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जब क्रिकेट मैदान के बाद पोस्टर्स में भी जयसूर्या से पिछड़े सचिन-गांगुली!

साल 1996. देश तेज़ी से बदल रहा था. आम चुनाव में सरकार बदल रही थी. लालू यादव जनता दल के शिखर पर पहुंच गए थे और फूलन देवी पार्लियामेंट में. पाकिस्तान के साथ टेंशन इतनी बड़ गई थी कि LOC में मोर्टरार और मशीन-गन से फायरिंग हो रही थी.

इन सब के बीच कोलकाता में आग लगी हुई थी. ये आग सड़क पर नहीं मैदान पर थी. ईडन गार्डन्स के मैदान पर. जिसका इतिहास खेल जगत में बरसों पुराना है. लेकिन इस बार ईडन के फैंस के सब्र का बांध टूट गया था. तारीख थी 13 मार्च 1996. भारतीय टीम विश्वकप के सेमीफाइनल में श्रीलंका के हाथों हारकर बाहर होने जा रही थी. ये विश्वकप बहुत खास था, क्योंकि 1987 में घर में हार के बाद इस बार भारत हाथ में आए इस मौके को नहीं गंवाना चाहता था.

1996 Eden Gardens
1996 ईडन गार्डेन्स.

मोहम्मद अज़हरूद्दीन की कप्तानी में टीम शानदार खेलते हुए केन्या, वेस्टइंडीज़, ज़िम्बाबवे, पाकिस्तान को हराकर बिना किसी परेशानी के सेमीफाइनल तक पहुंच गई थी. लेकिन तभी सेमीफाइनल में एक ऐसा ‘हर्डल’ आया कि भारत चारों खाने चित हो गया. इस ‘हर्डल’ ने सेमीफाइनल में हमें बहुत नुकसान नहीं पहुंचाया. लेकिन इसके डर से ही हम हार गए. विश्वकप 1996 सेमीफाइनल के उस सबसे बड़े हर्डल का नाम है

‘सनथ टेरन जयसूर्या’

सेमीफाइनल से पहले भारतीय टीम के मैनेजर अजीत वाडेकर ने भांप लिया था. जयसूर्या और कालूविथरना उस विश्वकप में सबसे खतरनाक जोड़ी हैं. जयसूर्या ने तो उस विश्वकप में 130 से ऊपर की स्ट्राइक से बैटिंग की थी. बस अजीत वाडेकर ने तुरंत मैच से पहल अज़हर, सचिन, कांबली, श्रीनाथ समेत बाकी खिलाड़ियों की टीम मीटिंग बुलाई. इस मीटिंग में जो भी पर्चा टीम मैनेजर के हाथ में रहा उसमें सनत जयसूर्या और रोमेश कालूविथरना का नाम लिखा होगा. लगभग एक घंटे तक चली उस मीटिंग में वाडेकर, सनथ और कालूविथरना से आगे नहीं बढ़े.

जब वो चुप हुए तो कप्तान अज़हर ने सांप की वही पूछ पकड़ ली. मीटिंग में वो भी सनथ और कालूविथरना को रोकने की प्लानिंग बनाने लगे. लेकिन पूरी टीम ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया कि इन दो के बाद क्या? यानि अभिमन्यू को ये तो पता चल गया कि चक्रव्यूह में एंट्री कैसे मारनी है. लेकिन एंट्री मारने के बाद क्या करना है. इस बारे में कोई नहीं जानता.

भारतीय टीम के साथ भी उस सेमीफाइनल में यही हुआ. भारत ने उस ऐतिहासिक मैच में जयसूर्या(1) और कालूविथरना(0) को आउट कर दिया. लेकिन उसके बाद डिसिल्वा और महानामा को नहीं रोक पाए. ये जयसूर्या का वो डर था, जो भारतीय टीम पहले ही देख चुकी थी. इसीलिए कई लोगों ने कहा भी कि

‘सेमीफाइनल का मैन ऑफ दी मैच तो सनथ जयसूर्या को होना चाहिए.’

फिर मिला सनथ जयसूर्या को स्टारडम:

1996 में भारत की वो हार भूले नहीं भूलती. 1996 का वो साल सनथ जयसूर्या के स्टारडम का बड़ा साल रहा. उन्होंने भारत के खिलाफ पहला वनडे शतक बनाया. पाकिस्तान के खिलाफ शतक बनाया. विश्वकप में 79 रनों की पारी खेली और एक बड़े स्टार बन गए.

Imran New
इमरान खान की क्रिकेट के दिनों की तस्वीर. फोटो: Getty Images

वेस्टइंडीज़ ऑल-राउंडर सर गारफील्ड सोबर्स, इमरान खान, विवियन रीचर्ड्स 1996 तक उन चुनिंदा क्रिकेटर्स में रहे. जिन्हें इंडियन फैंस ने एक सुपरस्टार की तरह देखा. इस लिस्ट में अब अगला नाम जुड़ा सनथ जयसूर्या का. फैंस जयासूर्या की बैटिंग देखते और आसानी से चौके-छक्के लगते देख कहते,

‘इसके बल्ले में स्प्रिंग लगी है.’

