अभी देश में टेंशन है. पाकिस्तान की वजह से बॉर्डर पर. और चीन की वजह से देश केअंदर. पाकिस्तान को सेना ने सबक सिखा दिया. चीन को सबक सिखाने की कोशिश कर रहे हैंव्हाट्सऐप के इकॉनमिस्ट लोग. धकापेल मैसेज किए पड़े हैं कि चीन को सबक सिखाने कासिर्फ एक तरीका है. दिवाली पर उनकी झालर न खरीदो. बहुतै लंपूतियास्टिक आइडिया हैकसम से. इत्तू सी चीज पर उनकी इकॉनमी नहीं टिकी है. कि तुम रस्सी खींचोगे और वो लटकजाएगी. कुछ जोशीले फुल कट पर जोर दे रहे हैं. माने चाइनीज बैन. सब कुछ जो चाइना मेंबना हो, बैन कर दो. ये थोड़ा हाई लेवल का ज्ञान है लेकिन ऐसा कि आदमी खुद कुल्हाड़ीपर अपना पांव मार ले. आज की तारीख में सच्चाई ये है कि बिना चाइनीज सामान खरीदेहमारी खुद की इकॉनमी धप्प से बैठ जाएगी. जो सस्ते ब्रांड के देसी स्मार्टफोन आ रहेहैं, सब वहीं के बने हैं. न मानो तो मेरे पास एक कॉर्बन के फोन की लाश पड़ी है, लेजाओ और पंचनामा कर लो. तो सवाल ये है कि चीन का सारा सामान इस्तेमाल होना बंद होजाएगा? क्या ये संभव है? अभी के हिसाब से नहीं. क्यों? क्योंकि पहले तो ये देखो किचीन से आता क्या-क्या है. अभी इंटरनेशनल बिजनेस में भारत का सबसे बड़ा पार्टनर चीनहै. यहां के इंपोर्ट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की है. चीन जरूरत से लेकर लक्जरीकी हर चीज बनाता है. टुच्ची क्वॉलिटी से लेकर उम्दा क्वॉलिटी. हजार रुपए वालेस्मार्टफोन से लेकर आईफोन तक चीन ही बनाता है. डिमांड के हिसाब से पैदा करता है. जोमल्टीनेशनल कंपनियों के महंगे मोबाइल, टीवी, फ्रिज, लैपटॉप वगैरह इस्तेमाल कर रहेहो, इनका सबसे बड़ा हिस्सा चीन में मैन्युफेक्चर होता है.और क्या-क्या आता है चीन से?इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट बड़ी-छोटी मशीनरी (इसमें 10 रुपए की दाढ़ी बनाने वाली रेजरसे 10 लाख की CNC मशीन तक हो सकती है) ऑर्गेनिक केमिकल फर्टिलाइजर फर्नीचर, लाइटिंगमेडिकल और टेक्निकल इक्विपमेंट लोहे और स्टील के प्रॉडक्ट इत्ता तो मोटा-मोटीआंकड़ा है, जो एकदम सीधा है. पेच इससे ज्यादा बड़ा है. जो सामान तुम मेड इन इंडियाया विएतनाम या फिनलैंड समझकर यूज कर रहे हो, उसमें भी कोई न कोई चीज चाइना की होगी.जैसे फोन फिनलैंड का बना है तो इयरफोन विएतनाम का होगा और बैटरी चीन की. तो बैटरीनिकाल के फेंक दोगे क्या? कहोगे हमको जापान वाली बैटरी दो. बता दें कि करीब 10 सालपहले नोकिया 1110 की बैटरी में बड़ी दिक्कत आई थी. BL-5C बैटरी जो जापान में बनी थीवो दग जाती थी. लेकिन चीन वाली धकाधक चल रही थी. तब हमको भी झटका लगा था कि जापानचीन से भी घटिया सामान बना रहा है क्या बे? मोबाइल हो, कैलकुलेटर हो या टीवी रिमोट.बिना डायोड के नहीं बन सकते. और साइज में सबसे छोटे और उन्नत डायोड चीन बनाता है.