42 साल की एक औरत ने अपने पति के दोस्त पर रेप का आरोप लगाया. औरत ने पुलिस में जोशिकायत लिखवाई है उसमें लिखा है कि उसका पति एक प्रॉपर्टी डीलर है. जुए का आदी है.और एक दिन जुए में अपनी पत्नी को हार आया. जिसके चलते उसके दोस्त ने पत्नी का रेपकिया.आरोपी ने अपने बचाव में कहा, मैं तो औरत का 'हलाला' कर रहा था.हलाला, यानी 'निकाह हलाला'शरिया के मुताबिक अगर एक पुरुष ने औरत को तलाक दे दिया है, तो वो उसी औरत से दोबारातबतक शादी नहीं कर सकता जबतक औरत किसी दूसरे पुरुष से शादी कर तलाक न ले ले. औरत कीदूसरी शादी को निकाह हलाला कहते हैं. लेकिन जितनी आसानी से उसने रेप को हलाला कहदिया उतनी आसानी से तो तलाक भी नहीं होता. भले ही तलाक, तलाक, तलाक बोलना हो.तलाक कैसे होता है?अगर निकाह के बाद जिंदगी में ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि साथ रहना मुश्किल हो तोआपसी सहमति से तलाक लिया जाता है. अगर शौहर बीवी को तलाक देता है तो यह तीन चरण मेंहोता है. पहले तलाक के बाद बीवी इद्दत करती है. मतलब वो शौहर से सेक्स नहीं करती.दोनों के घर वाले सुलह कराने की कोशिश करते हैं. अगर इसके बाद भी बात नहीं बनी तोदूसरा तलाक दिया जाता है पर वह भी दोनो की सहमति से ही, दूसरे तलाक के बाद गवाहवकील या सोसाइटी के बुजुर्ग बीच बचाव करते हैं और जिसकी भी गलती हो मामले कोसुलझाने की कोशिश कोशिश करते हैं. अगर समझौता हो जाता है तो फिर से दोनो का निकाहहोगा. वो भी पहले की तरह ही. और अगर इस बार बात बिगड़ती है तो तीसरा तलाक दिया जाताहै. इस तीन तलाक में करीब 3 महीने लग जाते हैं.तलाक के बाद लड़की अपने मायके वापस आती है और इद्दत का तीन महीना 10 दिन बिना किसीपर आदमी के सामने आए पूरा करती है. ताकि अगर वो गर्भ से है तो जिस्मानी तौर परसोसाइटी के सामने आ जाए. जिससे उस औरत के 'चरित्र' पर कोई उंगली न उठा सके. उसकेबच्चे को 'नाजायज़' न कह सके. क्योंकि धर्म कोई भी हो, हमारे समाज में तो लड़की हीअपनी छाती से लेकर गर्भ तक परिवार की इज्जत की ठेकेदार होती है.खैर. इद्दत का वक्त पूरा होने पर वो लड़की आज़ाद है. अब उसकी मर्ज़ी है वो चाहे किसीसे भी शादी करे. आमतौर पर ये सब इतनी नाराजगी के बाद होता है कि दोबारा से उस आदमीसे शादी करने की गुंजाइश ही नहीं बचती.लेकिन अगर मर्द अब फिर से अपनी बीवी को पाना चाहे तो तब तक नहीं पा सकता जबतक उसऔरत ने फॉर्मल तरीके से दूसरे मर्द से शादी (पढ़ें: सेक्स) न किया हो. और उसके बादउससे तलाक ले लिया हो. बेसिकली हमारे समाज में औरत मर्द की प्रॉपर्टी होती है.इसलिए जरूरी है कि मर्द को उसे खोने का एहसास दिलाया जाए. इसलिए एक मर्द को सजादेने के लिए औरत का नए मर्द के साथ सेक्स करना जरूरी हो जाता है. यही होता है'हलाला'.लेकिन इस्लाम में असल हलाला का मतलब ये होता है कि एक तलाकशुदा औरत अपनी आज़ाद मर्ज़ीसे किसी दूसरे मर्द से शादी करे. और इत्तिफाक़ से उनका भी निभा ना हो सके. और वोदूसरा शोहर भी उसे तलाक दे-दे, या मर जाए, तो ही वो औरत पहले मर्द से निकाह कर सकतीहै. असल 'हलाला' है.याद रहे यह महज इत्तिफ़ाक से हो तो जायज़ है. जानबूझ कर या प्लान बना कर किसी और मर्दसे शादी करना और फिर उससे सिर्फ इस लिए तलाक लेना ताकि पहले शोहर से निकाह जायज़ होसके, यह साजिश नाजायज़ है.लेकिन इसका ये पहलू भी है कि अगर मौलवी हलाला मान ले, तो समझे हलाला हो गया.पर औरत के अधिकार?अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शौहर से तलाक मांगना होगा. क्योंकि वो खुद तलाकनहीं दे सकती. अगर शौहर तलाक मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी शहर काज़ी(जज) के पास जाए और उससे शौहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे. इस्लाम ने काज़ी को यह हक़दे रखा है कि वो उनका रिश्ता ख़त्म करने का ऐलान कर दे, जिससे उनका तलाक हो जाएगा.इसे ही 'खुला' कहा जाता है. जयपुर की इस औरत के बारे में हमने जो सुना, वो रेप कामसला है. औरत ने रेप की शिकायत की है. लेकिन धर्म, जो हमेशा से पुरुषों को औरतों कास्वामी बनाता आ रहा है, इस पुरुष के लिए खुद को बचाने का बहाना बन रहा है. चूंकिसमाज 'हलाला' के नाम पर दूसरे मर्द से सेक्स की इजाजत देता है, पुरुषों के लिए खुदको 'औरत का भला करनेवाला' बताकर, रेप के आरोप से बचकर निकलना काफी आसान हो जाता है.