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टाइगर पटौदी के कहने पर, इस लड़के ने डेब्यू में शतक ठोक दिया था!

गुंडप्पा विश्वनाथ. वो खिलाड़ी जिसके स्क्वेयर कट और लेट कट को रोकने के लिए विरोधी टीम स्लिप से लेकर गली और गली से प्वॉइंट तक पांच से छह फील्डर लगाती थी. लेकिन वो कट बुलेट की रफ्तार से भी तेज़ होता था और फील्डर्स के बीच से निकल जाता था.

साल 1969 में 20 नवंबर के दिन ही विशी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में शतक जमाया. इस मैच की पहली पारी में विश्वनाथ एक रन भी नहीं बना सके थे. कॉनली की गेंद पर वो शून्य पर आउट होकर लौट गए थे. आउट होने के बाद वो वापस ड्रेसिंग रूम में गए और निराश होकर बैठ गए.

खेल के बाद कप्तान मंसूर अली खां पटौदी उनके पास आए. कप्तान टाइगर पटौदी ने निराश विशी के कंधे पर हाथ रखा और कहा,

”शांत हो जाओ, चिंता मत करो, तुम अगली पारी में शतक बनाओगे.”

दूसरी पारी में बदल गया गुंडप्पा का रंग:

कानपुर में खेले जा रहे इस मुकाबले में भारत ने पहली पारी में 320 रन बनाए. जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 348 रन बना दिए. मामूली ही सही लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास बढ़त थी. फिर से भारत की बैटिंग आई. 94 के स्कोर तक फारूख इंजीनियर और अजीत वाडेकर लौट चुके थे. अब नंबर चार पर उतरे गुंडप्पा विश्वनाथ. बैटिंग के लिए उतरे 20 साल के गुंडप्पा ने आते ही अपने फेवरेट शॉट्स खेलने शुरू कर दिए. गुंडप्पा ने ऐसी कमाल की बैटिंग की सारा दबाव उलटा ऑस्ट्रेलिया पर डाल दिया.

इस लड़के ने पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की नाक में दम कर दिया. इस पारी में गुंडप्पा ने एक-दो घंटे नहीं बल्कि 11 घंटे बल्लेबाज़ी की और 25 चौकों के साथ 137 रन बनाए. गुंडप्पा की इस पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया इस मैच को नहीं जीत सका और भारत ने मैच ड्रॉ करवाया.

सीरीज़ में कुल चार मैच खेले गए. लेकिन कानपुर टेस्ट को छोड़ बाकी किसी भी मैच को भारत नहीं बचा सका.

इसके बाद भी कई मौकों पर गुंडप्पा ने शानदार पारियां खेलीं. साल 1974-75 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ खेली उनकी नाबाद 97 रनों की पारी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट पारियों में से एक भी कहा जाता है.

पाकिस्तान के खिलाफ 1978 के दौरे पर साईवाल में खेले गए तीसरे वनडे में तो विश्वनाथ के खिलाफ पाकिस्तानी इस हद तक बेईमानी पर उतर आए कि वो सारी गेंदें उनकी हाईट से ऊपर ही फेंक रहे थे. उस समय एक ओवर में सीमित बाउंसर फेंकने का नियम भी नहीं था. जबकि अंपायर्स भी बेईमानी पर उतारू थे.

जब भारतीय बल्लेबाज़ अंशुमन गायकवाड़ ने इन बाउंसर्स की शिकायत अंपायर से की तो उन्होंने कहा कि किसी लंबे बल्लेबाज़ को भेज दो.

बाद में पाकिस्तान के इस व्यवहार को देखते हुए कप्तान बिशन सिंह बेदी ने टीम को मैच के बीच से ही वापस बुला लिया था.

1969 में 20 नवंबर की तारीख को अपना डेब्यू टेस्ट खेलने वाले गुंडप्पा ने 1983 तक भारत के लिए क्रिकेट खेला. उन्होंने टीम इंडिया के लिए 14 शतक और 35 अर्धशतकों के साथ 6000 से ज़्यादा रन बनाए.


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