हमारे देश में वो बनते ही नहीं. किसी और देश से भी आएगा तो 10 गुना रेट होगा. तोबिना रिमोट के ही टीवी चलाओगे अगर चीन से डायोड न आए. बल्कि टीवी भी नहीं चलापाओगे. इसके अलावा LED. लाइट में जो चम चम चम चम चलती रहती है. शादी-ब्याह से लेकरमाता के जगराते में जो जगमग होती है, उनके पीछे चीन की LED होती है. भारत भी LEDबनाता है और अच्छी बनाता है. लेकिन उनको खरीदना लोवर क्लास के आदमी से बस के बाहरकी बात है. आपके घर में खड़ी मेड इन इंडिया बाइक के आधे पार्ट्स चीन में बने होंगे.आपकी बालकनी में जो डिजायनर MDF या माइका कटकर पेंट होकर लगा है, वो कटा होगा चीनसे आई CNC मशीन पर और उसमें पेंट भी चीन का हुआ होगा. अभी नई-नई सोलर लाइटें लगनीशुरू हुई हैं देहातों में. उनमें सोलर पैनल चीन का लगा होता है, बैटरी भारत की.माइक्रोवेव, कालीन, टाइल सब तो चीन से आता है, क्या क्या निकालकर घूरे पर फेंकदोगे? फौज में इस्तेमाल होने वाली बंदूकों से लेकर टैंकों, नेवी के जहाजों से लेकरफाइटर प्लेन्स तक में पार्ट्स चीन के ही लगे होते हैं. राफेल प्लेन का तो पता हीहोगा. ये हो सकता है कि मिठाई अग्रवाल स्वीट्स की हो और उसके डिब्बे पर चढ़ी पन्नीचीन की. महंगी वाली कातिल दारू स्कॉटलैंड की हो और उसकी बोतल चीन में बनी हो. अबतौलो अपने यहां की इकॉनमी और लग्जरियस लाइफ को. कि बिना चीन के सामान के यहां कितनीबड़ी उठापटक होगी.फिर क्या करेंचाइना का नुकसान उनका सामान मंगाना बंद करने से नहीं होगा. बल्कि यहां से जो चीजेंचाइना जाती हैं, उन पर रोक लग जाए. हालांकि है ये भी प्रैक्टिकली नामुमकिन, लेकिनविश्वयुद्ध के हालात हों तो ऐसा हो भी सकता है. उसके पहले नहीं. पहले ये देखो-हम भेजते क्या हैंगेहूं, चावल ऑटोमोबाइल जड़ी-बूटी और ऑर्गेनिक दवाएं समुद्री खाना ताजे लजीज और सेहतबढ़ाने वाले फल और सब्जियां मसाले रुई माने कॉटन टेक्सटाइल लौह अयस्क और कोयलावगैरह जैसे कच्चे माल तो देखो कि खाने का तमाम सामान इंडिया से चीन जाता है. तोसरकार से कहो कि ये बंद कर डाले. दवाई वगैरह भी. तकनीक और पावर माने लोहा. लोहे सेवो अरबों का सामान बनाकर बेच रहे हैं. कच्चा लोहा यहां से जा रहा है. भले पूरा नहींलेकिन मतलब भर का. जिससे अच्छा खासा असर पड़ सकता है उनके व्यापार पर. देखो हमपक्की तैयारी नहीं कर रहे हैं उनकी बधिया बिठाने की, लेकिन हल्का सा जुगाड़ बताएहैं. अगर लागू कर सको तो करो. नहीं तो चाइनीज झालर का बैन करके अपने ही देश केदुकानदारों की वाट लगानी है तो एवमस्तु.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: चाइनीज सामान का बायकॉट अकेले कर लो, पीएम न करेंगे दुनिया खत्म हो,उससे पहले इन भारतीयों को नोबेल प्राइज जरूर मिले