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नमाज़ के कारण मिस्बाह उल हक़ को टीम में नहीं आने देना चाहते थे इंज़माम

मिस्बाह उल हक़. नाम लो, तो याद आता है 2007 का T20 वर्ल्ड कप फाइनल. आखिरी ओवर, जोगिंदर शर्मा की बॉल, मिस्बाह का स्कूप और श्रीसंत के हाथ में जाकर अटकी बॉल. लेकिन यह वर्ल्ड कप बस इतना ही नहीं था. न ही इस फाइनल की कहानी बस इतनी-सी थी. 11वें ओवर तक मैच लगभग बराबर था. पाकिस्तान को हर ओवर में नौ रन बनाने थे और क्रीज़ पर थे कप्तान शोएब मलिक. मलिक का साथ दे रहे थे मिस्बाह. वही मिस्बाह, जिन्हें इस टीम में लाने के लिए मलिक सेलेक्टर्स से भिड़ गए थे.

तुरंत ही अटैक पर आए इरफान पठान ने अपना दूसरा ओवर फेंका. पारी के इस 12वें ओवर की तीसरी बॉल पर शोएब मलिक और चौथी बॉल पर शाहिद अफरीदी आउट हो लिए. पठान ने सिर्फ दो रन देकर दो विकेट निकाल लिए. अब पाकिस्तान को बची हुई 48 बॉल में 80 रन चाहिए थे. क्रीज़ पर आए यासिर अराफात, मिस्बाह के साथ अब सिर्फ बोलर्स बचे थे. अगला ओवर भज्जी ने फेंका और इसमें 10 रन बन गए. रिक्वायर्ड रेट भी इतना ही था. लेकिन पठान ने अगले ओवर में सिर्फ चार रन ही दिए और मैच भारत की ओर झुका लिया.

# मिस्बाह की पहचान

16वें ओवर तक यासिर अराफात भी आउट हो गए. अब पाकिस्तान को चार ओवर में 54 रन चाहिए थे. अगला ओवर लेकर फिर से हरभजन आए. भज्जी ने अपने पहले दो ओवर में 17 रन दिए थे. लेकिन इन रनों की खास बात ये थी कि इसमें सिर्फ एक बाउंड्री थी. ओवर की तीसरी बॉल, मिस्बाह ने थोड़ी-सी जगह बनाई और बॉल मिडविकेट के ऊपर से स्टैंड्स में तैर गई.

ये वो मिस्बाह था, जिस पर शोएब मलिक ने भरोसा जताया था. टेक्निकली बेहद मजबूत और मनचाहे वक्त पर छक्के मारने वाला. अगली दो गेंदें डॉट रहीं, प्रेशर फिर मिस्बाह पर आया. ओवर की आखिरी दो गेंदें अलग-अलग लेंथ की थीं, लेकिन रिजल्ट सेम रहा. दो और छक्के. अगला ओवर श्रीसंत ने फेंका और सामने थे सोहेल तनवीर. तनवीर ने इस ओवर में दो छ्क्के मारे और आखिरी बॉल पर आउट भी हो गए.

अब पाकिस्तान को दो ओवर में 20 रन चाहिए थे. रुद्र प्रताप सिंह ने इस ओवर में सिर्फ सात रन देकर उमर गुल का विकेट भी ले लिया. आखिरी ओवर में पाकिस्तान को 13 रन बनाने थे और मिस्बाह ने पहली दो बॉल में सात रन बना भी लिए. इसमें पहली बॉल वाइड, पहली वैलिड बॉल पर कोई रन नहीं और दूसरी बॉल पर छक्का आया.

लेकिन ओवर की तीसरी वैलिड बॉस पर मिस्बाह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी ग़लती कर बैठे. उन्होंने स्कूप की कोशिश की और श्रीसंत ने कैच नहीं, वर्ल्ड कप पकड़ लिया. मिस्बाह भले ही मैच न जिता पाए हों, लेकिन ये पारी टिपिकल मिस्बाह इनिंग्स थी. टिपिकल मिस्बाह यानी टेक्निकली बेहद मज़बूत बल्लेबाज, जो अपनी मर्जी से कभी भी छक्का मार सकता है.

