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जब टीचर ने हार्दिक-कृणाल की कंप्लेंट की तो पापा ने एक जवाब से सबको चुप कर दिया

एक वक्त ऐसा था जब पांड्या ब्रदर्स के पास रणजी ट्रॉफी मैच खेलने के लिए दो अलग-अलग बैट भी नहीं थे. लेकिन फिर उन्हें उनके खेल ने पहचान दिलाई. अब IPL और इंडियन टीम तक हार्दिक और कृणाल पांड्या ने सफर तय कर लिया है. इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच में कृणाल पांड्या ने डेब्यू किया. लेकिन पिता हिमांशु पांड्या इस खास पल को देखने के लिए इस दुनिया में नहीं रहे.

कृणाल और हार्दिक के इस सफर में उनके पिता हिमांशु पांड्या का बहुत बड़ा योगदान रहा है. कृणाल और हार्दिक इसे अक्सर याद करते हैं. पहले वनडे में खास प्रदर्शन के बाद कृणाल ने अपने पिता को लेकर बहुत सारी बातें भी कीं. आज हम भी आपको हिमांशु पांड्या और पांड्या ब्रदर्स के बीच के कुछ दिलचस्प किस्से बताएंगे.

जब टीचर शिकायत करते थे

हार्दिक और कृणाल के पापा हिमांशु पांड्या ने कभी अपने बच्चों पर अपने सपनों का बोझ नहीं डाला. एक इंटरव्यू में दोनों भाइयों ने इस किस्से को शेयर किया था. हिमांशु पांड्या अपने बच्चों को इतना सपोर्ट करते थे कि उनके ना पढ़ने की शिकायत मिलने पर स्कूल लड़ने के लिए पहुंच जाते थे. टीचर्स जब हिमांशु से ये कहते थे कि

‘ये कुछ नहीं कर रहे, इन्हें पढ़ाइये.’

तो कृणाल-हार्दिक के पापा कहते थे,

‘आप लोगों को पता नहीं है कि मेरे बेटे क्या बनेंगे?’

ये हार्दिक और कृणाल के पापा का अपने बच्चों में विश्वास था.

Hardik Krunal
स्कूली दिनों में हार्दिक और कृणाल पांड्या. फोटो: Pandya Twitter

आउट करने पर 100 रुपये

जब कृणाल सिर्फ साढ़े नौ-10 साल के थे, तब उनके पिता कृणाल को कॉलेज के बड़े लडकों के साथ क्रिकेट खिलाने ले जाते थे. इसके लिये दोनों घर से लगभग 50 किलोमीटर दूर जाते थे. हिमांशु पांड्या बाइक की डिक्की में बैट फंसाकर किट बैग को आगे लगाकर कृणाल को लेकर चल देते थे. वहां ले जाकर वो अक्सर उन कॉलेज के लड़कों को बोलते थे कि

‘इसे जो आउट करेगा, उसे मैं 100 रुपये दूंगा.’

लेकिन 10 साल के उस बच्चे को आउट करने में उन कॉलेज के लड़कों के भी पसीने छूट जाते थे. उन लड़कों के खिलाफ कृणाल लगभग डेढ़ घंटा बैटिंग करते. कोई उन्हें बमुश्किल ही आउट कर पाता था.

बेटे के लिए बड़ौदा शिफ्ट हुए

जब कृणाल सिर्फ छह साल के थे, उस वक्त सूरत में अपने पिता के साथ बल्ला लेकर खेला करते थे. तब हिमांशु पांड्या को लगा कि इसके गेम में कुछ अलग है. उस वक्त हिमांशु, कृणाल को रानदेड़ जिमखाना में प्रैक्टिस करवाने ले जाते थे. एक दिन वहां एक खास मैच था. उसे देखने के लिए किरन मोरे के मैनेजर मिस्टर बरार आए. उन्होंने कृणाल को बैटिंग करते देखा. कहा,

‘आप इसको बड़ौदा लेकर आइये, इसका फ्यूचर अच्छा है.’

लेकिन सिर्फ छह साल के बच्चे के लिए हिमांशु का सूरत में अपना जमा-जमाया बिज़नेस छोड़ना आसान काम नहीं था. लेकिन हिमांशु ने ये काम किया. 15-20 दिन बाद ही परिवार के साथ बड़ौदा शिफ्ट हो गए.

Himanshu Pandya
हिमांशु पांड्या. फोटो: Krunal-Hardik Twitter

भीड़ से बच्चों को आवाज लगाते

जब कृणाल और हार्दिक के दिन बदले, और वो स्टार बने तो उनके पिता ने उनकी कामयाबी पर गर्व महसूस किया. निधन से पहले हर साल हिमांशु पांड्या कम से कम दो-तीन IPL मैच देखने मैदान पर ज़रूर जाते थे. मुंबई की टीम ट्राइडेंट होटल में ठहरती थी. बाहर वाले एरिया में बहुत ज़्यादा भीड़ होती थी. खासकर छह-सवा छह के टाइम पर, जब टीम को बाहर जाना होता था. उस वक्त वहां बहुत ज़्यादा भीड़ जमा हो जाती थी. ऐसे में हिमांशु उस भीड़ में जाकर खड़े हो जाते, और अपने बच्चों को भीड़ के बीच से आवाज़ लगाते-

‘हे कृणाल.. कृणाल… हार्दिक…. हार्दिक.’

और फिर जब कृणाल या हार्दिक उन्हें देखकर उनसे मिलने के लिए जाते, तो वो लोगों को बताते कि ये मेरे बेटे हैं.

इसके बाद वो बहुत ज़्यादा खुश होते थे.


इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में कृणाल के डेब्यू के बाद हार्दिक पांड्या ने पापा को क्या लिखा?

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