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नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में आ रहे मॉरीशस के PM जुगनौत, एक सदी से भी पुराने दोनों देशों के रिश्ते

गांधी के सम्मान में मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को मनाया जाता है. 12 मार्च 1930 को ही गांधी ने अहमदाबाद से साबरमती के लिए दांडी यात्रा की शुरुआत की थी. देखा जाए तो मॉरीशस उन महत्वपूर्ण देशों में से एक है, जिसके साथ भारत ने उसकी स्वतंत्रता से पहले ही अच्छे संबंध बना रखे थे.

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narendra modi swearing in ceremony mauritius prime minister pravind kumar jugnauth
मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनौत और नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)
9 जून 2024 (Updated: 9 जून 2024, 18:31 IST)
Updated: 9 जून 2024 18:31 IST
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9 जून को नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. इस समारोह में मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, सेशेल्स, मॉरीशस, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देश के बड़े नेता शामिल होंगे. आज हम आपको मॉरिशस के बारे में बताएंगे, जहां के शीर्ष नेता और प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनौत नरेंद्र मोदी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बनने आ रहे हैं.

भारत से करीब 5 से 6 हज़ार किमी दूर अफ्रीका के पास बसा एक छोटा-सा द्वीप है मॉरीशस. इसकी राजधानी है पोर्ट लुइस. जनसंख्या करीब 12 लाख है. जिसमें लगभग 70% लोग भारतीय मूल के हैं. मॉरीशस में सारे औपचारिक काम अंग्रेजी में होते हैं. अंग्रेजी के अलावा फ़्रेंच और मॉरीशस क्रियोल भाषा का इस्तेमाल भी खूब होता है. वहां हिंदी बोलने वालों की भी ठीक-ठाक संख्या है. धर्म और मान्यता की बात करें तो हिंदू धर्म मानने वालों की संख्या यहां सबसे ज़्यादा है. उसके बाद ईसाई और इस्लाम को फॉलो करने वाले लोग हैं. मॉरीशस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा देश के टूरिज़्म पर निर्भर है.

भारत और मॉरीशस का पुराना रिश्ता

मॉरीशस पर सालों तक फ्रांस और ब्रिटिश सरकार का राज रहा. फ्रांस ने 1715 से 1810 तक राज किया. फिर ब्रिटेन ने 1810 से 1968 तक राज किया. जिसके बाद साल 1968 में मॉरीशस को स्वतंत्रता मिली. 1729 में फ्रांसीसी शासन के समय, बड़ी संख्या में भारतीयों को पुडुचेरी से मॉरीशस भेजा गया था. वहां उनसे कारीगरों और मिस्त्री का काम करवाया जाता था. उसके बाद 1834 से 1900 के बीच ब्रिटिश शासन में लगभग पांच लाख भारतीयों को फिर से मॉरीशस लाया गया. जिसमें कुछ तो वापस भारत लौट आए थे. लेकिन करीब दो-तिहाई भारतीय वहीं बस गए. मॉरीशस के इतिहास में महात्मा गांधी का नाम भी शामिल है. साल 1901 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटते वक्त गांधी जी कुछ समय के लिए मॉरीशस में रुके थे. इस दौरान उन्होंने मॉरीशस में बसे भारतीयों के कल्याण के लिए तीन संदेश दिए,

- शिक्षा का महत्व
- राजनीतिक सशक्तिकरण
   और 
- भारत से संबंध

गांधी के सम्मान में मॉरीशस का राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को मनाया जाता है. 12 मार्च 1930 को ही गांधी ने अहमदाबाद से साबरमती के लिए दांडी यात्रा की शुरुआत की थी.  

इस तरह से अगर देखा जाए तो मॉरीशस उन महत्वपूर्ण देशों में से एक है, जिसके साथ भारत ने उसकी स्वतंत्रता से पहले ही अच्छे संबंध बना रखे थे.

वर्तमान में भारत ने कई जगह मॉरीशस की मदद की.  

-  2016 में भारत ने पांच विशेष प्रोजेक्ट्स के लिए मॉरीशस को 353 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद भेजी. जिसमें मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना, सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग निर्माण, अस्पताल निर्माण, सामाजिक आवास परियोजना और स्कूली बच्चों के लिए डिजिटल टैबलेट जैसे काम शामिल थे.

- कोविड काल में, 22 जनवरी 2021 को भारत ने 1 लाख कोविशील्ड डोज़ उपहार के रूप में मॉरीशस को भेजीं. उसके बाद व्यावसायिक तौर पर COVAXIN की 2 लाख डोज़ भेजी गईं.

- 28 अप्रैल 2021 को मॉरीशस ने भारत को 200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर डोनेट किए.

- 2005 से भारत मॉरीशस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है.

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मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनौत ने अपने 30 सालों से ज्यादा के राजनीतिक करियर में कई मंत्री पद संभाले हैं. वो 1990 के दशक से मिलिटेंट सोशलिस्ट मूवमेंट पार्टी का हिस्सा रहे हैं. और अप्रैल 2003 से मॉरीशस की सबसे बड़ी पार्टी MSM के नेता हैं. जुगनौत 2017 से मॉरीशस के प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं.

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