ये 'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' क्या है, जिसकी घोषणा नितिन गडकरी ने की है
इस तरह के एक्सप्रेसवे के बारे में विस्तार से जान लीजिए.
Advertisement

ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे (प्रतीकात्मक तस्वीर)
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी साल 2014 से ही सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कामकाज संभाल रहे हैं. 2 जून, मंगलवार को गडकरी ने अनाउंस किया कि सरकार ने 'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' प्लान को मंजूरी दे दी है. अमृतसर से नकोदर शहर तक ग्रीनफ़ील्ड कनेक्टिविटी होगी. ये दिल्ली-अमृतसर एक्सप्रेसवे प्लान का ही हिस्सा है. उन्होंने कहा कि अब अमृतसर से दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने का समय आठ घंटे से घटकर केवल चार घंटे ही रह जाएगा.
सुनने में तो सब बढ़िया लग रहा है. लेकिन आखिर ये 'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' क्या बला है? इसके बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
एक्सप्रेसवे क्या होता है?
'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' के बारे में चर्चा से पहले ये समझ लीजिए कि एक्सप्रेसवे क्या चीज है. दरअसल, ये हाइवे का अगला वर्ज़न है. किसी स्टेट हाइवे या नेशनल हाइवे पर चौराहे और रेड लाइट भी होते हैं. लेकिन एक्सप्रेसवे की खासियत होती है कि इस पर एक बार चढ़ गए, तो रुकने का नाम नहीं. यहां चढ़ने और उतरने के लिए लिमिटेड एंट्री-एग्ज़िट पॉइंट होते हैं. यहां आपको एक ढलान मिलेगी किसी दूसरी सड़क से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए या एक्सप्रेसवे से उतरने के लिए.
इन सड़कों को सिग्नल-फ्री बनाने के लिए ओवरपास और अंडरपास का इस्तेमाल होता है.
एक्सप्रेसवे काफी चौड़े होते हैं. आमतौर पर छह या आठ लेन वाले, इसलिए ट्रैफिक स्पीड तेज़ होती है. कई एक्सप्रेसवे ऐसे भी हैं, जहां कार के लिए मैक्सिमम स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटा है.
ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे क्या है?
अब आते हैं 'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' पर. आम बोल-चाल की भाषा में कहें, तो वो एक्सप्रेसवे, जो हरे-भरे इलाकों से निकाल दिए जाते हैं, 'ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे' कहे जाते हैं. इन्हें 'ग्रीन कॉरिडोर' भी कहा जाता है. मतलब ऐसी जगह, जहां पर पहले कभी सड़क न रही हो. इसके लिए कोई बिल्डिंग या सड़क वगैरह तोड़ने का झंझट भी नहीं होता.
ऐसे इलाकों से एक्सप्रेसवे निकालने के पीछे क्या मकसद होता है?
जनवरी, 2020 में नितिन गडकरी ने इसके मकसद के बारे में खुद ही बताया था-
वीडियो देखें: जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने पहुंचीं SDM गुंजा सिंह पर किसानों ने पत्थर क्यों फेंके?
- आबादी वाले इलाकों से बचने की कोशिश की गई
- ज़मीन सस्ते में मिल सकी.
- साथ ही उन पिछड़े इलाकों के लोगों के लिए ऐसा एक्सप्रेसवे नए आर्थिक अवसर पैदा करेगा.
वीडियो देखें: जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने पहुंचीं SDM गुंजा सिंह पर किसानों ने पत्थर क्यों फेंके?

.webp?width=60)

