हम सब जानते हैं कि दुनिया की तरह ही भारत में भी अलग-अलग तरह के सैकड़ों टैक्स होतेहैं. पिछले साल चर्चा में रहा जीएसटी भी एक तरह का टैक्स है, जिसने अलग-अलग तरह केसैकड़ों टैक्स अपने में मर्ज कर लिए थे. इसी तरह 'इनकम टैक्स', जैसा कि नाम से हीज़ाहिर है, आपकी इनकम यानी आय पर लगने वाला टैक्स या कर है. 'इनकम टैक्स' से संबंधितटर्मीनलॉजी जैसे कि - टैक्स रिटर्न, टैक्स रिबेट, सेक्शन 80C वगैरह - सब अगले लेवलकी बातें हैं जो तब तक हमको समझ नहीं आनी जब तक हमको इनकम टैक्स की बेसिक जानकारी नहो जाए. और एक बार हमको इनकम टैक्स की पूरी गणित समझ आ गई तो बाकी चीज़ें हमारे लिएबाएं हाथ का खेल होंगी – फिर चाहे बात इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने की हो या रिबेटपाने की. तो आइए हम इनकम टैक्स का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण पाठ सबसे आसान भाषामें जानते हैं.इनकम टैक्स को कैलक्यूलेट करना इसलिए मुश्किल है क्यूंकि इसमें साधारण अंक-गणित सेइतर छः और कैलकुलेशन यानी छः और दिक्कते हैं. इन छः दिक्कतों को बताने से पहले आपकोकुछ महत्वपूर्ण बातें बताना चाहेंगे * ये दिक्कतें टैक्स कैलक्यूलेट करने भर की हैं, लेकिन इन कैलकुलेशन की दिक्कतों के वजह से ही इनकम टैक्स और अधिक 'सामजिक' हो पाता है और एक निम्नवर्गीय के ऊपर मध्यमवर्गीय और उच्च वर्गीय की तुलना में अपेक्षाकृत कम भर पड़ता है. * हर बजट में इनकम टैक्स का स्लैब और राशियां बदलती रहती हैं, लेकिन फिर भी एक बार आपको नीचे बताई गईं छः चीज़ें आ गईं तो इनकम टैक्स कैलक्यूलेशन में बस संख्याएं बदलने की जरूरतें पड़ेंगी.--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 1:स्लैब इनकम टैक्स कैलकुलेट करना इसलिए मुश्किल है क्यूंकि ये ‘फ्लैट’ नहीं है.फ्लैट क्या होता है आइये समझें :- यदि भारत में इनकम टैक्स ‘दस प्रतिशत फ्लैट’ होतातो आपकी वार्षिक आय जो भी होती उसमें से दस प्रतिशत काट के आपको मिल जाता. उदहारणस्वरूप यदि आपकी आय एक लाख रूपये वार्षिक होती तो दस हज़ार रूपये काट के बाकी कानब्बे हज़ार आपको मिल जाता. लेकिन इससे इतर भारत (और लगभग हर देश) में टैक्स के'स्लैब', या हिंदी में कहें तो स्तर/श्रेणियां, हैं. यानी एक निश्चित राशी तक कुछऔर टैक्स और उसके बाद कुछ और. नीचे हमने वर्ष 2017-18 के विभिन्न स्लैब दिए हुएहैं. और उनकी काल्पनिक 'फ्लैट टैक्स प्रणाली' से तुलना भी की है:सभी आय वार्षिक आधार पर हैं.--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 2:एक 'कैच' केवल टैक्स स्लैब ही दिक्कत नहीं है, टैक्स स्लैब में भी एक 'कैच' है. इसकैच को एक सिंपल से उदहारण से समझते हैं: ऊपर दिए गए टैक्स स्लैब के हिसाब से यदिआपकी सालान इनकम बीस लाख है तो आपका टैक्स कटना चाहिए – बीस लाख का तीस प्रतिशतयानी – छः लाख. ...लेकिन नहीं!आपका टैक्स काटने के लिए आपको हर स्लैब से गुज़रना होगा. आइए बताते हैं कैसे – #अपने बीस लाख रुपयों को लेकर पहले स्लैब से गुजरिए और ढाई लाख वहां पर छोड़दीजिए – इन ढाई लाख तक आपको कोई टैक्स नहीं देना है.# अब आपके पास बचे हैं साढ़े सत्रह लाख इसमें से ढाई लाख आप दूसरे स्लेब में छोड़दीजिए – इन ढाई लाख का टैक्स हुआ पांच प्रतिशत के हिसाब से – 12,500.# अब आपके पास बचे हैं पन्द्रह लाख और आप आ गए तीसरे स्लैब में यहां पर छोड़ दीजिएपांच लाख और – इन पांच लाख का टैक्स हुआ बीस प्रतिशत के हिसाब से – 100,000.# अब भी आपने पास बचे है दस लाख और आप हैं चौथे स्लैब में. ये अंतिम स्लैब है औरइसलिए बचे हुए दस लाख रुपए का तीस प्रतिशत के हिसाब से टैक्स हुआ – 300,000. तोआपका टोटल टैक्स हुआ – 412,500 ( 12,500 + 100,000 + 300,000) न कि 600,000. तोकैलकुलेशन तो ज़्यादा करना पड़ा लेकिन पैसे काफी बच गए. नहीं?--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 3: 87 A रिबेट या छूट ये भी गणित के हिसाब से तो दिक्कत है लेकिन इसका भी अन्य की तरहही आर्थिक फायदा ही है. # सबसे महत्वपूर्ण बात - यदि आपकी कुल आय तीन लाख पचास हज़ारसे कम है तभी ये रिबेट(छूट) मिलेगी. तो एक सिंपल बात – यदि आपकी आय तीन लाख पचासहज़ार या उससे अधिक है तो इस कैल्क्यूलेशन में पड़िए ही नहीं और सीधे चौथी दिक्कतया कैल्क्यूलेशन पर स्किप कीजिए.# दूसरी महत्वपूर्ण बात – 87 A के अंतर्गत आपको महत्तम 2,500 रुपए की छूट मिलती है.अब देखिए ढाई लाख वार्षिक आय पर तक तो आपको वैसे ही छूट मिल रही है. तो, 87 Aका दायरा हो जाता है – ढाई से साढ़े तीन लाख तक. * जिसकी आय तीन लाख होगी उसे भी 2,500 रूपये का रिबेट मिलेगा क्यूंकि तीन लाख आय वाले को अन्यथा इनकम टैक्स यूं देना पड़ता = (300,000 – 250,000)x5/100 = 2,500 (जब हमने दूसरी कैलक्यूलेशन डिस्कस की तो जाना कि ढाई लाख तक कोई टैक्स नहीं और बाकी पर पांच प्रतिशत) * और, जिसकी आय तीन लाख पचास हज़ार होगी उसे भी 2,500 रूपये का रिबेट मिलेगा. क्यूंकि महत्तम 2,500 रुपए की छूट मिलती है.तो ये सवाल उठता है कि जब तीन लाख वार्षिक आय वाले और तीन लाख पचास हज़ार वार्षिक आयवाले, दोनों को ही 2,500 रूपये की छूट मिल रही है तो 87 A रिबेट का स्लैब तीन लाखपचास हज़ार क्यूं रक्खा गया है, तीन लाख क्यूं नहीं?उत्तर बहुत सिंपल है – तीन लाख पचास हज़ार तक की आय उसमें रखी गई है क्यूंकि उसकेबाद यदि आपकी आय एक रुपया भी अधिक हुई तो 87 A के अंतर्गत एक रुपया भी इनकम टैक्सरिबेट नहीं मिलेगा. अब यदि तीन लाख स्लैब रखा जाता तो तीन लाख एक रुपए वाले को भीरिबेट नहीं मिलता. अभी कम से कम ढाई हज़ार ही सही, या तीन लाख के अमाउंट के ऊपर हीसही, रिबेट तो साढ़े तीन लाख तक की आय वालों को भी मिल रहा है न?