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क्या है ऑपरेशन पीजन, जिसने केरल में ISIS के आतंकियों की घिग्घी बांध दी है?

आतंकी कबूतर से उड़ रहे थे, केरल पुलिस चिड़ीमार निकली.

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6 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 6 सितंबर 2017, 02:07 PM IST)
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"हाहाहा, मुझे शक है कि कोई मक्खी भी मारी गई हो. मैं खुद उस जगह पर नहीं था लेकिन कुछ बिरादर बम गिरने की जगह से थोड़ी दूर पर बैठे चाय पी रहे थे."

पिछली 22 अप्रैल को अमेरिका ने अफगानिस्तान के नंगरहार इलाके में 9,800 किलोग्राम का भारी-भरकम बम गिराया था. 30 फीट लंबे और 1 मीटर चौड़े इस बम को 'मदर ऑफ़ ऑल बम' कहा गया था. केरल के पलक्कड़ के रहने वाले बेस्टिन विंसेट ने यह संदेश 'इंडियन एक्सप्रेस' को सोशल मीडिया ऐप 'टेलीग्राम' पर भेजा था. बेस्टिन ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था और इस्लामिक स्टेट से जुड़ गया था. मई 2016 में केरल से 21 नौजवान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकते हुए अफगानिस्तान पहुंच गए थे. ये लोग अफगानिस्तान के कब्जे वाले नंगरहार इलाके में इस्लामिक स्टेट द्वारा चलाए जा रहे जिहाद का हिस्सा बनने के लिए वहां पहुंचे थे. इस्लाम अपनाने के बाद बेस्टिन ने अपना नया नाम याहया रख लिया था. इस संदेश को भेजने के कुछ दिन बाद अमेरिकी ड्रोन हमले में उनके मारे जाने की खबर आई. वो इस्लामिक स्टेट की तरफ से लड़ते हुए मारे जाने वाले मलयाली युवक थे.

3 जून, 2017 को केंद्र की बीजेपी सरकार के तीन साल पूरे होने पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह एक सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने अपनी सरकार की कामयाबी गिनवाते हुए कहा कि भारत मुसलमानों की आबादी के हिसाब से दुनिया का दूसरा बड़ा मुल्क है. इसके बावजूद यहां इस्लामिक स्टेट को अपने पैर जमाने की जगह नहीं मिली."


गृह मंत्री राजनाथ सिंह
गृह मंत्री राजनाथ सिंह

अभी तक भारत में इस्लामिक स्टेट ने किसी भी आतंकी वारदात को अंजाम नहीं दिया है. इस लिहाज से देखा जाए तो गृह मंत्री एकदम दुरुस्त फरमा रहे थे. लेकिन क्या सच में ऐसा है? आंकड़ों पर निगाह डाले तो इस साल मार्च तक देश भर में इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के आरोप में 75 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें केरल से 21, तेलंगाना से 16, कर्नाटक से 9, महाराष्ट्र से 8, मध्य प्रदेश से 6, उत्तराखंड और तमिलनाडु से 4-4, उत्तर प्रदेश से 3, राजस्थान से 2, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल से 1-1 लोग शामिल हैं.

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यह कश्मीर नहीं, बल्कि केरल है जो सबसे ज्यादा IS की चपेट आया है. खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 54 युवा मलयाली इस्लामिक स्टेट की तरफ से विभिन्न मोर्चों पर या तो लड़ रहे हैं या फिर लड़ते हुए मारे गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों की तमाम कोशिशों के बावजूद ये सिलसिला रुका नहीं है. इसी साल अगस्त में मलप्पुरम से एमटेक कर रहा नजीब अब्दुल रहीम केरल से इस्लामिक स्टेट का सबसे ताजा रंगरूट है. 26 अगस्त को उसकी मां खमरुनिस्सा को टेलीग्राम पर छोटा सा संदेश मिला, "वह जिहाद के रास्ते पर है."

केरल में इस्लामी चरमपंथी संगठनों का इतिहास नया नहीं है. 1977 से 2006 तक सूबे में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) का काफी बोलबाला था. सिमी के प्रतिबंधित होने के बाद अब्दुल नसीर मदनी ने नवम्बर 2006 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया बनाया था. 2014 में पीएफआई से असंतुष्ट कई धड़ों का रुख इस्लामिक स्टेट की तरफ हो गया.


पोपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का एक पोस्टर
पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का एक पोस्टर

पुलिस को इस मामले में पहली सफलता मिली जुलाई 2016 में. खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी मिली कि केरल में इस्लामिक स्टेट से जुड़े कुछ लोग सूबे में हिंसक वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. सायबर निगरानी के दौरान पुलिस की नजर पड़ी आमिर अली नाम के एक फेसबुक अकाउंट पर. इस अकाउंट पर मलयाली में इस्लामिक स्टेट के पक्ष में संदेश भेजे जा रहे थे. पुलिस ने इस अकाउंट की छानबीन शुरू की तो पता चला कि इसे असल में दुबई में बैठा शजीर मंगलासेरी चला रहा था.

कौन था मंगलासेरी?

शजीर मंगलासेरी उत्तरी वायनाड जिले के सुलतान बाथरी का रहने वाला एक सिविल इंजीनियर था. वो 12 साल पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का सक्रिय सदस्य था. काम के सिलसिले में दुबई चला गया था और फिलहाल वहीं रह रहा था. 2016 के जून में उसने दुबई में अपनी नौकरी छोड़ी और ईरान के रास्ते इस्लामिक स्टेट के 'जेहाद' में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान चला गया. अफगानिस्तान में रहते हुए मंगलासेरी ने टेलीग्राम पर एक ग्रुप बनाया, "अंसार-उल-खिलाफ-केरल".


