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दुनिया में पांव पसार रही ये महामारी, भारत पर भी कहर

द लैंसेट की रिपोर्ट कहती है कि 1990 के बाद से दुनिया में मोटापे की चपेट में आने वाले वयस्कों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है. मोटापे का सबसे ज्यादा खतरा दिख रहा है युवा आबादी पर.

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obesity fatness lancet report
मोटापे का शिकार व्यक्ति (फोटो- एआई)
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5 मार्च 2024
Updated: 5 मार्च 2024 22:32 IST
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नीचे आप जिस शख्स की पेंटिंग देख रहे हैं. वो अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह हैं. गौर करेंगे तो पाएंगे नवाब का चेहरा भरा हुआ है. शरीर भी फैला हुआ है. कहने का मतलब नवाब की ये पेंटिंग ख़ूबसूरती या आकर्षण के तथाकथित आधिनुक पैमानों पर फिट नहीं बैठेगी. वाजिद अली शाह ही क्या, भारत के  पुराने कई नवाबों की पुरानी तस्वीर में आप ये ही पाएंगे कि उनका शरीर गठीला नहीं है.  क्योंकि उस दौर में व्यक्ति का मोटापा उसकी शोहरत, उसके पद का सिम्बल हुआ करता था. इसलिए कहावतें भी बनी, खाते पीते घर का है. 

नवाब वाजिद अली शाह (फोटो- विकीपीडिया)

एक ऐसी दुनिया में जहां भोजन मिलना मुश्किल है, मोटापे को संपन्नता का सूचक मानना, अचरज की बात नहीं. लेकिन आज हालात अलग हैं. मोटापा अब एक बीमारी बन चुका है. बल्कि कहें कि एक बीमारी बन चुका है. और ये बात हम बाकी दुनिया के लिए ही नहीं कह रहे. लैंसेट मेडिकल पत्रिका ने मोटापे पर एक रिपोर्ट जारी की है. जिसमें सामने आया है कि दुनिया में 100 करोड़ लोग मोटापे की चपेट में हैं. तो समझते हैं-
-obesity epidemic क्या है?
-लैंसेट की रिपोर्ट क्या कहती ?
- और भारत के लोगों को इससे खास चौकन्ना होने की जरुरत क्यों है? 
 

क्या है obesity epidemic?
अंग्रेज़ी में एक शब्द है obese, इसी से मिलता-जुलता एक और शब्द है Fat और Overweight. फैट -ओबीस- ओवेरवेट, हिंदी में इन सबको मोटापा बोल देते हैं. पर असल में ये सब एक नहीं हैं. Overweight होने की स्थिति में शरीर में फैट या चर्बी बढ़ जाती है. लिहाज़ा इंसान मोटा दिखने लगता है. इस कंडीशन में शरीर का वजन भी बढ़ता है इसलिए इसे ओवरवेट भी कहा जाता है. पर Obesity शरीर में बहुत समय तक फैट जमा होने के कारण  होती है. इसमें कई बीमारियों जैसे डायबिटीज और यहां तक कि हार्ट की बीमारियों का भी खतरा रहता है. ये इंसान की रिप्रोडक्शन की क्षमता को भी प्रभावित करता है. हड्डियों में समस्या से लेकर obesity आपके सोने और काम करने की क्षमता पर भी असर डालती है.

कैसे पता चलता है कि Obesity है या Overweight?
एक इंसान को obesity है या overweight, ये पता करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI निकाला जाता है. BMI निकालने का एक फॉर्मूला है जिसमें शरीर के वजन को किलोग्राम में नाप कर उसे व्यक्ति की हाइट से डिवाइड कर दिया जाता है. यहां ध्यान रखना होता है की हाइट को मीटर में नापने के बाद उसका स्क्वायर किया जाता है. उदाहरण के लिए अगर आपका वजन 70 किलो है और हाइट 1.73 मीटर माने 5 फुट 8 इंच है, तो 70 को 1.73 के स्क्वायर से डिवाइड करेंगे. इस तरह से आपका बॉडी मास इंडेक्स निकलकर आएगा 23.38.  
BMI ही ये बताता है कि व्यक्ति ओवर वेट है या ओबीस. मसलन,    
-अगर बॉडी मास इंडेक्स 18.5 से नीचे आता है तो इंसान अंडरवेट कहलाता है.
-अगर BMI की संख्या 18.5 से 25 के बीच आती है तो इसका मतलब शरीर स्वस्थ है.
-पर अगर यही संख्या 25 से 30 के बीच है तो इंसान ओवरवेट कहलाता है.
-और अगर BMI 30 से ऊपर जाता है तो मतलब आप Obesity की चपेट में हैं.