--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 4:सरचार्ज - यदि आपकी आय पचास लाख (वार्षिक) से कम है तो इस दिक्कत/कैल्क्यूलेशन कोस्किप कीजिए. लेकिन यदि आपकी आय पचास लाख से अधिक है तो जो भी टैक्स बना ऊपर के चारकैल्क्यूलेशन के बाद उस टैक्स का दस प्रतिशत आपको और देना पड़ेगा. और यदि आपकी आय एककरोड़ से अधिक है तो आपको, जो भी ऊपर के चार कैल्क्यूलेशन के बाद टैक्स बना उस टैक्सका पन्द्रह प्रतिशत और देना पड़ेगा.--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 5:सेस! सेस भी एक तरह का टैक्स ही है बस इसमें और टैक्स में अंतर यही होता है कि CESS(सेस) किसी विशेष प्रयोजन के लिए होता है और यदि उस विशेष प्रयोजन के लिए जितनेरुपए चाहिए होते हैं उतने इकट्ठे हो जाएं तो CESS लिया जाना बंद हो जाता है.ये सब आर्दश परिभाषाएं हैं, हम अपने कैलकुलेशन की तरफ लौटते हैं.CESS गणितीय हिसाब से सबसे छोटी दिक्कत है. बस जो भी ऊपर के गुणा भाग से इनकम टैक्सबना आपका उसका तीन प्रतिशत सरकार को और दे दीजिए, तो सेस भी हो गया.--------------------------------------------------------------------------------कैलक्यूलेशन # 6:मार्जिनल रिलीफ: एक स्थिति पर गौर करें - यदि आपकी इनकम है पचास लाख तब आपको कुछ भीसरचार्ज नहीं देना लेकिन यदि आपकी इनकम हो गई पचास लाख दस रूपये तो पूरे टैक्स परसरचार्ज हो गया 10 प्रतिशत यानी तनख्वाह बढ़ी दस रुपए और टैक्स बढ़ गया लगभग एक लाखपैंतीस हज़ार रूपये. तो इससे अच्छा तो आप अपने बॉस से कहोगे कि मेरी दस रुपयातनख्वाह बढ़ाओ ही मत (वो भी सालाना).तो इस स्थिति से निपटने के लिए होता है - मार्जिनल रिलीफ. मतलब जब आप सरचार्ज केदायरे में आएं तो यह सुनश्चित करने के लिए कि जितनी आपकी इनकम बढ़ी उससे ज़्यादा कहींआपका टैक्स न बढ़ जाए आपको मार्जिनल रिलीफ दिया जाता है, या टैक्स में छूट दी जातीहै.--------------------------------------------------------------------------------अंततः : ऊपर के सभी तरह के कैलक्यूलेशन्स में टैक्स रिबेट आदि को नहीं लिया गया हैऔर केवल विशुद्ध इनकम टैक्स की बात की गई है. यदि आप 80C या इनकम टैक्स की ऐसी किसीअन्य धारा के अंतर्गत आयकर में छूट पाते हैं तो आपको उसी के अनुसार अपने कैलकुलेशनकरने होंगे. लेकिन फिर भी ऊपर की छः गणनाओं से आपको पूरी सहायता मिलेगी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: आदमी पॉटी करने गया और पेट से निकला साढ़े पांच फुट लंबा ये कीड़ाआपके बदन में दूसरों को लुभाने वाली खुशबू कहां से आती है?ड्रिंक-ड्राइव को मिक्स नहीं करते तो इंश्योरेंस-इन्वेस्टमेंट को क्यों मिक्स करतेहो यार?ये जो अजीब से नंबर आते हैं न टीवी स्क्रीन में, वो ऐंवेई नहीं हैंइन 5 कुतर्कों के चलते आपसे लगातार हर बहस जीतते आ रहे हैं लोगकैट में 20 लोगों के कैसे आ गए 100 पर्सेंटाइल, जबकि यह नामुमकिन है?--------------------------------------------------------------------------------VIDEO देखें:कुमार विश्वास के साथ खेल कहां हुआ: