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जब कैंसर से जूझ रही मैक्ग्रा की पत्नी के बारे में सरवन ने भद्दी बात कही, वो बोले: गला चीर दूंगा

साल 2003. लगातार दो बार की वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की टीम वेस्ट इंडीज़ को उसी के घर में लगातार पीट रही थी. लगातार तीन टेस्ट मैच जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम पहुंची एंटीगा. यहां सीरीज का चौथा मैच खेला जाना था. पहले दो टेस्ट मैचों में ना खेले ग्लेन मैक्ग्रा वापस आ चुके थे. ये अलग बात है कि तीसरे टेस्ट में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला.

मैक्ग्रा की बीवी जेन को कैंसर था. यह जानने के बाद वह टूर छोड़कर ऑस्ट्रेलिया लौट गए थे. मैक्ग्रा वहां पहुंचे तो जेन ने उन्हें वापस जाने को कहा. जेन ने मैक्ग्रा से कहा,

‘मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि ज़िंदगी पहले की तरह नॉर्मल चलती रहे’

सेकेंडरी कैंसर से जूझ रही अपनी बीवी की बात मान मैक्ग्रा वापस लौट आए. लेकिन उनकी आत्मा अब भी ऑस्ट्रेलिया में ही थी. सीरीज के तीसरे मैच में 36 ओवर फेंकने के बाद भी उन्हें विकेट नहीं मिला. एक तो विकेट ना मिलने की फ्रस्ट्रेशन और उस पर बीवी का कैंसर, इस कॉकटेल ने चौथे टेस्ट में मैक्ग्रा से कुछ ऐसा करा दिया, जिसका दाग अब भी उनके करियर पर है.

# हुआ क्या था?

चौथे टेस्ट की पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज़ दोनों ने 240-240 बनाए. दूसरी पारी में हेडेन के 177 और लैंगर के 111 की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने 417 रन टांग दिए. अब विंडीज़ को जीत के लिए 418 चाहिए थे. यहां से जीत के लिए उन्हें आत्मनिर्भर होना था. क्योंकि ऑस्ट्रेलिया तो अपने क्लीन स्वीप के रास्ते में किसी को आने नहीं देता. विंडीज़ की बैटिंग शुरू हुई. डेवोन स्मिथ और क्रिस गेल ने बेहद सावधानी से खेलना शुरू किया.

लेकिन सावधानी काम नहीं आई. 74 के टोटल तक गेल, स्मिथ और डैरेन गंगा वापस जा चुके थे. ब्रायन लारा और रामनरेश सरवन ने विंडीज़ को संभालने की कोशिश की. लेकिन 165 के टोटल पर लारा भी वापस लौट गए. अब सरवन का साथ देने आए शिवनारायण चंद्रपॉल. दोनों ने मिलकर पारी आगे बढ़ानी शुरू की. सरवन जहां तेजी से रन बना रहे थे वहीं चंद्रपॉल ने एंकर बनना तय किया.

वॉ ने विकेट की तलाश में मैक्ग्रा को बोलिंग पर बुलाया. लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. मैक्ग्रा उस वक्त अपनी बीवी की बीमारी के चलते परेशान थे. ऐसे में लोगों को वॉ के इस फैसले से आश्चर्य हुआ. सवाल तो ख़ैर मैक्ग्रा को टीम में शामिल करने पर भी हुआ था. इस बारे में वॉ ने अपनी आत्मकथा आउट ऑफ माइ कंफर्ट ज़ोन में लिखा है,

‘ग्लेन को उनकी रेपुटेशन के चलते चुना गया, ना कि उनकी फिटनेस या दिमागी हालत के चलते.’

विकेट ना मिलने से फ्रस्ट्रेट हुए मैक्ग्रा ने अपनी इमेज से इतर मैदान सरवन पर छींटाकशी शुरू कर दी. मैक्ग्रा की एक बॉल को स्क्वॉयर लेग की ओर खेल सिंगल के लिए निकले सरवन जब नॉन-स्ट्राइकर एंड तक पहुंचे तभी, बोलते-बोलते मैक्ग्रा कुछ ऐसा बोल गए जिसने बवाल करा दिया. उन्होंने सरवन से कहा,

‘लारा के लिंग का स्वाद कैसा है?’

