अगले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने दक्षिण भारतमें पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी का ध्यान खास तौर पर केरल में है. यहां बीजेपी औरसंघ कार्यकर्ताओं की हत्याओं का आरोप लगाकर पार्टी पी विजयन सरकार को घेरने कीकोशिश में लगी हुई है. इसी के तहत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में बीजेपीने तीन अक्टूबर को केरल से जनरक्षा यात्रा की शुरुआत की है. नौ अक्टूबर को येयात्रा केरल के मुस्लिम बहुल इलाके मलप्पुर से गुजरी, जिसका नेतृत्व बीजेपी केप्रदेश अध्यक्ष कम्मनम राजशेखरन कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि 1921 में जोमालाबार विद्रोह हुआ था, वो केरल में हुआ पहला जिहाद था. इसमें बड़े पैमाने परहिंदुओं का नरसंहार हुआ था.तुर्की में खलीफा की गद्दी छीने जाने के बाद भारत में खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुईथी.जब भारत गुलाम था तो 1919 में देश में एक आंदोलन हुआ, जिसे खिलाफत आंदोलन के नाम सेजानते हैं. 1908 में तुर्की में खलीफा का पद ख़त्म कर दिया गया. जब दूसराविश्वयुद्ध शुरू हुआ तो ब्रिटेन ने तुर्की पर हमला कर दिया. इसके अलावा भारत में भीजालियां वाला बाग हत्याकांड और रौलट एक्ट जैसी कई चीजें हुईं, जिससे लोगों में औरभी असंतोष हो गया. मुस्लिम अंग्रेजों की वजह से और भी ज्यादा नाराज़ हो गए. देश केमुस्लिम नेता अबुल कलाम आजाद, ज़फर अली खां और मोहम्मद अली ने इसे व्यापक रूप दिया.अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी ने जमियत उलेमा के साथ मिलकर खिलाफत आंदोलन का संगठनकिया.महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना आजाद ने भी खिलाफत आंदोलन की वकालत कीथी.मालाबार के एरनद और वल्लुवानद तालुका में इस खिलाफत आंदोलन को कुचलने के लिएअंग्रेजों ने हर हथकंडा अपनाया. इसके विरोध में केरल के मालाबार क्षेत्र मेंमोपलाओं ने 1920 ई. में विद्रोह कर दिया. मोपला केरल के मालाबार क्षेत्र में रहनेवाले इस्लाम धर्म में धर्मांतरित अरबी और मलयाली मुसलमान थे. अधिकांश मोपला छोटेकिसान या व्यापारी थे. उन पर काजियों और मौलवियों का प्रभाव था, जिन्हें थंगल कहाजाता है. ये मोपला मालाबार के उच्च जाति वाले हिंदू नम्बूदरी और नायर भूस्वामियोंके बटाईदार और काश्तकार थे.शुरुआत में तो यह विद्रोह अंग्रेजों के ही खिलाफ था. इसे महात्मा गांधी, शौकत अली,मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं का सहयोग हासिल था. आंदोलन के बड़े नेता के तौरपर ली मुसलियार थे. 15 फरवरी 1921 का दिन था. अंग्रेज़ सरकार ने पूरे इलाके मेंनिषेधाज्ञा लागू करवा दी. खिलाफत आंदोलन के नेता याकूब हसन, यू. गोपाल मेनन, पी.मोइद्दीन कोया और के. माधवन नायर को गिरफ्तार कर लिया. नेतृत्व के बिखरते ही आंदोलनस्थानीय मोपलाओं के हाथ में चला गया. मोपलाओं ने खिलाफत आंदोलन की खीज भूस्वामियोंपर उतारनी शुरू कर दी. एक जुट हुए मोपलाओं ने भूस्वामियों के खिलाफ ही हल्ला बोलदिया. ऐसे में आंदोलन ने सांप्रदायिक रूप ले लिया और जो आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफथा, वो हिंदू बनाम मुस्लिम हो गया.खिलाफत को कुचलने के लिए अंग्रेजों ने पूरी ताकत झोंक दी थी.20 अगस्त 1921 को पुलिस ने अर्नाड के खिलाफत आंदोलन के सेक्रेटरी वडाकेविट्टीलमुहम्मद को गिरफ्तार करने की कोशिश की लेकिन 2000 मोपलाओं ने उसे घेर लिया और पुलिसको घुसने नहीं दिया. अगले दिन पुलिस के दस्ते ने खिलाफत से जुड़े कई लोगों कोगिरफ्तार कर लिया और तिरुरंगदी की मम्बरम मस्जिद से दस्तावेज जब्त कर लिए. भीड़ नेतिरुरंगदी और स्थानीय पुलिस थाने को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने फायरिंगकर दी. इसमें कई मोपला मारे गए. मोपलाओं ने कई थानों में आग लगा दी, सरकारी खजानेको लूट लिया और दस्तावेज नष्ट कर दिए. 24 अगस्त 1921 को कुंजअहमद हाजी ने अलीमुसलियार की ओर से विरोधियों की कमान संभाली. इसके बाद पुलिस और अंग्रेज सिपाहियोंने विरोध को कुचल दिया. साल के अंत तक इस आंदोलन की चिंगारी बनी रही.गिरफ्तार किए गए मोपलाओं की ट्रेन में ले जाते समय दम घुटने से मौत हो गई थी.19 नवंबर 1921 को 100 मोपला विद्रोहियों को ट्रेन के जरिए मालाबार से कोयंबटूर भेजाजा रहा था. उन्हें सामान ढोने वाली बोगी में बंद रखा गया था. पांच घंटे के बाद जबउनके दरवाजे खोले गए तो सभी की मौत हो चुकी थी. कहा जाता है कि मोपला विद्रोह केदौरान हजारों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ और हजारों हिंदुओं को धर्म बदलने के लिए बाध्यहोना पड़ा. इसके बाद जब आर्य समाज की ओर से शुद्धि आंदोलन चलाया गया तो जिन हिंदुओंको जबरन मुस्लिम बना दिया गया था, उन्हें वापस हिंदू धर्म में लाया गया. इस आंदोलनके दौरान ही इसके नेता स्वामी श्रद्धानंद को 23 दिसंबर 1926 को उनके ही आश्रम मेंगोली मार दी गई.--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप शो में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथये भी पढ़ें:भारत-पाकिस्तान बंटवारे से जुड़ी वो तारीख जिसे हम याद नहीं करना चाहतेफ्रांस के खुफिया दस्तावेजों में दफ़न था नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का सच!अरुणा आसफ अली: अपने दौर से कहीं ज़्यादा आगे रहने वाली महिलाइस वजह से महात्मा गांधी से नाराज थे भगत सिंह और सुखदेव