जी हां, इंडियन फैंस जयासूर्या के बल्ले में रिकी पोन्टिंग के बल्ले से पहले ही स्प्रिंग लगवा चुके थे. हालांकि उस दौर के गेंदबाज़ इस स्प्रिंग वाली थ्योरी से मन ही मन सुकून ज़रूर महसूस करते होंगे.

ग्लैमर वर्ल्ड में जयसूर्या ऑन डिमांड:

जयसूर्या के फैन अब सिर्फ श्रीलंकन ही नहीं थे. बल्कि भारत में ही जयसूर्या को खूब प्यार मिलने लगा. उनकी डिमांड एकाएक बढ़ गई. 1996 में सिर्फ आठ महीने के सफर में वो सुपरस्टार हो गए. मार्च के बाद नवंबर में वो एक फंड रेज़िंग टूर्नामेंट में मुंबई के रुइया कॉलेज के लिए खेले. इसके बाद तो उनकी लोकप्रियता इस कदर बड़ी की मुंबई में पैंटालून्स जैसे बड़े ब्रांड के लिए उन्हें साइन किया गया. उन्हें इस ब्रांड के लिए मॉडलिंग का ऑफर भी मिला. उन्हें पैंटालून्स के लिए स्टीव और मॉर्क वॉ, हेन्सी क्रॉनिए, ब्रेन मैक्मिलन जैसे बड़े स्टार्स के साथ ब्रांड का प्रमोशन करना था.

हालांकि पैंटालून्स का विदेशी क्रिकेटर्स के लिए जाने का फैसला ये भी था कि भारतीय खिलाड़ी उस वक्त बहुत महंगे थे. इसलिए उन्होंने ऐसे इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को साइन किया. जिनकी भारत में भी फॉलोइंग थी.

नवंबर के महीने में पैंटालून्स से जुड़ने के बाद अब उन्हें और भी ऑफर मिले. सबसे बड़ा ऑफर उन्हें अमिताभ बच्चन की कंपनी की तरफ से आया. 1996 में पहली और आखिरी बार भारत ने मिस वर्ल्ड ब्यूटी कॉन्टेस्ट का आयोजन किया. ये आयोजन बेंगलुरू के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में होना था. इस आयोजन के पीछे बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन थे. जो कि फिर से अपनी जड़े जमाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अपनी कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिडेट लॉन्च की. लेकिन उनके इस आयोजन को कर्नाटक में बहुत सी आलोचना झेलनी पड़ी.

बच्चन ने खुद इस आयोजन के लिए जजों का पैनल तैयार किया था. सनथ जयसूर्या को क्रिकेट में लोकप्रियता की वजह से इस पैनल का जज बनाया गया. जयसूर्या इस आयोजन से चार दिन पहले ही मुंबई पहुंच गए और यहां आकर ग्लैमर की दुनिया में पार्टियां की. जयसूर्या को खुद भी इस बात का विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ महीनों में ही उनकी ज़िन्दगी किस तरह से बदल गई है.

Aamir Aishwariya Twitter Image
आमिर खान और ऐश्वर्या राय. फोटो: Twitter

जिस आयोजन के लिए जयसूर्या को जज बनाया गया. वहां ऐश्वर्या राय और आमिर खान भी जज थे. अब अपने देश के लड़के को बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान और विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय के साथ उनके देश श्रीलंका में भी लोग देख रहे थे. वो जयसूर्या को मिले इस स्टारडम से बहुत खुश थे.

उस कॉम्पटीशन में जैसे ही कार्यक्रम की होस्ट रूबी भाटिया ने सभी जजिस को इंट्रड्यूज़ कराया. तो सबसे ज़्यादा शोर ऐश्वर्या राय और आमिर खान के लिए मचा. लेकिन जैसे ही सनथ जयसूर्या का नाम लिया गया तो वो शोर ऐश्वर्या या आमिर से कम नहीं था. अपना नाम सुनते ही जयसूर्या ने हाथ हिलाया और मैदान पर मौजूद दर्शकों को एक नर्वस सी स्माइल पास की.

जयसूर्या ने बाद में भी बताया भी कि

”ये फीलिंग बिल्कुल ऐसी थी, जैसे मैं टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली गेंद का सामना करने जा रहा हूं.”

इस तरह से 1996 में बैटिंग की कला ने सनथ जयसूर्या को श्रीलंका का भारत में पहला ‘पोस्टर बॉय’ बना दिया.

30 जून 1969 को पैदा हुए सनथ जयसूर्या श्रीलंका के लिए दूसरे सबसे अधिक वनडे रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं. ओवरऑल लिस्ट में उनका चौथा नंबर है. इंटरनेशनल क्रिकेट में जयसूर्या के नाम 20,000 रन और 400 विकेट हैं. वह ऐसा करने वाले दो खिलाड़ियों में से एक हैं.


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