''अब 98.1 फीसदी बैंक खाते इंश्योर्ड हैं. अगर कोई बैंक डूबा तो 3 महीने के भीतरआपके पैसे मिल जाएंगे."यह बात जब देश के प्रधानमंत्री कह रहे हों तो किसी शक-ओ-शुबह की गुंजाइश नहीं रहजाती. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 12 दिसंबर को ‘डिपॉजिटर्स फर्स्ट:गारंटीड टाइम-बाउंड डिपॉजिट इंश्योरेंस पेमेंट अप-टु ₹5 लाख’ कार्यक्रम में यह बातकही थी. यानी बैंक डूबने पर पहले आपको 1 लाख रुपये मिलते थे, अब 5 लाख रुपये तक कीसरकारी गारंटी मिलेगी. सरकार इस बारे में पहले ही कानून बना चुकी है. लेकिन जो बातइस ख़ुशनुमा ख़बर की सुर्खियों में दब गई, वह यह कि 98 फीसदी बैंक खाते तो गारंटीके दायरे में हैं, पर बैंकों में जमा करीब आधी रकम अब भी इंश्योर्ड नहीं है.यहीं से आपको टेंशन मिलनी शुरू होती है. एक साथ कई सवाल दिमाग के बहीखाते मेंएंट्री मारने लगते हैं. मसलन, बैंक डूबा तो पांच लाख से ऊपर की रकम का क्या होगा?कैसे पता करेंगे कि कौन-सा बैंक सेफ या अनसेफ है ? दो बैंकों में 5-5 लाख से ज्यादाहैं और दोनों डूब गए तो क्या होगा? किसी बैंक के जरिए अगर पब्लिक प्रॉविडेंट फंड(PPF) या सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जैसी स्कीमों में पैसा लगा रहे हैं, तो क्याबैंक डूबने पर वह रकम भी संकट में फंसेगी ? ऐसे ही कुछ सवाल पीएम के भाषण के बाद सेसोशल मीडिया में भी वायरल हैं. यहां हमने बैंक डिपॉडिट इंश्योरेंस से जुड़े इन्हींसवालों और शंकाओं का समाधान ढूंढने की कोशिश की है. साथ ही वो जानकारियां भी दे रहेहैं, जो एक आम जमाकर्ता के काम आ सकती हैं. 50.9 फीसदी रकम ही सिक्योर्ड बैंकआंकड़ों पर रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की सालाना रिपोर्ट बताती है कि देश के सभीबैंकों में कुल 149.6 लाख करोड़ रुपये जमा हैं. डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा 1 लाखसे 5 लाख रुपये होने के बावजूद 76.21 लाख करोड़ रुपये की रकम ही सिक्योर हो पाई है,जो कुल जमा का 50.9 फीसदी है. यानी बैंकों में जमा 73.4 लाख करोड़ रुपये या कह लेंकि 49.1 फीसदी रकम अब भी इस इंश्योरेंस के दायरे से बाहर है. यह स्थिति तब है, जबएक लाख की इंश्योर्ड सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जा चुकी है. एक लाख का इंश्योरेंस1993 से चला आ रहा था. उससे पहले 50 हजार और 30 हजार की रकम इंश्योर्ड हुआ करती थी.इस लिमिट को बढ़ाने के लिए कानूनी संशोधन इसी साल अगस्त में हुआ. इसकी नौबत तब आईजब हाल ही में एक के बाद एक कई बैंकों के खस्ताहाल होने की खबरें आने लगीं. आरबीआईको तुरंत दखल देना पड़ा. पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC), यस बैंक,लक्ष्मी विलास बैंक जैसे बड़े बैंकों से निकासी पर अचानक रोक लग जाने से देशभर मेंसनसनी भी फैली. हर जमाकर्ता बैंक में अपनी रकम को लेकर चिंतित होने लगा था. कुल98.1 फीसदी बैंक खातों का कवरेज सुनने में अच्छा लग रहा है, लेकिन आंकड़ों को थोड़ागहराई से देखें. देश में कुल 252.6 करोड़ बैंक खाते हैं. 247.8 करोड़ सिक्योर्ड होगए हैं. यानी अब भी करीब 4.8 करोड़ खाते और उनमें रखे पैसे सिक्योर्ड नहीं हैं.पीएमसी बैंक में संकट के दौरान की फाइल फोटो (साभार: बिजनेस टुडे)रकम दिलाने का जिम्मा किस पर? बैंकों में जमा पांच लाख रुपये तक की रकम को इंश्योरकरने का जिम्मा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) का है. यहRBI की सब्सिडियरी है यानी इस पर मालिकाना हक और कंट्रोल RBI का है. देश के हर बैंकका इसके तहत रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है. 