गाय कितनी तरह की होती है? नस्लें मत गिनाइए. यह एक राजनीतिक सवाल है.एक गाय अखलाक वाली है. एक गोदान के होरी वाली. एक बीजेपी वाली. कोई ओवैसी वाली भीहोगी ही. क्या ये सभी गायें एक हैं? क्या उनसे किए जाने वाले प्रेम की प्रकृति एकहै? गाय से प्रेम तो होना चाहिए, लेकिन क्या हो अगर यह प्रेम निजी न होकर, राजनीतिकसामूहिकता में बदल जाए और सनक बन जाए?तब दादरी होता है. तब स्याही फेंकी जाती है. वोटों का पैटर्न बदलता है. मोहनदासकरमचंद गांधी कह गए कि अगर गाय और इंसान में से एक को बचाना हो तो पहले इंसान कोबचाया जाए. फिर भी गाय को लेकर हमारा सनकी प्रेम बार-बार जाहिर होता रहा.मोहम्मद अखलाक के घर का मातम है यह. नाम तो सुना ही होगा. Photo: Reutersभारत में 'गाय' मुद्दा क्यों है?गाय भारत में इसलिए भी ज्यादा अहम है क्योंकि यह हिंदू धर्म में पवित्र मानी गई हैऔर यहां की आबादी में 80 फीसदी से ज्यादा हिंदू हैं. जो 33 तरह के देवता हैं, मानाजाता है कि वे सभी गाय के शरीर में निवास करते हैं. पर कहा जाता है कि बहुत सारेमुसलमान और बहुत सारे हिंदू भी, गाय का मांस खाते हैं और इससे गाय को पूजने वालोंकी भावनाएं आहत होती हैं हिंदू धर्म में गाय को 'सृष्टिमातृका' कहा गया है. गाय केदूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर के पानी को सामूहिक रूप से 'पंचगव्य' कहा जाता है.आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है. हिंदुओं के मांगलिक कार्य इनके बिना पूरेनहीं होते.हिंदू धर्म में अहमियतमाना जाता है कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी रूपी गाय की अरदास पर ही कृष्ण अवतार लियाथा. श्रीमद्भागवत महापुराण के मुताबिक, कहानी इस तरह है कि उस समय पृथ्वी पर बड़ेनिरंकुश राजा होने लगे थे. इससे दुखी पृथ्वी गाय का रूप धरकर ब्रह्मा जी के पासपहुंची. ब्रह्मा उसे और शंकर जी को साथ लेकर भगवान विष्णु के पास गए. वहीं उन्हेंआकाशवाणी सुनाई दी कि भगवान स्वयं कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर आएंगे. इसीलिए भगवानकृष्ण को गायों से विशेष प्रेम रहा.इलाहाबाद की तस्वीर है. Photo: APजो अथर्ववेद में लिखा हैबहुत पहले गाय लेन-देन और विनिमय का भी जरिया थी और इंसान की शोहरत उसकी गोसंख्यासे आंकी जाती थी. अथर्ववेद में लिखा है, 'इस धरा पर लोगों की बोलियां और खाने-पीनेके तौर-तरीके अलग हैं. पर पृथ्वी की तरह सीधी-सादी गाय भी बिना विरोध के इंसान कोसब देती है.'गोमांस खाते थे आर्य?पुराणों में गोमांस खाए जाने का जिक्र है या नहीं, यह हाल के दिनों में बड़ा चर्चितऔर विवादित मुद्दा रहा. डीएन झा जैसे इतिहासकारों के मुताबिक, इस बात के पर्याप्तसबूत हैं कि वैदिक आर्यों ने गायों की बलि दी और गोमांस खाया. उनके मुताबिक, वैदिककाल के बाद मौर्यकाल से पहले तक गोमांस खाया जाता रहा. हालांकि मौर्य काल के बादगाय खाने की घटनाओं के संदर्भ बहुत कम मिलते हैं. डीएन झा मानते हैं कि ब्राह्मणपहले गायों की बलि करवाते थे, लेकिन कलियुग में उन्हें लगा कि कुछ पुरानी परंपराएंछोड़ देनी चाहिए और गाय की बलि इनमें से एक थी. उस समय गाय काटने वाले ज्यादातर लोग'शूद्र' थे. तो श्रेष्ठता ग्रंथि के मद्देनजर ब्राह्मणों ने गोमांस खाना छोड़ दिया.या वेदों की गलत व्याख्या की गई?हालांकि कई विद्वान उनसे सहमत नहीं है और मानते हैं कि वैदिक काल में इंसान ने कभीगोमांस नहीं खाया. उनका कहना है कि संस्कृत की सूक्तियों की गलत व्याख्या सेइतिहासकारों को यह भ्रम हुआ है. उनका कहना है कि वेद में यज्ञ को अध्वर यानीहिंसारहित कहा गया है. मन, वचन और कर्म से ही अहिंसक होना जरूरी माना गया है, बल्किबीजमंत्र तो ये है कि 'सर्वाणि भूतानि' यानी सभी प्राणियों को मित्रवत देखूंगा.वेदों में जो जैसे अश्वमेध, गोमेध, अजमेध और नरमेध जैसे यज्ञों का वर्णन है, उनमेंमेध का मतलब मार डालना नहीं बल्कि मेधा से है.Photo: Reutersवेद में गोघ्न, अतिथिग्वा, अतिथिघ्न जैसे शब्द हैं, जिन्हें गाय को मारने से जोड़ागया. जबकि ग्वा या घ्ना गम धातु से बने हैं जिसका अर्थ जाना होता है. यानी अतिथियोंकी सेवा के लिए जाने वाले. कुछ इतिहासकारों ने वशा को बूढ़ी गाय या बांझ गाय सेजोड़कर देखा और उसका वध किए जाने का प्रमाण दे दिया. लेकिव वशा का अर्थ संसार को वशमें रखने वाली शक्ति है. वशा का अर्थ उपजाऊ जमीन भी है.उपनिषद में मांसौदनम का जिक्र है. मतलब मांस के लिए ओदन (भात) जो कि सही रूप मेंमाषौदनम है. माष दाल के लिए प्रयुक्त है और प्राचीन ग्रंथों में मांसं का अर्थ मांसनहीं बल्कि गूदा है, आम्रमांसं, आम का गूदा.और फिर होरी याद आता है!पता नहीं कौन गाय खाता था और कौन अब खाता है. पर गायों को लेकर जैसा सनकपन दादरीमें दिखा, वह 'गोदान' के नाकाम नायक होरी की याद दिलाता है. वह मरा जा रहा है, परगाय खरीदना चाहता है. गाय न मरती तो होरी के बैल न जाते. उसकी जिंदगी में गाय कुछदेकर नहीं, लेकर ही जाती है. फिर भी आखिरी समय में वह दोबारा गाय खरीदना चाहताहै. 'रुपये मिलते ही सबसे पहले वह गाय लेगा.' गाय एक तरह से होरी की शाश्वतआकांक्षा है. अपनी दुर्गति के बावजूद. अजब त्रासदी है.अयोध्या की तस्वीर. Photo: Reuters'दीज़ गायज़ आर सो सो क्रेज़ी. हाऊ कैन दे किल अ ह्यूमन फॉर अ ब्लडी कैटल.'प्रियांशी स्कूल में पढ़ती है. 11वीं क्लास में. उसने यह कहा और यह भी कि पता नहींबड़े लोग यह बात क्यों नहीं समझते. आपको कौन सी गाय प्यारी है? जिसकी रक्षा के लिएअखलाक को मारा गया? या मरणासन्न होरी जिसे खरीदने को मरा जा रहा है? या वो जो एकरोटी की आस में हर सुबह आपके दरवाजे आकर खड़ी हो जाती है? कौन सी?--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें: