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जब एक अंग्रेज़ ने चेन्नई में मनाया पोंगल और गावस्कर की टीम को रौंद डाला

पोंगल. साउथ इंडिया का बड़ा त्यौहार. चार दिन तक तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में इसे खूब धूमधाम से मनाया जाता है. मुख्यतः तमिल हिंदुओं के इस त्यौहार को पूरी दुनिया में मौजूद तमिल हिंदू मनाते हैं. आज से कई साल पहले एक अंग्रेज ने चेन्नई में बेहद जोरदार तरीके से पोंगल मनाया था. और उसका पोंगल मनाना भारतीय क्रिकेट टीम पर काफी भारी पड़ा. कौन था वो अंग्रेज और क्या है ये पूरा किस्सा?

साल था 1985. इंग्लैंड की टीम इंडिया टूर पर आई थी. सीरीज के टेस्ट और वनडे मुकाबले साथ-साथ खेले जा रहे थे. पहला टेस्ट भारत ने आठ विकेट से जीता. पहला वनडे इंग्लैंड ने चार विकेट से. दूसरा टेस्ट आठ विकेट से जीतने वाले इंग्लैंड ने दूसरा वनडे भी एक रन से जीत लिया. सीरीज का तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा. इस टेस्ट में इंडियन टीम ने बेहद स्लो बैटिंग की.

दुनिया ने इसी टेस्ट से मोहम्मद अज़हरुद्दीन को पहली बार देखा. अपने डेब्यू टेस्ट में अज़हर ने 110 रन बनाए, 322 गेंदों में. टीम ने कुल 200 ओवर्स बैटिंग करने के बाद 437-7 के टोटल पर पारी घोषित की. इंग्लैंड 100 ओवर्स की बैटिंग के बाद 276 रन ही बना पाया. भारत ने अपनी दूसरी पारी में 18 ओवर खेलकर एक विकेट के नुकसान पर 29 रन बनाए. मैच खत्म हो गया.

# भारत की ग़लती

सीरीज 1-1 से बराबर थी. तीसरे टेस्ट के बाद इंग्लैंड ने एक प्रैक्टिस मैच खेला. यहां साउथ जोन ने उन्हें कड़ी टक्कर दी. चेन्नई में होने वाले तीसरे टेस्ट के साथ ही राज्य का सबसे बड़ा त्यौहार पोंगल भी शुरू हो रहा था. भारतीय टीम ने सोचा कि चार दिन चलने वाले पोंगल के साथ ही इस टेस्ट को भी खत्म कर दिया जाए. 13 जनवरी 1985 को टेस्ट शुरू हुआ. पोंगल अगले दिन था. भारत ने टॉस जीता और पहले बैटिंग का फैसला किया.

इंग्लैंड ने छह फुट चार इंच लंबे नील फोस्टर को पहली बार टीम में शामिल किया था. कुल छह टेस्ट का अनुभव रखने वाले 23 साल के फोस्टर का यह भारत में पहला टेस्ट मैच था. अब तक उनके नाम छह टेस्ट मैचों में 12 विकेट थे. गावस्कर के सामने उन्हें नई बॉल थमा दी गई. पॉल अलॉट और रिचर्ड एलिसन की चोट के चलते टीम में आए फोस्टर के लिए यह कड़ी परीक्षा का वक्त था. गावस्कर ने उनके पहले ही ओवर में 10 रन मार दिए. कैप्टन गावस्कर के यह तेवर देख इंग्लैंड सहम गया. चेपॉक की उछाल भरी पिच पर गावस्कर मानो पिछले मैच का हिसाब बराबर करने उतरे थे..