यह अप्रत्याशित था. मैक्ग्रा ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट के चुनिंदा गुड बॉयज में से एक थे. किसी को इस बात पर यकीन ही नहीं था कि वह ऐसा कुछ बोल सकते हैं. उनके बारे में पूर्व ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट रॉडनी हॉज ने एक बार कहा था,

‘ग्लेन मैक्ग्रा तो स्लेज कर ही नहीं सकता. उसे कोई आइडिया ही नहीं है कि ये कैसे करते हैं. इसीलिए मुझे लगता है कि वह अच्छा इंसान है.’

सिर्फ 23 साल के सरवन ने छूटते ही कहा,

‘तुम अपनी बीवी से क्यों नहीं पूछते?’

बवाल हो गया. अपनी बीवी के कैंसर के चलते पहले से परेशान मैक्ग्रा किलस गए. वह सरवन की ओर लपके और उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के कई प्लेयर्स भी आगे बढ़े. लेकिन सरवन टस से मस नहीं हुए.

इस बारे में डैनिएल लेन ने मैक्ग्रा की जीवनी में लिखा है,

‘साधारण हाल में मैक्ग्रा इसे यह सोचकर स्वीकार कर लेते कि यह उन्हीं की ग़लती थी. लेकिन जेन घर पर बीमार पड़ी थीं, ऐसे में उन्हें यह बेइज्जती लगी और वह फट पड़े. उनके अंदर से एक धीमी आवाज उन्हें इस मामले को इग्नोर करने के लिए कह रही थी, लेकिन उनके अंदर कुछ था जो इसे इतनी आसानी से नहीं जाने देना चाहता था.’

गुस्साए मैक्ग्रा ने सरवन की ओर उंगली दिखाते हुए कहा,

‘अगर तुमने दोबारा मेरी बीवी का ज़िक्र किया, मैं तुम्हारी गर्दन चीर दूंगा.’

अंपायर डेविड शेफर्ड फिर दौड़े. इधर हेडेन और लैंगर मैक्ग्रा के सपोर्ट में आ चुके थे. बाद में लैंगर ने इस बारे में कहा था,

‘मैंने शुरुआती बातचीत नहीं सुनी. मैंने बस इतना सुना कि ग्लेन अपनी बीवी के बारे में कुछ बोल रहा था और यह मुझे बुरा लगा, खासतौर से ग्लेन और जेन जैसे हालात से गुजर रहे थे उसके चलते. मैं भड़क गया और उससे कहा कि उसने लाइन क्रॉस कर दी है- जेन को बीच में लाकर वह बहुत आगे निकल गया है.’

कैप्टन वॉ लपके और अपने दोनों ओपनर्स को वापस भेजा. इधर सरवन हतप्रभ, किंकर्तव्यविमूढ़. मतलब वही, फ्यूज उड़े से खड़े. उन्हें पता ही नहीं चला कि ऐसा क्या हो गया. दरअसल सरवन को जेन की हालत के बारे में पता नहीं था. बाद में उन्होंने माफी भी मांगी और मैच के बाद मैक्ग्रा के साथ बैठकर रम और कोक पर लंबी चर्चा भी की. बाद में मैक्ग्रा ने इस बारे में कहा था,

‘यह भुलाया ही नहीं जा रहा था. हमारी लंबाई का अंतर बहुत बुरा दिख रहा था. मैंने सरवन से बात की और इस बारे में वह बेहद अच्छा था. उसने मुझसे कहा कि उसे जेन की बीमारी के बारे में नहीं पता था. उसने मुझसे माफी भी मांगी. लेकिन मैंने कहा कि माफी मुझे मांगनी चाहिए.’

मैच की बात करें तो शिवनारायण चंद्रपॉल और सरवन के शतकों की बदौलत विंडीज़ ने यह टेस्ट तीन विकेट से जीत लिया था. यह आज भी टेस्ट में चेज किया गया सबसे बड़ा स्कोर है. लेकिन मैक्ग्रा के लिए आज भी इस हार से ज्यादा बुरी याद सरवन के साथ का उनका विवाद है.

जाते-जाते बता दें कि साल 2008 में जेन की मौत हो गई. उनके जिंदा रहते ही मैक्ग्रा ने एक फाउंडेशन शुरू किया था. यह ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ जागरूकता फैलाता है.


वसीम अकरम ने विवियन रिचर्ड्स को किस मैच के दौरान बहुत परेशान किया था?

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