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जब दो-दो वर्ल्डकप जिताने वाले युवराज ने टीम इंडिया को वर्ल्डकप फाइनल हरा दिया

साल 2007 में खेला गया टी20 विश्वकप फाइनल, भारतीय फैंस के लिए उम्मीदों भरा था. 2007 के 50 ओवर वाले विश्वकप की हार के बाद भारतीय टीम ने उसी साल टी20 विश्वकप जीतकर हिन्दुस्तानी को क्रिकेट में फिर से करंट भर दिया था. इसके बाद भारत ने 2011 विश्वकप जीता. लेकिन टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी टीम इंडिया से दूर ही रही.

चाहे बात 2009 की हो या फिर 2010 और 2012 की. 2014 विश्वकप फाइनल में तो वो हुआ जिसे भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बुरे दिनों में गिना जाए तो कुछ गलत नहीं होगा. जैसी हार 2003 विश्वकप फाइनल में फैंस ने देखी थी, 2014 की हार उससे बिल्कुल भी कम नहीं था. 06 अप्रेल 2004 का दिन, वही दिन है.

क्या हुआ था?
2014 टी20 विश्वकप बांग्लादेश में खेला गया था. टीम इंडिया ग्रुप में शानदार फॉर्म में थी. पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश हो या फिर वेस्टइंडीज़ से लेकर ऑस्ट्रेलिया. उसका मूड सबको धूल चटाने का था. शानदार तरीके से अपने ग्रुप के चारों मैच जीतकर टीम इंडिया आगे बढ़ भी रही थी.

नॉकआउट सेमीफाइनल में टीम इंडिया का सामना साउथ अफ्रीका के साथ था. वही साउथ अफ्रीका जो 1992 से आज तक अपने पहले आईसीसी खिताब के लिए हर बार आईसीसी इवेंट में आती है. लेकिन 28 साल पूरे होने पर भी हर बार खाली हाथ लौट जाती है.

इस बार ये टीम इंडिया के हाथों होना था. सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका ने डू प्लेसी, डूमिनी की मदद से 172 रन बनाए. जवाब में विराट कोहली की शानदार 72 रनों की पारी की मदद से टीम ने आखिरी ओवर की पहली गेंद पर मैच जीत लिया. टीम इंडिया फाइनल में थी.

Final इंडिया vs श्रीलंका:
अब फाइनल की बारी थी. 1983, 2007, 2011 को दोहराने से टीम इंडिया एक कदम दूर थी. फाइनल मैच था श्रीलंका के साथ. वही श्रीलंका जिसे अनचाहे ही टीम इंडिया ने कई ज़ख्म दिए थे. 2011 विश्वकप फाइनल की हार तो अभी सिर्फ तीन साल पुरानी ही थी. धोनी की टीम ने बुरी तरह से श्रीलंकाई टीम को पटक मारा था.

अब बारी थी टी20 विश्वकप फाइनल की. ढाका के बंगबंधू इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में मैच खेला गया. श्रीलंका ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए कहा. कहानी वहीं से शुरू हो गई. रोहित और रहाणे की जोड़ी फाइनल में नहीं चली. दूसरे ओवर में ही रहाणे 3 रन बनाकर वापस चल दिए. पहला विकेट गिरा था लेकिन मैच अभी श्रीलंका के पक्ष में नहीं था. रोहित और विराट कोहली ने 10.2 ओवरों में 64 रन जोड़ दिए थे.

लेकिन इसके बाद रोहित शर्मा भी 29 रन बनाकर चलते बने. वो भी 26 गेंदों में. भारतीय टीम ने संभलने ही संभलने में लगभग 11 ओवर खा लिए. पावरप्ले का इस्तेमाल भी रोहित और विराट, कुलासेकरा, मैथ्यूज़, मलिंगा वाले लाइनअप के आगे नहीं कर पाए. लेकिन फिर भी अभी आखिरी ओवरों का खेल बचा था. उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा थीं क्योंकि अभी युवराज, रैना और धोनी का आना बाकी था.

Rohit 4
रोहित शर्मा. फोटो: AP

हर ओवर के बाद बस यही लग रहा था कि अब रनों की बौछार होने वाली है. लेकिन हर ओवर के बाद मायूसी ही हाथ लगती थी. रोहित आउट हुए और अब मैदान पर उतरे युवराज सिंह. वो युवराज सिंह जिनके बल्ले की रफ्तार से दुनिया का हर गेंदबाज़ डरता था. वो युवराज जिन्होंने 2007 टी20 विश्वकप में छह गेंदों पर छह छक्के लगाए थे. वो युवराज सिंह जो 2011 की जीत के सबसे बड़े सिपाही थे. वो युवराज सिंह जिन्हें खुद उस दिन मैदान पर उतरते नहीं लगा था कि ये उनके 20 सालों के क्रिकेट करियर का सबसे खराब दिन होगा.

जब युवराज मैदान पर आए तो टीम का स्कोर 10.3 ओवरों में 64 रन था. लेकिन इसके बाद युवराज ने अपने करियर की वो पारी खेली, जिसके बाद उन्होंने दो साल के लिए टीम से बाहर होना पड़ गया. युवराज ने टी20 विश्वकप के फाइनल में 19वें ओवर में आउट होने से पहले 21 गेंदों में 11 रन बनाए. उनकी उस धीमी पारी की वजह से ना तो उस मैच में धोनी(पूरी तरह से) और ना ही रैना को खेलने का पूरा मौका मिला. विराट कोहली ने ज़रूर एक छोर पर खेलकर 58 गेंदों में 77 रन बनाए.

टीम इंडिया ने 20 ओवरों में सिर्फ 130 रन बनाए. जो कि फाइनल क्या किसी भी टी20 मैच में नाकाफी था.

भुवनेश्वर कुमार और गेंदबाज़ो की लाख की कोशिश के बावजूद श्रीलंकाई टीम ने इस स्कोर को 17.5 ओवरों में कुमार संगाकारा की मदद से हासिल कर लिया.

इस हार का सबसे बड़ा कारण युवराज की धीमी पारी को बताया गया. वहीं युवराज, जिन्होंने देश को एक नहीं दो-दो विश्वकप जिताए, वो अब देश के निशाने पर थे. खुद युवराज ने भी संन्यास के बाद 2019 में ये बात कही कि उनके क्रिकेट करियर का सबसे खराब दिन 06 अप्रैल 2014 ही था.


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