लेकिन फोस्टर नहीं डरे. पिछली तीन टेस्ट पारियों में विकेट लेने में नाकाम रहे फोस्टर को हर हाल में विकेट चाहिए थे. उन्होंने प्रयास जारी रखे. जल्दी ही गावस्कर गली में लपके गए. लेकिन अंपायर ने उन्हें आउट नहीं दिया. फोस्टर को गुस्सा आया और अपने तीसरे ओवर में उन्होंने गावस्कर को बोल्ड कर अपना बदला पूरा किया. फोस्टर ने बाद में क्रिकेट मंथली के साथ एक इंटरव्यू में कहा,

‘इसके बाद इंडिया ने और आक्रामक खेलना शुरू कर दिया. गायकवाड़ की जगह आए श्रीकांत खाता भी नहीं खोल पाए. दिलीप वेंगसरकर भी जल्दी निपट गए.’

अज़हर और मोहिंदर अमरनाथ ने भारत की पारी संभालने की कोशिश की. लेकिन लंच के बाद फोस्टर ने अमरनाथ को भी समेट दिया. अंत में टीम इंडिया 68वें ओवर में 272 के टोटल पर ऑलआउट हो गई. फोस्टर ने 104 रन देकर छह विकेट लिए. फोस्टर ने इस बारे में कहा था,

‘विकेट हरा था. मैंने अच्छी बोलिंग की. बॉल स्विंग कर रही थी. एक बार रिदम पकड़ने के बाद मैंने सही एरिया में बॉल फेंक इंडियन बल्लेबाजों को खूब टेस्ट किया. उस दिन उन्होंने जरा भी धैर्य नहीं दिखाया.’

# गगरी फैल गई

पोंगल के दिनों में तमिलनाडु में एक वाक्य सबसे ज्यादा बोला जाता है,

‘तुम्हारी गगरी उफन गई क्या?’

इंग्लैंड की गगरी तो पोंगल (पकवान) बनाने भर की अच्छे से उफन गई थी. लेकिन भारत की गगरी का पूरा माल बहकर बर्बाद हो चुका था. बैटिंग ढहने का मातम चल ही रहा था कि विकेट के पीछे सैयद किरमानी ने ग्रीम फॉलर का कैच भी टपका दिया. दिन का खेल खत्म होने पर फॉलर और टिम रॉबिनसन नॉटआउट लौटे.

किरमानी की एक ग़लती की कीमत भारत ने 200 रन देकर चुकाई. इंग्लैंड ने सात विकेट पर 652 रन बना डाले. फॉलर और माइक गेटिंग दोनों ने डबल सेंचुरी मारी. 380 रन से पिछड़े भारत को हार से बचने के लिए साढ़े 10 घंटे बैटिंग करनी थी. इन साढ़े 10 घंटों में उन्हें फोस्टर का सामना भी करना था.

फोस्टर, जो इंग्लैंड की बैटिंग के दौरान नर्वस होकर स्टेडियम की छत पर चढ़ गए थे. काफी देर तक वहां शर्टलेस बैठे फोस्टर सेकेंड इनिंग में और खतरनाक होकर लौटे. उन्होंने अपने तीन ओवर के स्पेल में सिर्फ पांच रन देकर तीन विकेट निकाल दिए. सिर्फ 22 के टोटल पर गावस्कर, श्रीकांत और वेंगसरकर वापस जा चुके थे. यहां से अमरनाथ ने 95 और अज़हर ने 105 रन बनाए. कपिल देव ने भी 49 रन जोड़े और सैयद किरमानी ने 75 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली. लेकिन असली मोर्चा तो वक्त काटने का था. वो नहीं हो पाया. टीम 412 के टोटल पर सिमट गई. फोस्टर ने इस पारी में पांच विकेट लिए. मैच में कुल 11. इंग्लैंड ने सिर्फ फॉलर का विकेट खोकर टेस्ट जीत लिया.

