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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के अंदर ऐसा क्या हुआ जो बात इस्तीफों तक जा पहुंची

Himachal Pradesh में सरकार गिरने की नौबत कैसे आई? इसमें वीरभद्र परिवार का भी कुछ रोल माना जा रहा है.

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Vikramidtya Singh and Rahul Gandhi
हिमाचल में कांग्रेस सरकार को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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28 फ़रवरी 2024 (Updated: 28 फ़रवरी 2024, 17:30 IST)
Updated: 28 फ़रवरी 2024 17:30 IST
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देश के 3 राज्यों में राज्यसभा का चुनाव (Rajya Sabha Election) हुआ. लेकिन असली खेल हो गया हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में. राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhwinder Singh Sukhu) ने पहले इस्तीफे तक की पेशकश की. खबर फैली तो इस्तीफा देने की बात से इनकार कर दिया. बाद में सुक्खू सरकार ने बजट पास कराकर विश्वास मत हासिल कर लिया. इसके बाद हिमाचल विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. सुक्खू सरकार को तीन महीने के लिए अब कोई खतरा नहीं है. लेकिन बात यहां तक पहुंची कैसे?

बहुमत में होने के बावजूद कांग्रेस को यहां राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी के विपक्ष में जाकर भाजपा उम्मीदवार को वोट किया. वोटिंग के बाद ये सारे विधायक पंचकूला चले गए थे. जब वापस आए थे तो कहा कि अब वो सब BJP के साथ हैं. चर्चा चलती रही कि इस क्रॉस वोटिंग के पीछे किसने खेल किया. तभी इस्तीफा आया- वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह का. कहा गया कि इस फेरबदल के पीछे वीरभद्र कैंप के विधायकों का हाथ था.

इस्तीफा देने के बाद विक्रमादित्य ने जो कुछ कहा उससे इतना तो स्पष्ट हो गया कि वो पार्टी के फैसलों से नाराज चल रहे थे. उन्होंने अपने दिवगंत पिता को लेकर एक बयान दिया. कहा कि उनके पिता 6 बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और और उन्हीं की वजह से राज्य में ये सरकार बनी. उन्होंने कहा कि माल रोड पर उनके पिता की प्रतिमा बनाने के लिए एक छोटी-सी जगह तक नहीं ढूंढ पाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने उनके पिता के लिए यही सम्मान दिखाया है. उन्होंने कहा,

"हम भावुक लोग हैं, हमें पद से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं बहुत आहत हूं, राजनीतिक रूप से नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से.''

कहानी में विक्रमादित्य के पिता वीरभद्र की एंट्री अभी नहीं हुई है. बल्कि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस कहानी की नींव ही वीरभद्र से जुड़ी है.

कौन थे Virbhadra Singh?

वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 1983 से 1990 तक, 1993 से 1998 तक, 2003 से 2007 तक और 2012 से 2017 तक राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया. साल 2017 में भाजपा के जयराम ठाकुर ने उनकी जगह ली. वीरभद्र आठ बार विधायक और लोकसभा में सांसद रहे. पिछले आधे दशक में उन्होंने कोई चुनाव नहीं हारा था. जुलाई 2021 में उनकी मृत्यु हो गई.

वीरभद्र की मृत्यु के बाद 2022 में कांग्रेस पार्टी हिमाचल में सरकार बनाने की स्थिति में आई. हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुल 68 सीटें हैं. कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं और भाजपा को 25. तीन विधायकों को निर्दलीय जीत मिली. सरकार बनाने के लिए 34 विधायकों की जरूरत थी. कांग्रेस के पास बहुमत था तो सरकार भी बन गई. लेकिन मामला फंसा मुख्यमंत्री की उम्मीदवारी लेकर.

ये भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव में सब UP की तरफ देखते रहे, हिमाचल में खेल ऐसा हुआ कि सरकार गिरने की नौबत आ गई!

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीरभद्र परिवार के लोग चाहते थे कि मुख्यमंत्री का पद उनके परिवार के ही पास रहे. दावेदार के रूप में वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह का नाम आया. वो रेस में सबसे आगे चल रही थीं. माना जा रहा था कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र के ज्यादातर नजदीकी नेताओं का समर्थन हासिल है. उन्होंने चुनाव के बाद कहा भी था कि वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके परिवार को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए.

एक और बात थी जो उनके पक्ष में थी. प्रतिभा सिंह शिमला जिले से हैं और शिमला में पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था. पार्टी को यहां 8 में 7 सीटों पर जीत मिली थी. इसलिए भी उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

कहा गया कि केंद्र में परिवारवाद का आरोप झेल रही कांग्रेस पार्टी को राज्य में भी इन्हीं आरोपों का डर था. इसलिए पार्टी ने रिस्क नहीं लिया और प्रतिभा सिंह का मुख्यमंत्री पद से पत्ता कट गया. बाजी मार गए 2013 से 2019 तक हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सुखविंदर सिंह सुक्खू. पार्टी ने हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री सुक्खू को बनाया.

बगावती मुद्रा में था वीरभद्र परिवार

CM पद गंवाने के बाद से वीरभद्र परिवार कांग्रेस के आलाकमान से नाराज रहने लगी. विक्रमादित्य सिंह ने कई मुद्दों पर पार्टी अलग लाइन से अलग जाकर बयान भी दिए. राम मंदिर पर उनके बयान की चर्चा हुई. कांग्रेस के बड़े नेताओं ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से दूरी बनाने की घोषणा की थी. तब विक्रमादित्य ने कहा था कि वो कट्टर हिंदू हैं और देव समाज में आस्था रखने वाले एक हिंदू हैं. उन्होंने कहा था कि उनकी जिम्मेदारी है कि वे इस अवसर पर उपस्थित रहें और भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के गवाह बनें.

सुक्खू राज्य में अपनी सरकार चलाते रहे लेकिन विक्रमादित्य ने पार्टी आलाकमान के सामने ये जताने से परहेज नहीं किया कि उनके परिवार को सरकार में वाजिब सम्मान नहीं मिला है.

राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ खेल

राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए हिमाचल प्रदेश में भाजपा के पास जरूरी सीटें नहीं थी. इसके बावजूद भी BJP ने वहां अपना कैंडिडेट उतारा. उम्मीदवार बनाया हर्ष महाजन को. महाजन को वीरभद्र सिंह का रणनीतिकार माना जाता है. महाजन 2022 में कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे.

Anand Sharma जाना चाहते थे राज्यसभा?

कांग्रेस जब राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी पर विचार कर रही थी तब आनंद शर्मा का नाम चर्चा में रहा. कहा गया कि कांग्रेस नेता आनंद शर्मा भी राज्यसभा जाना चाहते थे. वो शिमला से आते हैं और उन्हें कुछ विधायकों का समर्थन भी हासिल था. लेकिन मामला फंस गया जी-23 ग्रुप को लेकर.

दरअसल आनंद कांग्रेस के उस जी-23 ग्रुप का हिस्सा थे जिन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की बात उठाई थी और अध्यक्ष पद के चुनाव की मांग की थी. आनंद शर्मा को कांग्रेस ने राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया. पार्टी अभिषेक मनु सिंघवी की जीत को लेकर आश्वस्त थी.

लेकिन पार्टी के अंदर बगावत की लहर पैदा हो गई. और इसका अंदाजा मुख्यमंत्री सुक्खू को भी पता नहीं चल पाया. सुक्खू अपने 6 विधायकों के अलावा 3 स्वतंत्र उम्मीदवारों को भी नहीं भांप पाए. ऐसा माना जा रहा था कि तीनों स्वतंत्र विधायक भी कांग्रेस विधायक को ही वोट करेंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

किन विधायकों ने की बगावत?

सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा, धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा, लाहौल स्पीति से रवि सिंह ठाकुर, हमीरपुर से इंद्र दत्त लखनपाल, गगरेट-के विधायक चैतन्य ठाकुर और कुटलैहड के विधायक देवेंद्र भुट्टो ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं दिया. माना जा रहा है कि ये सब वीरभ्रद सिंह के कैंप के नेता हैं. इन्होंने समय-समय पर पार्टी से मंत्री पद के लिए संकेत भी दिए थे. लेकिन सुक्खू खेमे की तरफ से इस बारे में कोई बात नहीं की गई. 

विक्रमादित्य सिंह ने भी इस्तीफे के बाद कहा कि पार्टी में विधायकों की अनदेखी की जा रही थी. इस तरह कांग्रेस के हाथ से राज्यसभा सीट निकल गया. और अब चर्चा सुक्खू के इस्तीफे की भी हो रही है.

वीडियो: हिमाचल प्रदेश मंत्री विक्रमादित्य ने इस्तीफा देकर CM शुक्ला पर क्या कहा

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