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लगातार क्रैश होते मिग-21 को एयरफोर्स रिटायर क्यों नहीं कर पा रही है?

सोवियत वायु सेना ने इसे वर्ष 1985 में सेवा से हटा दिया. 1985 के बाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी इसे रिटायर कर दिया था.

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मिग-21 (सोर्स: पीटीआई)
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आस्था राठौर
31 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 31 जुलाई 2022, 12:38 PM IST)
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शुक्रवार 28 जुलाई की रात मिग-21 का टू-सीटर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश कर गया जिसमें भारतीय वायु सेना के दो पायलट्स शहीद हो गए. ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना रात के 9:10 पर राजस्थान के बाड़मेर में हुई. अब तक क्रैश के कारण पता नहीं चल सका है.  

मिग-21 (MiG-21) के क्रैश होने का ये पहला हादसा नहीं है. इससे पहले भी बहुत बार मिग-21 हादसों की खबरें आती रही हैं. पर क्या महत्ता है इस एयरक्राफ्ट की? क्यों अनेक बार क्रैश होने की ख़बरों के बावजूद इन्हें रिटायर नहीं किया गया है? इन्हीं सब बातों पर आज विस्तार से चर्चा करेंगे. 

मिग-21 की कहानी क्या है?

मिग-21 का फुल फॉर्म होता है मिकोयन-गुरेविच मिग-21. ये सोवियत काल का एक सुपरसोनिक जेट फाइटर और इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट है. सुपरसोनिक जेट वो होता है जिसकी स्पीड साउंड (ध्वनि) से ज्यादा होती है.  और इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट वो होता है जो अटैकर को बीच में रोके, यानि खतरे इंटरसेप्ट कर टारगेट तक पहुँचने से रोकता है. 

1959 में मिग-21 सोवियत की वायु सेना में शामिल हुआ. जबकि भारत ने साल 1963 में सोवियत यूनियन से मिग-21 का सौदा किया था. इसे सोवियत स्थित मिकोयन गुरेविच डिजाईन ब्यूरो ने डिजाईन किया था, इसीलिए नाम पड़ा मिग(MiG). 

साल 2006 में इसे अपग्रेड किया गया और बेहतर फीचर्स इसमें जोड़े गए. जैसे, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, शक्तिशाली रडार, युद्ध सामग्री की एक विस्तृत श्रृंखला को ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता, वगैरह. मिग-21 के इस अपग्रेडेड वर्जन को नाम दिया गया ‘बाइसन’. मिग-21 बाइसन (MiG-21 Bison). 

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मिग-21 (सोर्स: पीटीआई)

मिग-21 बाइसन, भारतीय वायु सेना के 7 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट्स में से एक है. ये सिंगल-सीटर, सिंगल इंजन मल्टी-रोल फाइटर विमान है. इसकी अधिकतम गति 2230 किमी/घंटा है और इसमें 23 मिलीमीटर की ट्विन-बैरल तोप होती है जिसमें चार आर-60 (R-60) क्लोज कॉम्बैट मिसाइल होती हैं. क्लोज कॉम्बैट का अर्थ होता है कोई ऐसा हथियार या युद्ध सामग्री जिनकी मदद से करीब से लड़ा जा सके. मिग-21 बाइसन को भारतीय वायु सेना की रीढ़ (backbone of IAF) कहा जाता है.

बुलाया जाता है ‘फ्लाइंग कॉफिन’ और ‘विडो-मेकर’

ये पहली दफा नहीं जब मिग-21 क्रैश हुआ हो और हादसे के बाद सवाल खड़े हुए हों. साल 2012 में, तब के रक्षा मंत्री ऐ के एंटनी ने संसद में कहा था कि रूस से खरीदे गए 872 मिग विमानों में से आधे से ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं. इस वजह से 171 पायलट्स, 39 सिविलियन्स और 8 दूसरी सेवाओं से जुड़े लोगों सहित 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. 

हालांकि, इस विमान को एयरफोर्स की रीढ़ बोला जाता है पर कई दुर्घटनाओं के कारण इसे ‘फ्लाइंग कॉफिन’ माने उड़ता ताबूत और ‘विडो-मेकर’ (widow maker) बुलाया जाता है.  टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1971-72 के बीच 400 से ज्यादा मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुए, जिनमें 200 से ज्यादा पायलट्स और 50 अन्य लोग मारे गए.  

