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जब अटल बिहारी ने बताया कि कैसे वो राजीव गांधी की वजह से ज़िंदा बच पाए

राजनीतिक विश्षेलक संजय बारू ने साल 2012 में बयान दिया था, ‘किसी के भी मुकाबले एक व्यक्ति भारत रत्न का सबसे बड़ा हकदार है, लेकिन मुझे डर है कि शायद ये सम्मान उसे कभी न मिले.’ संजय अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में बात कर रहे थे. उस समय तक वाजपेयी पूरी तरह बिस्तर पकड़ चुके थे और डिमेंशिया धीरे-धीरे उनकी स्मृति खाती जा रही थी.

असल में संजय ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी और ज्योति बसु को भारत रत्न देने की सलाह दी थी, जिस पर मनमोहन सिंह सहमत नहीं हुए थे. संजय के इस बयान के बाद वरिष्ठ पत्रकार करन थापर ने हिंदुस्तान टाइम्स में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस-बीजेपी की सियासत के बहाने अटल और राजीव गांधी के बीच का एक खूबसूरत किस्सा लिखा था.

संजय बारू
संजय बारू

1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद करन थापर ने वाजपेयी से इस घटना पर प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क किया था. वाजपेयी ने करन को घर बुलाया. जब दोनों गार्डेन में बैठे थे, तो वाजपेयी ने कहा कि करन के सवाल का जवाब देने से पहले वो उन्हें कुछ बताना चाहते हैं. अटल बोले,

‘जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें किसी तरह मेरी किडनी की समस्या के बारे में पता चल गया था, जिसका इलाज सिर्फ विदेश में हो सकता था. एक दिन उन्होंने मुझे ऑफिस बुलाया और कहा कि वो मुझे उस दल में शामिल कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है. राजीव ने उम्मीद जताई कि मैं इस मौके पर अपना इलाज भी करा लूंगा. तब मैं न्यूयॉर्क गया और आज मेरे ज़िंदा होने का एक कारण ये भी है.’

करन थापर
करन थापर

करन को ये सुनने की उम्मीद नहीं थी. फिर अटल ने कहा, ‘तो अब तुम मेरी समस्या समझ सकते हो. आज मैं विपक्ष में हूं और मुझसे अपेक्षित है कि मैं एक विरोधी की तरह बर्ताव करूं. लेकिन मैं नहीं कर सकता. मैं सिर्फ इस बारे में बात करना चाहता हूं कि उन्होंने मेरे लिए क्या किया. अगर तुम्हें ठीक लगे, तो ठीक, वरना मुझे और कुछ नहीं कहना है.’

करन थापर लिखते हैं कि ये वीडियो, वीडियो मैग्ज़ीन Eyewitness (आईविटनेस) के लिए रिकॉर्ड किया गया था. जून 1991 में राजीव गांधी की किस्सों वाले श्रद्धांजलि लेख का ये एक महत्वपूर्ण हिस्सा था.


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