मिस्बाह ने इस वर्ल्ड कप के सात मैचों में 54.50 की एवरेज के साथ 218 रन कूटे. क्रिकेट में कम ही बार ऐसा होता है कि T20 प्रदर्शन के दम पर कोई प्लेयर वनडे और फिर टेस्ट टीम में रेगुलर हो जाए. मिस्बाह के साथ यही हुआ और क्रिकेट के छोटे फॉर्मेट के जरिए उन्होंने वनडे और टेस्ट टीम में भी एंट्री कर ली. अब मिस्बाह का बल्ला बोलने लगा और जिंदगी ठाठ में कटने लगी. लेकिन जीवन में उतार-चढ़ाव लगे ही रहते हैं. साल 2009 में पाकिस्तान टूर पर आई श्रीलंका पर हमला हो गया. टीमें पाकिस्तान आने से इनकार करने लगीं और मिस्बाह की फॉर्म भी काफी गिर गई. मिस्बाह फिर से टीम से बाहर हो गए. फिर से इसलिए, क्योंकि अपने डेब्यू के बाद भी वह कई साल तक पाकिस्तानी टीम से बाहर रहे थे.

# क़िस्सा-ए-इंज़माम

इंज़माम उल ह़क. पाकिस्तान के सबसे सफल कप्तान और बल्लेबाजों में से एक. कहते हैं कि इंज़माम ने पाकिस्तानी टीम को काफी बदला. इन बदलावों में अहम चीज थी उनका धर्म के प्रति झुकाव. इंज़माम की कप्तानी में ही प्लेयर्स नाइट क्लब और बार की जगह नमाज़ पर ज्यादा ध्यान देने लगे थे. इंज़माम कम पढ़े-लिखे थे और उन्हें लगता था कि टीम को एकजुट करने का सबसे सही तरीका धर्म ही है. पाकिस्तानी पत्रकारों की मानें, तो इंज़माम ने हमेशा ही मिस्बाह को टीम से बाहर रखा. दरअसल मिस्बाह काफी पढ़े-लिखे हैं. इंज़माम को लगता था कि MBA की डिग्री रखने वाले मिस्बाह के टीम में आने के बाद टीम पर उनका कंट्रोल कम हो जाएगा. इसके चलते मिस्बाह काफी वक्त तक पाकिस्तान नेशनल टीम से बाहर रहे.

साल 2001 में डेब्यू करने वाले मिस्बाह साल 2006 में दूसरा मौका मिलते-मिलते रह गया. इंडिया में चैंपियंस ट्रॉफी होने वाली थी. ओवल टेस्ट में हुए विवाद के बाद इंज़माम पर चार वनडे मैचों का बैन लगा था. उनकी जगह कप्तानी मिली वाइस-कैप्टन यूनिस खान को. खान ने इंज़माम की जगह मिस्बाह को मांगा. सेलेक्टर्स बिल्कुल राज़ी नहीं थे. उन्हें लगता था कि 33 साल के मिस्बाह वनडे टीम के लिए बहुत बूढ़े हैं. लेकिन यूनिस अड़ गए और कप्तानी से इस्तीफा दे दिया.

बाद में, साल 2007 में वनडे वर्ल्ड कप हुआ. पाकिस्तान बुरी तरह हारा. कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत हुई. और इन सबके बीच इंज़माम ने तुरंत प्रभाव से संन्यास ले लिया. इसी साल हुआ T20 वर्ल्ड कप. इसके लिए कप्तान चुने गए युवा ऑलराउंडर शोएब मलिक. उसके बाद मलिक ने जो किया, वो हम आपको ऊपर बता ही चुके हैं.