 ताजा रिपोर्ट क्या कहती है?
ये रिपोर्ट द लैंसेट नाम की एक नामचीन मेडिकल पत्रिका ने प्रकाशित की है. रिपोर्ट में 1990 से 2022 तक पूरे विश्व में हुए सर्वे के आधार पर डेटा प्रकाशित किया गया है. इस रिपोर्ट को  तैयार करने  के लिए तीन हज़ार छह सौ तिरसठ, जनसंख्या से जुड़े अध्ययनों का इस्तेमाल हुआ. और 200 देशों के 22.2 करोड़ लोगों पर सर्वे के बाद ये रिपोर्ट तैयार हुई है. सर्वे में 20 साल से ऊपर के वयस्क और 5 से 19 साल के किशोरों को शामिल किया गया है.
द लैंसेट की रिपोर्ट कहती है कि 1990 के बाद से दुनिया में मोटापे की चपेट में आने वाले वयस्कों की संख्या में दोगुना इजाफा हुआ है. मोटापे का सबसे ज्यादा खतरा दिख रहा है युवा आबादी पर. रिपोर्ट के अनुसार 1990 से 2022 तक 5 से 19 साल के लोगों में मोटापे की समस्या चार गुणा बढ़ गई है. कुलजमा बात ये है कि हर उम्र के लोगों, चाहे वो वयस्क हों या युवा, मोटापा अपना दायरा सबमें बढ़ा रहा है. इस रिपोर्ट को तैयार करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन,WHO ने भी मदद की है. अब ज़रा आंकड़ों पर गौर करते हैं.
-रिपोर्ट में देखा गया कि पूरे विश्व में 1990 में जहां 6.7 करोड़ पुरुष मोटापे का शिकार थे, वहीं 2022 में ये संख्या 37.4 करोड़ हो गई. 
-महिलाओं में मोटापे की समस्या 1990 में भी 12.8 करोड़ महिलाओं को थी. 2022 आते-आते इसमें जबरदस्त उछाल आया और ये संख्या 50.4 करोड़ हो गई. 
-कम उम्र के लड़के-लड़कियों में 1990 में ये समस्या 3.1 करोड़ को थी. 2022 में यही मोटापा पूरे विश्व में 16 करोड़ लड़के-लड़कियों को अपनी चपेट में ले चुका है.

भारत में इसका क्या असर पड़ा है?
लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार मोटापे का सबसे ज्यादा असर भारत पर हुआ है. खासकर युवा पीढ़ी पर.  हम जानते हैं कि भारत में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी की उम्र 25 साल से कम है. वहीं 65 प्रतिशत आबादी ऐसी है जिसकी उम्र 35 साल से कम है. लैंसेट की रिपोर्ट बताती है कि भारत में   
- 1990 में 2 लाख युवा लड़के मोटापे से जूझ रहे थे. 2022 में ये संख्या 73 लाख हो चुकी है.
- लड़कियों में भी ये संख्या 2 लाख के आस-पास थी. अब ये नंबर 52 लाख हो चुका है. 
 

वयस्कों की बात करें तो  
-1990 में जहां 11 लाख पुरुष भारत में मोटापे का शिकार थे, 2022 में वही संख्या 2.6 करोड़ हो गई है. 
-महिलाओं में 1990 में 24 लाख महिलाऐं मोटापे का शिकार थीं. 2022 में ये नंबर 4.4 करोड़ पहुंच गया है. 

ये आंकड़े व्यग्तिगत रूप से तो परेशानी में डालने वाले हैं ही. साथ ही देश के तौर पर भी ये एक गंभीर खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं. मुख्य रूप से भारत को मोटापे की बढ़ती महामारी से भारी आर्थिक नुकसान सहना पड़ रहा है. कैसे?    
 

बढ़ते मोटापे के साथ स्वास्थ्य के देखभाल की लागत भी बढ़ती है. दुनिया भर में अधिक वजन या मोटापा ऐसी बीमारियों को दावत देते हैं जो एक इंसान से दूसरे में तो नहीं फैलती पर खतरनाक हैं. मोटापे से दुनिया पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों को समझने के लिए ये जरूरी है कि हम मृत्यु दर पर फोकस करें जो पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ी है. यहीं नहीं, इसकी वजह से प्रोडक्टिविटी में कमी, विकलांगता में वृद्धि, लोगों का जल्दी रिटायर होना, और हेल्दी जीवन की अवधि कम होना. ये सारे फ़ैक्टर्स मानव जीवन की अवधि को लगातार कम कर रहे हैं. साथ ही इंसान की पूंजी का एक बड़ा हिस्सा इसकी वजह से बर्बाद हो रहा है. हालांकि इसी वजह से मोटापे की समस्या को लोगों ने दुनियाभर में सिरियसली लेना शुरू किया है.  
 

कितना नुकसान हो रहा है?
मोटापे की अनुमानित लागत अलग-अलग होती है क्योंकि इसका पता लगाने के लिए कई तरह के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. यहां लागत का मतलब ऐसे अमाउंट से है जो मोटापे और उससे होने वाली समस्याओं की वजह से खर्च हो रहा है. माने अगर आपको मोटापे की वजह से कोई दिक्कत या बीमारी है, तो जाहिर तौर पर आप उतने प्रोडक्टिव नहीं रहेंगे जितनी आपकी क्षमता है. उदाहरण के लिए अगर अमेरिका को देखें तो वहां मोटापे की वजह से होने वाले, आर्थिक असर से करीब  7 लाख करोड़ से  साढ़े 17 लाख करोड़ का भार अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. इसी तरह ब्राजील में भी मोटापे से संबंधित स्वास्थ्य कारणों की वजह से लागत दोगुनी हो चुकी है. 2010 में जहां ये लागत 48000 करोड़ थी, वो बढ़कर 64 हजार करोड़ पहुँच चुकी है. ये आंकड़े भारत के लिए भी खतरे की घंटी हैं. बाकयादा लैंसेट की पूरी रिपोर्ट एक खतरनाक ट्रेंड की तरफ इशारा कर रही है. 

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