मैच में कुल 11 विकेट लेने वाले फॉलर का यह बेस्ट प्रदर्शन था. मैच के बाद टीम होटल में जश्न हुआ. सब मौज कर रहे थे लेकिन फोस्टर बेचैनी में पूरे होटल के चक्कर काट रहे थे. ऐसा क्यों? दरअसल मैनेजर ने फॉलर और गेटिंग के कमरों में एक-एक चॉकलेट केक और एक-एक शैम्पेन रखवाई थी. लेकिन फोस्टर के कमरे में ऐसा कुछ नहीं था. अब टेस्ट में 10 विकेट लेने वाले बोलर को उम्मीद तो रहती ही है कि कुछ स्पेशल मिलेगा. फॉलर और गेटिंग के कमरे देख फोस्टर की उम्मीद और बढ़ गई. फॉलर ने वो जश्न याद करते हुए ESPN से कहा था,

‘वह पूरे होटल के चक्कर काट रहा था. उसे लगा कि किसी ने उसका केक चुरा लिया. मैंने उसे अपने केक का एक बड़ा हिस्सा ऑफर किया लेकिन उसने नहीं लिया. फोस्टर ने कहा- मुझे मेरा केक चाहिए.’

बाद में फोस्टर ने इस किस्से का अपना वर्जन बताया था. उन्होंने कहा था कि फॉलर और गेटिंग को शैम्पेन की बोतलें मिली थीं जबकि उन्हें चॉकलेट केक मिला था. और इस केक की चॉकलेट भी असली नहीं थी.

फोस्टर कमाल के बोलर थे. लेकिन अपने करियर का ज्यादातर हिस्सा उन्होंने चोटों से जूझते हुए बिताया. उनकी पीठ और घुटने में इतनी बार चोट लगी कि उनका टेस्ट करियर सिर्फ 29 मैच तक ही चला. एक बार तो किसी एयरपोर्ट पर उनके क्रॉस करते वक्त मेटल डिटेक्टर से बड़े जोर की आवाज आई. हैरान ऑफिसर्स ने उनकी अच्छे से तलाशी ली. दोबारा उन्हें मेडल डिटेक्टर से निकाला और इस बार भी डिटेक्टर चीख पड़ा. बाद में पता चला कि यह उनके शरीर में पड़ी मेटल प्लेट्स के चलते था.

फोस्टर के घुटने के कुल नौ ऑपरेशन हुए. बाद में चोटों के चलते उन्होंने 1993 में रिटायरमेंट ले ली. अपने 13 साल के फर्स्ट क्लास करियर में फोस्टर ने 908 विकेट्स लिए थे.

# ट्रिविया

# इस टूर के लिए इंग्लैंड की टीम के भारत पहुंचते ही पीएम इंदिरा गांधी की हत्या हो गई थी.

# कई दिन तक दिल्ली में फंसे रहने के बाद इंग्लिश टीम को श्रीलंका भेज दिया गया. वहां उन्होंने प्रैक्टिस की. फिर वापस आए.

# मुंबई में हुए पहले टेस्ट के शुरू होने से ठीक पहले मुंबई में ही ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर पर्सी नॉरिस की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

# 27 तारीख को मरे पर्सी नॉरिस ने 26 की रात ही इंग्लैंड की टीम को शानदार दावत दी थी. वह एक महीने पहले ही भारत आए थे.

# इस टूर के साथ ही फॉलर का टेस्ट करियर भी खत्म हो गया. कानपुर टेस्ट उनके करियर का आखिरी टेस्ट रहा.

# फोस्टर शुरुआत में अच्छे फुटबॉलर थे. उन्होंने इप्सविच टाउन फुटबॉल क्लब के लिए ट्रायल भी दिया था.

# नील फोस्टर ने अपना काउंटी डेब्यू उधार की किट में किया था.

# नील फोस्टर विव रिचर्ड्स और जावेद मियांदाद, दोनों को शून्य पर आउट करने वाले इकलौते बोलर हैं.

# नील फोस्टर के पिता एलेन फोस्टर क्लब क्रिकेट के दिग्गज थे. उनके फैंस उन्हें उस क्लब का जिऑफ्री बॉयकॉट कहते थे.


वसीम अकरम ने विवियन रिचर्ड्स को किस मैच के दौरान बहुत परेशान किया था?

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