इस वर्ल्ड कप के कुछ सीरीज बाद, इधर मिस्बाह की फॉर्म खराब हुई और उधर पाकिस्तानी कप्तान ताश के पत्तों की तरह फेंटे जाने लगे. 2008 में मलिक को हटाकर यूनिस खान को कप्तान बनाया गया. 2009 में यूनिस ने पाकिस्तान को T20 वर्ल्ड कप जिताया, लेकिन अपनी कप्तानी नहीं बचा पाए. अगले कप्तान अफरीदी बने और जल्दी ही उनकी जगह आए सलमान बट. ये वही बट थे, जिन्होंने 2010 में इंग्लैंड टूर पर स्पॉट फिक्सिंग की और अपने साथ मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ को भी ले डूबे.

# कैप्टन, लीडर, लेजेंड

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) परेशान था. टीम को एक लीडर की सख्त जरूरत थी. ऐसे में उस वक्त PCB के चेयरमैन रहे एजाज़ हुसैन ने मिस्बाह के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ की. मिस्बाह के मुताबिक, यह मीटिंग एक क्लर्क के ऑफिस में हुई थी. उस वक्त मिस्बाह पाकिस्तान नेशनल टीम से काफी दूर थे. लेकिन एजाज़ ने उन्हें सीधे कप्तानी ऑफर कर दी. यह सब इतना सीक्रेट था कि मिस्बाह ने अपनी बीवी उज़्मा को भी इसके बारे में नहीं बताया. किस्मत का खेल देखिए, 36 की उम्र तक लोग टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो जाते हैं और इस उम्र में मिस्बाह ने टेस्ट टीम में वापसी की, वो भी कप्तान के रूप में. जल्दी ही वह वनडे और T20 टीम की कमान भी संभाल चुके थे.

मिस्बाह ने यहां से पाकिस्तानी टीम को दोबारा बनाना शुरू किया. यह नया पाकिस्तान था. इसकी रणनीति में अटैकिंग बल्लेबाजों और डरावने तेज गेंदबाजों से इतर भी चीजें थी. मिस्बाह बेहद सोच-समझकर और ठंडे दिमाग से फैसले करते थे. उन्होंने स्लो बैटिंग और स्पिनर्स को अपना हथियार बनाया. पहले सईद अजमल और फिर यासिर शाह जैसे स्पिनर्स के साथ मिस्बाह ने पाकिस्तानी क्रिकेट को खूब ऊंचाइयां दीं.

आप वो बात क्यों पूछते हैं…. जो बताने के क़ाबिल नहीं है. सोशल मीडिया इस क्लिप से भरा पड़ा है. लेजेंडरी सिंगर अताउल्लाह खां की ये लाइन मिस्बाह का परफेक्ट जवाब हो सकती हैं. अगर सवाल हो- आपने वनडे में कितनी सेंचुरी मारी हैं? बिना सेंचुरी वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले मिस्बाह का ताल्लुक पंजाब के उसी इलाके से है, जहां से अताउल्लाह निकले थे. पंजाब का सैराकी बेल्ट. इस इलाके में उतना अंधेरा है, जितना आमतौर पर साउथ-ईस्ट एशिया के ग़रीब इलाकों में होता है. मिस्बाह से पहले अताउल्लाह इस ज़मीन से निकले सबसे पॉपुलर इंसान थे.

# पढ़ाई पहले, बाद में खेल

मिस्बाह उल ह़क खान नियाज़ी का जन्म इसी सैराकी इलाके के मियांवली में हुआ था. दशकों पहले इस इलाके के बारे में मशहूर क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर जस्टिस कॉर्नेलियस ने कहा था,

‘मियांवली से लंबे-चौड़े. छहफुटिया जवान लाओ और उन्हें फास्ट बोलर बना दो.’