Bharat-Rakshak.com, भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर काम करने वाली एक विमानन वेबसाइट है. इसके डेटाबेस में वो दुर्घटनाएं दर्ज हैं, जो वायुसेना में मिग के शामिल होने के बाद हुई हैं. आपको बता दें, कि पहली दो मिग दुर्घटनाएं, 1963 में ही, दिसम्बर के महीने में हुई थीं. उसके बाद मिग के क्रैश होने का सिलसिला थमा नहीं.

पिछले साल, 5 मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुए थे, जिसमें 3 पायलट्स ने अपनी जान गंवाई थी. 

दिक्कतों में बावजूद, ये एक विकल्प क्यों है?

मिग-21 भारतीय वायुसेना का सबसे लम्बी सेवा देने वाल फाइटर प्लेन है. साल 1962 में चीन और पाकिस्तान की तरफ से सीमाओं पर काफी दबाव था. ऐसी स्थिति में, हमें जरूरत थी जल्द से जल्द अपनी सैन्य क्षमता को बेहतर करने की. वो भी आर्थिक तंगी के समय. 

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मिग-21 (फाइल फोटो)

लेकिन इस दौरान एक अच्छी बात ये थी कि सोवियत संघ इस लड़ाकू विमान को बेहद अनुकूल शर्तों पर बेचने के लिए तैयार था. यहां तक कि हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के लिए भी सहमत था. जाहिर है हिंदुस्तान ने ये अवसर नहीं गंवाया. 

चूंकि ये वायुसेना में सबसे लम्बी सेवा देने वाला विमान है इसीलिए 1963 से अब तक, इस विमान में कई अपडेट्स और संशोधन किए गए हैं. 

IAF ने मिग का उपयोग करना जारी रखा है. जबकि सोवियत वायु सेना ने इसे वर्ष 1985 में सेवा से हटा दिया. 1985 के बाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी इसे सेवा से हटा दिया. हालांकि, भारतीय वायुसेना के कई कर्मचारी मिग -21 के सुरक्षा रिकॉर्ड की पुष्टि करते हैं. IAF अधिकारी बताते हैं कि पूर्व एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया और बी एस धनोआ ने वायुसेना प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मिग -21 बाइसन को अकेले उड़ाया था.

एक अन्य अधिकारी और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (सीएपीएस) के महानिदेशक, एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रि.),  ने The Print को बताया, 

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एयर वाइस मार्शल सुनील नैनोदकर (रि.), एक पूर्व सहायक वायु सेना प्रमुख, ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, 

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कयास लगते रहते हैं कि मिग-21 को बहुत पहले ही सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए था. लेकिन नए लड़ाकू विमानों, विशेष रूप से स्वदेशी तेजस एलसीए को शामिल करने में भारी देरी का मतलब है कि भारतीय वायुसेना अभी भी चार मिग -21 स्क्वाड्रन (प्रत्येक में 16-18 जेट हैं) को 'बाइसन' मानकों में अपग्रेड करने के बाद भी संचालित करती है. 

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अभिनन्दन वर्धमान (फाइल फोटो)

साल 2019 की न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार तब तक 1200 से ज़्यादा मिग-21 विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका था. इसी विमान को 2019 में जबरदस्त कवरेज मिला जब विमान का संचालन कर रहे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने भारत द्वारा बालाकोट हवाई हमले किए जाने के एक दिन बाद पाकिस्तान के एक एफ-16 लड़ाकू को मार गिराया था.

बाइसन कब रिप्लेस होगा?

राज्यसभा में श्री बृजलाल को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने कहा, “तेजस को मिग-21 लड़ाकू विमान के स्थान पर नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के एक भाग के रूप में शामिल किया जा रहा है.”

भारतीय वायुसेना के 100 से अधिक तेजस जेट विमानों के लिए हस्ताक्षर कर रहा है, जिनमें से अधिकांश एक उन्नत किस्म के हैं. यह भारतीय वायुसेना के नेतृत्व को मिग 21 लड़ाकू विमानों की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने की स्थिति में ला सकता है.

 

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