शजीर मंगलासेरी (बाएं जिंदा, दाएं दफनाए जाने से पहले की तस्वीर)
शजीर मंगलासेरी (बाएं जिंदा, दाएं दफनाए जाने से पहले की तस्वीर)

वो 2014 से केरल में इस्लामिक स्टेट की जड़ें मजबूत करने में लगा हुआ था. सबसे पहले उसने टेलीग्राम पर एक ग्रुप 'दी ग्रेट' बनाया. इस पर वो इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों की जानकारी दूसरे सदस्यों तक पहुंचाता. अक्टूबर 2015 में बाकायदा इस्लामिक स्टेट का केरल मोड्यूल लॉन्च किया गया. शजीर मंगलासेरी इसका अमीर या प्रमुख बना. इसी साल 13 अप्रैल को सूचना मिली कि मंगलासेरी अफगानिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया.

मंगलासेरी के अफगानिस्तान चले जाने के बाद मोईनुद्दीन परकदावत उसका काम देखने लगा. परकदावत केरल के कासरगोड जिले का रहने वाला है. यह 25 साला नौजवान उस समय आबूधाबी में सेल्स एग्जेक्युटिव का कर रहा था. वो मंगलासेरी के साथ ईरान की सरहद तक गया भी, लेकिन उसे वहां से लौटा दिया गया. उसे केरल में इस्लामिक स्टेट का काम संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई.

कनमाला की चोटी पर भांडा फूटा

मंगलासेरी और परकदावत के बीच टेलीग्राम पर चल रहा संवाद भारतीय खुफिया एजेंसियों के राडार पर आ चुका था. इन्ही संदेशों के जरिए पता लगा कि इस्लामिक स्टेट के मोड्यूल के सदस्य 2 अक्टूबर को मिलने वाले हैं.


केरल में पकडे गए उमर-अल-हिंदी मोड्यूल के सदस्य
केरल में पकड़े गए उमर-अल-हिंदी मोड्यूल के सदस्य

इस समय मंगलासेरी का अहम सिपहसलार मनसीद महमूद उर्फ़ उमर अल हिंदी भारत आया हुआ था. कन्नूर का रहने वाला महमूद दोहा में सेल्स एग्जेक्युटिव का काम करता था. उसने वहां फिलीपीन मूल की महिला से शादी कर रखी थी. 2 अक्टूबर की मीटिंग का सबसे बड़ा सूत्रधार यही था. इस मीटिंग में केरल से सटे तमिलनाडु के इलाके में आतंकी हमला करने की योजना को आखिरी रूप दिया जाना था. मीटिंग की जगह तय हुई कन्नूर के पास ही स्थित कनमाला पर्वत की चोटी.

पुलिस को पहले से इस मीटिंग की खबर थी. उसने यहां से महमूद के अलावा मोड्यूल के पांच और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. इस तरह सूबे में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों का भांडाफोड़ हुआ.

फिर शुरू हुआ ऑपरेशन पिजन

उमर-अल-हिंदी के जरिए सूबे में इस्लामिक स्टेट का पर्दाफाश हो चुका था. इसके करीब सात महीने बाद सूबे के मुख्यमंत्री ने मई 2017 में पुलिस को इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ख़ास दल बनाने की इजाजत दी.

आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों सहित 90 सदस्यों का दल बनाया गया. इसका काम है सूबे में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों पर नजर रखना. केरल में इस्लामिक स्टेट का खतरा इसलिए भी बड़ा था क्योंकि यहां नौजवानों का एक बड़ा हिस्सा रोजी-रोटी कमाने अरब देशों में जाता है. प्रवासी मलयालिओं की वजह से इस्लामिक स्टेट के स्थानीय मोड्यूल के पास फंड पहुंचने का काम आसान हो जाता है.


केरल पुलिस के खुफिया विभाग के प्रमुख मोहम्मद यासीन
केरल पुलिस के खुफिया विभाग के प्रमुख मोहम्मद यासीन

पुलिस ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को नाम दिया है, 'ऑपरेशन पिजन'. इसके तहत पुलिस करीब 1,000 संदिग्धों की सोशल मीडिया पर हो रही गतिविधि की जांच कर रही है. पुलिस की नजर 60 ऐसे नौजवानों पर है, जो किसी भी समय इस्लामिक स्टेट की लड़ाई का हिस्सा बनने के लिए देश छोड़ कर भाग सकते हैं. केरल पुलिस में खुफिया विभाग के डीजीपी मोहम्मद यासीन ने टुडे से बातचीत के दौरान कहा-


"हमने राज्य में लगभग 1,000 लोगों की स्क्रीनिंग है. इसके आधार पर हम इस्लामिक स्टेट के मोड्यूल पर निगाह रखने के नए तरीके खोज रहे हैं. हम उन तरीकों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं जिनके जरिए लोगों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है. हम संदिग्धों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच कर रहे हैं. राज्य के मोड्यूल्स का मजबूत वैश्विक सम्बन्ध है. ख़ास तौर पर खाड़ी देशों के साथ, क्योंकि वहां बहुत से अप्रवासी मलयाली रहते हैं. इस्लामिक स्टेट एक वैश्विक चुनौती है और हमारा काम सिर्फ सूबे तक सीमित है."

केरल में जिस तरह से पुलिस इस्लामिक स्टेट की चुनौती के खिलाफ खड़ी हुई है, वो देर से उठाया गया जरूरी कदम है. लेकिन ये खतरा सिर्फ केरल तक नहीं सीमित है. दक्षिण के बाकी राज्यों में भी इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी से आंख फेर लेना समझदारी भरा काम नहीं कहा जा सकता.



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