरब से ही इस्लाम का उदय हुआ. इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहर मक्का और मदीना सऊदी अरब में ही हैं. मुल्क का राजकीय धर्म इस्लाम है. 93 फीसदी से अधिक आबादी इस्लाम का पालन करती है. इसमें भी 90 फीसदी आबादी सुन्नी इस्लाम को फॉलो करती है. बाकी शिया हैं. इसके अलावा, 4 फीसदी में ईसाई और बाकी लोग दूसरे धर्मों के लोग हैं.  सऊदी अरब की आधिकारिक भाषा अरबी है. राजधानी है रियाद. यही सबसे बड़ा शहर भी है.


सऊदी अरब का इतिहास 

1932 को शाही आदेश के तहत किंगडम ऑफ़ सऊदी अरब की स्थापना की गई. इब्न सऊद पहले राजा थे. कालांतर में इन्हीं का परिवार सऊदी अरब का शासक बना. 1938 में यहां तेल के कुओं की खोज हुई. इसके बाद मुल्क की किस्मत बदल गई. सऊदी अरब पैसे और वर्चस्व के मामले में मिडिल-ईस्ट में ताक़तवर बनता चला गया.

सऊदी अरब का पोलिटिकल सिस्टम 

सऊदी अरब में राजतंत्र है. इसे चलाने वाली फ़ैमिली को ‘हाउस ऑफ़ सऊद’ के नाम से जाना जाता है. इसमें 15 हज़ार से अधिक सदस्य हैं. इनका ताल्लुक पहले सऊदी स्टेट के संस्थापक मोहम्मद बिन सऊद से है. लेकिन धन-दौलत और संसाधनों के बड़े हिस्से पर दो हज़ार सदस्यों का नियंत्रण है. ये सदस्य आधुनिक सऊदी किंगडम के संस्थापक अब्दुलअजीज़ के वंशज हैं. सऊदी की सत्ता और संसाधनों पर इसी परिवार का नियंत्रण है. इसी वजह से हाउस ऑफ़ सऊद को दुनिया के सबसे अमीर शाही परिवार में गिना जाता है. सऊदी अरब में सबसे बड़ा पद है राजा का. उसके बाद क्राउन प्रिंस का नंबर आता है. क्राउन प्रिंस ही सऊदी अरब में अगले राजा बनते हैं. इस राजशाही पर कुछ प्रभाव उलेमाओं का भी रहता है. 

फिलहाल सऊदी अरब की कमान मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के हाथों में हैं. वो 2017 में क्राउन प्रिंस बनाए गए थे. सितंबर 2022 में उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया. MBS मौजूदा किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ के बेटे हैं. 


क्राउन प्रिंस बनने के बाद MBS सऊदी अरब के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मज़बूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं. उनके कार्यकाल में महिलाओं को आज़ादी मिली है. कई रुढिवादी पाबंदियों में ढील भी दी गई है. बीते कुछ बरसों में सऊदी अरब में ऐसा प्रचार किया गया है कि MBS उदारवादी विचारधारा के शासक हैं. राजनीतिक पंडितों की मानें तो MBS ख़ुद को आधुनिक इस्लाम का नेता साबित करना चाहते हैं. यही वजह है कि वो जमी-जमाई प्रथाओं को बदल रहे हैं.  इसी कड़ी में शराब की दुकान खोलने का फ़ैसला आया है. हालांकि, इसको सऊदी अरब की पोस्ट-ऑयल इकोनॉमी से भी जोड़ा जा रहा है.

अब कैसे मिलेगी शराब ?

स्टोर रियाद के डिप्लोमेटिक क़्वार्टर में खोला जाएगा. यहां सबको शराब नहीं मिलेगी. कौन खरीद सकता है? दूसरे देशों के डिप्लोमेटिक स्टाफ़्स. अभी तक वे सीलबंद पैकेजेज़ में शराब कंज़्यूम करते थे. इसको डिप्लोमैटिक पाउच कहते हैं. 

- जो भी डिप्लोमेट्स शराब का सेवन करना चाहते हैं, उनको पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा. फिर सरकार से क्लीयरेंस मिलेगी.

- डिप्लोमेट्स की उम्र 21 बरस से कम नहीं होनी चाहिए. 

- रजिस्टर्ड ग्राहकों को हर महीने 240 'पॉइंट्स' शराब मिलेगी. एक लीटर स्पिरिट को छह पॉइंट का माना जाएगा. एक लीटर वाइन को तीन पॉइंट्स के रूप में देखा जाएगा और एक लीटर बीयर एक पॉइंट में. 

 - सऊदी के अधिकारियों का कहना है कि यह दुकान शराब के अवैध व्यापार को रोकेगी.

 

 इस्लामिक देशों में शराब को लेकर क्या कानून हैं ?

-कुवैत में 1965 में शराब की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध लगा. अमरीकी मैगज़ीन TIME के मुताबिक़, इस प्रतिबंध के बाद लोगों ने शराब की तलब मिटाने के लिए परफ्यूम और स्किन साफ करने में काम आने वाले रबिंग अल्कोहल का सेवन करना शुरू कर किया. मगर कुवैत ने अपने नियमों में कोई ढील नहीं दी.

-पाकिस्तान, ओमान और क़तर में गैर-मुस्लिमों को, जिन्होंने परमिट लिया है, उन्हें लाइसेंसी रेस्टोरेंट्स और होटलों में शराब परोसी जाती है. 

- सोमालिया और ब्रुनेई: यहां सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने की सख्त मनाही है. हालांकि गैर-मुस्लिम लोग अपने प्राइवेट स्पेस में शराब पी सकते हैं. 

- सूडान: यहां 2020 तक शराब पर कंप्लीट बैन था. 2020 में सूडान ने गैर-मुस्लिमों को शराब पीने की इजाजत दे दी. हालांकि नए कानून के अनुसार अगर आपको सूडान में  शराब पीनी हो तो आप मुस्लिमों के आसपास या उनके साथ बैठकर नहीं पी सकते.

फैसले के पीछे MBS का क्या विजन है?

सऊदी अरब तेल का उत्पादन करने वाले देशों के सबसे बड़े संगठन Organization of the Petroleum Exporting Countries, शॉर्ट में OPEC का हिस्सा है. वहां हर रोज करीब 11 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है जो पूरी दुनिया के कुल प्रोडक्शन का 12 प्रतिशत है. पर सऊदी अरब ये बखूबी समझ चुका है कि तेल का खेल हमेशा नहीं चलने वाला. जमीन के नीचे दबा ये काला सोना आज नहीं तो कल खत्म होना ही है. इसलिए सऊदी ने पोस्ट-ऑयल इकोनॉमी यानी तेल खत्म होने के बाद की अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे रहा है. इसके लिए वो सोलर एनर्जी में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है. साथ ही उसे पता है कि अगर बिना तेल के देश की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त रखना है तो विदेशी पार्टनर्स को भी रिझाना पड़ेगा. 

 

इसी सोच के साथ MBS ने 2016 में विज़न 2030 नाम से एक योजना शुरू की. इसका लक्ष्य पोस्ट-ऑयल इकोनॉमी के लिए 2030 तक देश को तैयार करना है.जानकार बताते हैं कि उनके अल्कोहल स्टोर खोलने के पीछे उनके पुराने मिशन विज़न 2030 के ही प्लांस हैं.

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