31 मार्च 2021 तक कुल इंश्योर्ड बैंकों कीसंख्या 2058 थी. इनमें 139 कमर्शियल बैंक और 1,919 कोऑपरेटिव बैंक थे. वे विदेशीबैंक जिनकी शाखाएं भारत में हैं, उनका डिपॉजिट भी इसके दायरे में है. इसके तहतसेविंग, करंट, फिक्स्ड डिपॉजिट सहित सभी तरह के खाते कवर होते हैं. रकम इंश्योरकरने का खर्च यानी बीमा का प्रीमियम ग्राहकों को नहीं बल्कि बैंकों को ही भरना होताहै. जो बैंक लगातार तीन अवधि में DICGC के पास प्रीमियम जमा नहीं करते, उनकारजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया जाता है. कुछ खास तरह के डिपॉजिट इंश्योर्ड नहीं होते,मसलन विदेशी सरकारों की ओर से जमा कराई गई रकम, केंद्र और राज्य सरकारों की रकम यादो बैंकों के बीच होने वाले आपसी डिपॉजिट को भी इस गारंटी से बाहर रखा गया है. क्यापता मेरा बैंक इंश्योर्ड है या नहीं? अगर आपने किसी सरकारी या बड़े प्राइवेट बैंकमें पैसा जमा किया है, तो इस चिंता से मुक्त हो जाइए कि वह बैंक इंश्योर्ड है यानहीं. जिस भी वित्तीय संस्थान के नाम के साथ बैंक लगा है, उसका इंश्योर्ड होनाअनिवार्य है. लेकिन फिर भी अगर 4 करोड़ से ज्यादा खाते इसके दायरे से बाहर हैं, तोइसका मतलब है कि कुछ बैंक दबे-छुपे काम कर रहे हैं. इनमें ज्यादातर कोऑपरेटिव यालोकल बैंक ही होंगे. ग्रामीण या कस्बाई स्तर पर चलने वाली 'प्राइमरी कोऑपरेटिवसोसायटीज' को DICGC रजिस्टर नहीं करता, हालांकि इन्हें पैसे जमा करने का लाइसेंसमिलता है. वैसे तो DICGC का निर्देश है कि हर बैंक अपनी ब्रांच में यह जानकारीडिस्प्ले करे कि वह इंश्योर्ड है. लेकिन फिर भी किसी ग्राहक को शक है तो वह DICGCकी वेबसाइट पर जाकर बैंकों की लिस्ट सर्च कर सकता है. 5 लाख से ऊपर की गारंटी कौनलेगा? पांच लाख रुपये तक की रकम इंश्योर्ड होने की खबर जितनी राहत नहीं देती, उससेज्यादा टेंशन देती है. यानी इससे ऊपर की रकम राम भरोसे है. नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफबैंक वर्कर्स के पूर्व सेक्रेट्री जनरल अश्वनी राणा ने 'दी लल्लन टॉप' को बताया,"यह काफी चिंताजनक है. आखिर 5 लाख से ऊपर की रकम अनसेफ क्यों छोड़ी जाए. सरकार सेबहुत पहले से मांग होती रही है कि वह एक नॉमिनल प्रीमियम लेकर 5 लाख से ऊपर की रकमको भी इंश्योर करे. उसे एक स्पेशल बैंक इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करनी चाहिए. इससेबैंकिग सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ेगा. बड़ी रकम के लिए कोई भी जमाकर्तास्वेच्छा से मामूली प्रीमियम देने को तैयार होगा."वहीं, दिल्ली के टैक्स कंसल्टेंट सीए राकेश गुप्ता कहते हैं,"डिपॉजिटर्स प्रोग्राम में प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद से लगातार क्लाइंट्स के फोनआ रहे हैं. मेरे एक क्लाइंट के दो करोड़ रुपये बैंकों में जमा हैं. वह जानना चाहतेहैं कि क्या वह इसे सेफ करने के लिए कोई पॉलिसी खरीद सकते हैं? लोग पेमेंट बैंक मेंजमा रकम को लेकर भी चिंतित हैं. इसके अलावा पीपीएफ, डीमैट अकाउंट और अन्यइंस्ट्रूमेंट में पड़ी रकम की सिक्योरिटी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.' राकेशगुप्ता आगे बताते हैं, "5 लाख की गारंटी अपने आप में डरावनी है. यानी बैंक में आपके30 लाख रुपये जमा हैं और बैंक डूबने पर आपको 25 लाख गंवाने होंगे. इससे आम आदमी केमन में एक तरह की इनसिक्योरिटी पैदा होती है."