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अरबों रुपये से बन रहे अखौरा-अगरतला रेलवे लिंक से भारत को क्या फायदा है?

पीएम मोदी और बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना ने 1 नवंबर को दोनों देशों के महत्व की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया. इनमें सबसे ख़ास है- अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक. इसके अलावा, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और बांग्लादेश के रामपाल में मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट की यूनिट 2 का भी उद्घाटन हुआ है.

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1 नवंबर 2023 (पब्लिश्ड: 10:30 PM IST)
agartala akhaura railway link
अगरतला-अखौरा रेल लिंक का ट्रायल सफल रहा है. (फोटो सोर्स- PTI)
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PM मोदी और बांग्लादेश (Bangladesh) की उनकी समकक्ष शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने बुधवार, 1 नवंबर को दोनों देशों के महत्व की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन किया. इनमें सबसे ख़ास है- अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक (Aagartala Akhaura cross border rail link). इसके अलावा, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और बांग्लादेश के रामपाल में मैत्री सुपर थर्मल पावर प्लांट की यूनिट 2 का भी उद्घाटन हुआ है. इनमें भारत का पैसा लगा है. उद्घाटन के मौके पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक की शुरुआत को ऐतिहासिक और पुराने आपसी संबंधों की बेहतरी वाला कदम बताया है.

तीनों प्रोजेक्ट्स में कितना पैसा लगा?

इंडियन एक्सप्रेस अखबार की एक खबर के मुताबिक, अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक पर अब तक 862 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. ये खर्च भारत कर रहा है. वहीं खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए रियायती कर्ज के तौर पर भारत सरकार ने बांग्लादेश को 3 हजार करोड़ रुपए दिए हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत मोंगला बंदरगाह और खुलना में मौजूदा रेल नेटवर्क के बीच करीब 65 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेलवे लाइन भी बनेगी. फायदा ये है कि बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह मोंगला, इस रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा.

इसके अलावा, मैत्री सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए भारत ने बांग्लादेश को 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन दिया है. 1320 मेगावाट के इस थर्मल पावर प्लांट को बांग्लादेश के खुलना डिवीजन के रामपाल इलाके में बनाया जा रहा है. पीएम मोदी और शेख हसीना ने सितंबर 2022 में इसकी पहली यूनिट का उद्घाटन किया था.

रेल लिंक का ट्रायल-रन सफल

अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक का ट्रायल, सोमवार, 30 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे हुआ. 4 डिब्बों को एक लोकोमोटिव इंजन से जोड़कर इस रूट के एक नए रेलवे स्टेशन, निश्चिंतपुर में रोका गया. इसी के साथ, ट्रायल सफल होने की जानकारी दी गई.

आज रेल लिंक सहित सभी तीनों प्रोजेक्ट्स का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन करते हुए PM मोदी ने कहा,

"ये खुशी की बात है कि हम एक बार फिर से भारत-बांग्लादेश सहयोग की सफलता का जश्न मनाने के लिए जुड़े हैं. मुक्ति संग्राम के दिनों से ही त्रिपुरा का बांग्लादेश के साथ मजबूत संबंध रहा है. पिछले 9 सालों में हमारा आपसी व्यापार तीन गुना हुआ है. आज, अखौरा-अगरतला रेल लिंक का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण है. यह बांग्लादेश और भारत के नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के बीच पहला रेलवे लिंक है."

उद्घाटन के मौके पर शेख हसीना ने भी कहा कि भारत-बांग्लादेश के बीच इन प्रोजेक्ट्स का जॉइंट इनॉगरेशन, हमारी पक्की दोस्ती और सहयोग को दिखाता है.

रेल लिंक कहां बन रहा है?

जियोग्राफ़ी समझ लीजिए. भारत और बांग्लादेश के बीच, 4 हजार किलोमीटर से ज्यादा का बॉर्डर है. इसमें से बांग्लादेश, भारत में पश्चिम बंगाल के साथ करीब 2200 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है. जबकि नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के साथ, बांग्लादेश की सीमा असम के साथ 262 किलोमीटर, त्रिपुरा के साथ 856 किलोमीटर, मिजोरम के साथ 318 किलोमीटर और मेघालय के साथ 443 किलोमीटर लंबी है. माने सबसे ज्यादा त्रिपुरा के साथ. त्रिपुरा से ही बांग्लादेश के लिए रेलवे लिंक बन रहा है.

फायदे क्या हैं?

बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति दिलचस्प है. नक्शे में ये भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से अलग करता दिखता है. इसके ठीक ऊपर पश्चिम बंगाल का बेहद संकरा सिलीगुड़ी कॉरिडोर है. इसी एक-अकेले पतले गलियारे के जरिए असम और फिर नॉर्थ-ईस्ट के बाकी राज्यों में पहुंच सकते हैं. अखौरा-अगरतला क्रॉस-बॉर्डर रेल लिंक के जरिए अगर बांग्लादेश होकर त्रिपुरा जाया जाए तो आसानी भी होगी और वक़्त भी बचेगा. ये रूट करीब 15 किलोमीटर लंबा है. भारत में 5 किलोमीटर और बांग्लादेश में 10 किलोमीटर. इससे बांग्लादेश की राजधानी ढाका के रास्ते त्रिपुरा की राजधानी अगरतला और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक जाया जाए तो सफ़र में करीब 10 घंटे कम वक़्त लगेगा. अभी अगरतला से कोलकाता तक का रेलवे रूट 1600 किलोमीटर है. ये दूरी तय करने में अभी 30 घंटे से ज्यादा का वक़्त लगता है.

इसके जरिए मालगाड़ियों की आवाजाही की लागत कम होगी. इसके अलावा, नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों और बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह के बीच सीधी पहुंच भी मिलेगी. दी लल्लनटॉप के निखिल ने इस पर एक रिपोर्ट भी की थी जिसका वीडियो आप यहां देख सकते हैं.

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हालांकि इस परियोजना में कुछ देरी हुई है. साल 2012-13 में ही इसे मंजूरी दे दी गई थी. लेकिन आधारशिला रखने में चार साल लग गए. 2016 में ये काम हुआ. इस रेल लिंक में एक बड़ा और तीन छोटे पुल भी शामिल हैं. अब तक इसमें करीब 862 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. रेलवे लिंक पर नियमित आवाजाही शुरू होने में अभी कुछ वक़्त और लग सकता है. 

वीडियो: लल्लनटॉप पहुंचा भारत बांग्लादेश की सीमा पर तो क्या चौंकाने वाली चीज देखने को मिली?

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