अब आप सुनेंगे अगला गाना. अलका याग्निक और उदित नारायण की आवाज में, फिल्म है दिलदे चुके सनम, संगीत दिया है इस्माइल दरबार ने. और रेडियो पर गाना बज उठता. चांदछुपा बादल में, शरमा के मेरी जानां. सीने से लग जा तू, बल खाके मेरी जानां. गानेमें ऐसी कशिश थी कि बस हम फैंटेसी में चले जाते थे. गाने की लाइनें खुद पर हीफिल्माने लगते थे. पिघलती हुई एक लाइन आती है गाने में. नज़दीकियां मिट जाने दे. औरइसके बाद आती है अलका याग्निक की आवाज. अरे नहीं बाबा नहीं अभी नहीं नहींनहीं. आहा! ऐसा लगता था कि मेरी और रेडियो पर बज रही अलका की आवाज एकाकार हो गई है.लगता था कि ये मेरी ही आवाज है जो अलका याग्निक बनकर गा रही है. ये जादू है उनकीआवाज का. वो बस अपना बना लेती थीं. वो झुमा देती थीं, सब भुलवा देती थीं. जितनेमिनट गाना चलता उनका, हम उसी दुनिया में पहुंच जाते जहां अलका हमें बहा ले जानाचाहती हैं. ‘ताल’ के टाइटल ट्रैक में अलका याग्निक रहमान के जादुई संगीत में गारही है. गाने के बीच में उदित आते हैं, ‘माना अंजान है तू मेरे वास्ते’. और वहां सेगाना एक और ही ऊंचाई पर चला जाता है. सिम्पली अमेजिंग ! एक वो समय था, जब न मालूमकितने घरों में ऐसी कितनी औरतें थीं, कुमार सानू जिनके अकेलेपन के सबसे अच्छे साथीथे. अकेलेपन के साथी की आवाज को अपना साथ कौन देता था? अलका याग्निक. अलका की आवाजके सुरूर में फिर से डूब जाइए, वही वाला गाना यहां सुनिए.https://youtu.be/RcODRM8J_L0 अलका के पास सबसे ज्यादा फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने कारिकॉर्ड है. 7 बार बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला है उन्हें. 36 बारनॉमिनेशन मिल चुके हैं. (आशा भोसले को भी 7 बार फिल्मफेयर मिला है लेकिन ज्यादा बारनामांकन होने की वजह से ये रिकॉर्ड अलका की झोली में है). अलका 2 बार की नेशनलअवॉर्ड विनर हैं. 20 मार्च 1966 में कोलकाता की एक गुजराती फैमिली में अलका पैदाहुई थीं. उनकी मां शुभा क्लासिकल सिंगर थीं. अलका ने 6 साल की उम्र में ही ऑलइंडिया रेडियो, कोलकाता के लिए गाना शुरू कर दिया था. जब वो 10 साल की हुईं तो उनकीमां लेकर मुंबई चली आईं. ताकि उनके करियर को जमाया जा सके. अलका को लेकर उनकी मांप्रोड्यूसर्स के पास जाने लगीं. एक दिन राजकपूर साहब ने कहीं पर छोटी सी अलका कोगाते हुए सुना. उन्हें बड़ी पसंद आई ये नई आवाज. उन्होंने अलका को सीधे म्यूजिकडायरेक्टर लक्ष्मीकांत के पास भेज दिया. लक्ष्मीकांत ने अलका को सुना और उनकी मांसे कहा कि या तो ये बच्ची अभी से ही डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू कर सकती हैया फिर इसकी आवाज मैच्योर हो जाने दीजिए क्योंकि ये एक बहुत बड़ी सिंगर बनने वालीहै. अलका की मां ने दूसरा वाला विकल्प चुना. इस वाकये के कुछ ही सालों बाद अलका नेबॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा. 1980 में फिल्म आई थी 'पायल की झंकार'. उसमें अलकाने गाना गाया, 'थिरकत अंग'. https://youtu.be/KXxvPp51MtM अगले साल 1981 मेंलावारिस का सुपरहिट गाना गाया 'मेरे अंगने में'. फिर 1988 में फिल्म आई 'तेजाब'.वही माधुरी दीक्षित वाली. इसके 'एक दो तीन' वाले गाने ने तो अलका की आवाज की धूममचा दी. और इसी गाने के लिए उनको पहला फिल्म फेयर भी मिल गया. अलका ने कन्नड़छोड़कर तकरीबन हर भारतीय भाषा में गाना गाया है. अलका ने अब तक हजार से ज्यादाहिंदी फिल्मों में लगभग ढाई हजार गाने गाए हैं. और इसी के साथ वो आशा भोसले, लतामंगेश्कर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के बाद सबसे ज्यादा गाना गाने वाले सिंगर्स कीलिस्ट में 5वें नंबर पर हैं. जाते-जाते बात उनके पिछले साल आए गाने 'अगर तुम साथहो' पर. इरशाद कामिल के लिखे इस गाने को रहमान ने जिस रूमानियत से कंपोज किया था,उसमें अलका याग्निक की आवाज ने 18 चांद लगा दिए थे. अलका ने मानो हर टूटे दिल सेनिकले दर्द को अपनी आवाज में पिरो दिया था. बैठी-बैठी भागी फिरूं. इसको इस अंदाजमें अलका ही गा सकती थीं. ये गाना वैसे तो आपकी प्लेलिस्ट में चल ही रहा होगा. नहींचल रहा है तो यहां सुनते जाओ. https://youtu.be/sK7riqg2mr4--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:बलम केसरिया तब होता है, जब उसे अल्लाह जिलाई बाई गाती हैंबादशाह और योयो के पंखों, गुरदास पर मान करो आजपंजाबी गायकी का वो रॉकस्टार जिसके फैन दिलजीत दोसांझ और जैज़ी बी हैंवो लता से बड़ी सिंगर थी पति दुनिया का महान डायरेक्टर, दोनों शराब पीकर मर गए!रेशमा के 12 गाने जो जीते जी सुन लेने चाहिए!