कॉर्नेलियस के इस कथन के छह दशक बाद इस इलाके ने पाकिस्तान को उनका सबसे सफल टेस्ट कैप्टन दिया. मिस्बाह इसी इलाके में बड़े हुए. यहां पैदा होने वाले क्रिकेटर बनने का सपना कभी नहीं देखते. मियांवली से सबसे नजदीकी क्रिकेट सेंटर सरगोधा में था. 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर. इस बारे में एक बार मिस्बाह ने क्रिकेट मंथली से कहा था,

‘वहां का कल्चर ऐसा नहीं था कि आप पाकिस्तान के लिए खेलने के बारे में सोचें. मियांवली में ऐसा कुछ भी नहीं था. वहां का क्रिकेट ऐसा है ही नहीं कि वे महान क्रिकेटर्स बना सकें. पाकिस्तान तो छोड़िए, वहां से बमुश्किल ही कभी फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर निकला होगा. वहां चीजें सिर्फ मज़े के लिए की जाती थीं. आप क्रिकेट खेलते थे, क्योंकि ये आपका पैशन था, न कि आप इसे अपना प्रोफेशन बनाना चाहते थे.’

मिस्बाह की मां अपने कॉलेज के दिनों में स्टार एथलीट थीं. उनके पापा भी हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी थे. लेकिन वह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे स्पोर्ट्स को करियर बनाएं. उन्हें लगता था कि ये सब में सिर्फ वक्त बर्बाद होता है. उनका पूरा जोर अपने बच्चों की पढ़ाई पर था. कॉलेज की पढ़ाई करने फैसलाबाद आए मिस्बाह ने यहीं पहली बार इंटरनेशनल मैच देखा. साल था 1994. विल्स ट्रायंगुलर सीरीज के इस मैच में पाकिस्तान ने साउथ अफ्रीका को हराया. मैच में तो मिस्बाह को खूब मज़ा आया, लेकिन फैंस के व्यवहार से वह बहुत निराश हुए. उन्होंने क्रिकेट मंथली से कहा था,

‘किसी को क्रिकेट में इंट्रेस्ट नहीं था. लोग बोतलें फेंक रहे थे. उसी दिन मुझे पता चला कि पाकिस्तान में स्टेडियम तक आने वाले 90 परसेंट लोग सिर्फ गालियां देने आते हैं. वे मैच देखने नहीं, सिर्फ मज़े करने आते हैं. यह इंग्लैड जैसा नहीं है.’

80-90 के दशक के ज्यादातर पाकिस्तानी क्रिकेटर्स की तरह मिस्बाह ने भी खूब टेप बॉल क्रिकेट खेली थी. टेप बॉल के दिनों में वह काफी पॉपुलर भी थे, लेकिन उनका पूरा फोकस अपनी पढ़ाई पर था. 1997 में मिस्बाह ने अपनी पढ़ाई पूरी की. 23 साल की उम्र में MBA डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक कपड़े की फैक्ट्री के साथ छह महीने का कॉन्ट्रैक्ट भी साइन किया. लेकिन उन्होंने वह नौकरी कभी जॉइन नहीं की. नौकरी की जगह मिस्बाह ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भाग्य आजमाया और बाकी की कहानी तो सबके सामने है ही.

#ट्रिविया

# 28 मई, 1974 को पैदा हुए मिस्बाह आज 46 साल के हो गए. आजकल मिस्बाह पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कोच और चीफ सेलेक्टर, दोनों हैं.

# यूं तो पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंंत्री इमरान खान भी मूल रूप से मियांवली के ही रहने वाले थे, लेकिन वे लाहौर में पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े. इमरान और मिस्बाह दूर के कज़िन भी हैं.

# मिस्बाह की कप्तानी में पाकिस्तान ने 26 टेस्ट मैच जीते. पाकिस्तान के इतिहास में किसी भी कैप्टन ने इससे ज्यादा टेस्ट नहीं जीते हैं.

# जब मिस्बाह T20 वर्ल्ड कप 2007 की टीम में चुने गए तो वह इंग्लैंड में खेल रहे थे और उनके अकाउंट में सिर्फ 17,000 पाकिस्तानी रुपये थे.


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