#pmcbankdepositors are facing hardship at present. They haven't got anything till nowexcept the 1 lakh given to them in last two years. Why not resolve itimmediately?Middle class has life savings in the bank, which certainly is much higher than 5lakhs. @narendramodiJi https://t.co/ATRdfTKJzw— Advocate Vivek Dixit (@AdvocateVivekD3) December 13, 2021दो बैंकों में जमा, दोनों डूबे तो? अगर एक ही व्यक्ति के दो बैंकों में पैसे जमाहैं और दोनों ही बैंकों पर वित्तीय संकट या डूबने की स्थिति आ जाती है, तो दोनोंखातों पर अलग-अलग गारंटी मिलेगी. यानी दोनों बैंकों में 5-5 लाख रुपये सिक्योर्डहोंगे. ऐसे में यह चलन भी बढ़ेगा कि लोग बड़ी रकम एक बैंक में न रखकर कई बैंकों मेंरखेंगे. यह भी जान लें कि सिक्योरिटी कवरेज केवल आपके जमा को ही नहीं, उस पर मिलेब्याज को भी मिलता है. यानी आपने 4 लाख रुपये जमा किए थे और ब्याज के साथ वह रकमबढ़कर 5 लाख हो गई है तो पूरे पांच लाख आपको मिलेंगे. लेकिन एक व्यक्ति का एक हीबैंक में अलग-अलग खातों में अधिक पैसे जमा हों, तब कुल कवरेज पांच लाख का ही होगा.बैंक में PPF खाता कितना सेफ? 5 लाख तक बैंक डिपॉजिट सिक्योर होने की खबर ने कईसरकारी स्कीमों के निवेशकों को भी टेंशन में ला दिया है. इनमें कई डाक योजनाएं हैं,जिनके खाते बैंक में भी खुलते हैं. कुछ बीमा और निवेश स्कीमें भी हैं, जिनमेंबैंकों के जरिए ही पैसे जमा होते हैं. मसलन पीपीफ और सुकन्या समृद्धि योजना केनिवेशक भी पूछने लगे हैं कि बैंक डूबने के साथ ही उनका पैसा तो नहीं डूबेगा ?जानकारों का कहना है कि पीपीएफ या सुकन्या योजना केंद्र सरकार की स्कीम है, न किबैंक की अपनी जमा योजना. बैंक के डूबने का उस जमा योजना या उसकी रकम पर कोई असरनहीं होगा. उस रकम की पूरी गारंटी भारत सरकार की है. उन पर ब्याज दरें घट-बढ़ सकतीहैं, रिटर्न कम हो सकता है, लेकिन जो भी रकम बैलेंस में है, वह पूरी तरह सुरक्षितहै.नई दिल्ली में 'डिपॉजिटर्स फर्स्ट' कार्यक्रम के दौरान एक जमाकर्ता को चेक देतेप्रधानमंत्री मोदी (साभार: आजतक)कितने दिन में मिलेगा पैसा? सरकार का दावा है कि अब किसी भी बैंक के डूबने कीस्थिति में ग्राहक यानी जमाकर्ता को 90 दिन के भीतर पैसा मिल जाएगा. पहले इसमें8-10 साल तक लग जाते थे. क्योंकि सरकार तब तक पैसा नहीं देती थी, जब तक उस बैंक केऐसेट बेचकर फंड न जमा कर लिया जाए. लेकिन अब कानूनी संशोधन के बाद व्यवस्था की गईहै कि बैंक की जमा-निकासी पर आरबीआई की रोक लगने के बाद 45 दिन के भीतर DICGC बैंकसे अकाउंट्स डिटेल्स लेगा. अगले 45 दिनों में आंकड़ों की जांच करेगा और जमाकर्ताओंको भुगतान कराएगा. यानी जमाकर्ता को बैंक के मर्जर, रिस्ट्रक्चरिंग या दूसरीऔपचारिकताओं के पूरा होने तक का इंतजार नहीं करना होगा. अब तक कितने क्लेम हुएसेटल? आजाद भारत के इतिहास में कोई भी सरकारी या शेड्यूल्ड बैंक डूबा नहीं है.जिनकी हालत खस्ता हुई, उन्हें किसी न किसी जरिए उबार लिया गया या किसी दूसरे बैंकमें उनका मर्जर हो गया. लेकिन को-ऑपरेटिव या लोकल बैंकों के स्तर पर खस्ताहाली,गड़बड़ी और बंदी के मामले आते रहते हैं. अब तक DICGC ने जितने क्लेम सेटल किए हैं,उनमें अधिकांश इन्हीं छोटे बैंकों के हैं. आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में कहा गया हैकि साल 2020-21 में 5 को-ऑपरेटिव बैंकों और एक लोकल एरिया बैंक (LAB) की संपत्तियांजब्त कर रकम दावेदारों में बांटी गई. 2020-21 के पहले छह महीनों में 993 करोड़रुपये के क्लेम प्रोसेस किए गए थे. इनमें 330 करोड़ एक ही को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़ेथे.