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कहानी इमरान हाशमी की, जिनकी फिल्म देखने के लिए पाकिस्तान के थिएटर्स में भगदड़ मच गई

फिल्मी बैकग्राउंड से आना वाला एक ऐसा लड़का, जिसे उसकी पहली फिल्म से निकाल बाहर कर दिया गया. मगर इस घटना के 6 साल बाद इंडिया के इस हीरो की पिक्चर देखने के लिए पाकिस्तान के सिनेमाघरों में भगदड़ मच गई. इंडिया में इन्हें ‘सीरियल किसर’ का टैग मिला, जो समय के साथ बदलकर ‘सीरियस एक्टर’ में तब्दील हो गया. हम बात कर रहे हैं इमरान हाशमी की. आज किस्सों की मदद से हम इमरान हाशमी की पूरी कहानी जानेंगे.

इमरान हाशमी और महेश भट्ट का क्या संबंध है?

इमरान हाशमी से जुड़ा ये सबसे ज़रूरी सवाल है. क्योंकि जब भी आप इमरान और भट्ट कैंप का कनेक्शन समझने निकलते हैं, तो आपका सामना कई टहनियों वाली भट्ट फैमिली ट्री से होता है. महेश भट्ट की मां यानी शिरीन मोहम्मद अली और इमरान हाशमी की दादी मेहरबानो मोहम्मद अली सगी बहनें थीं. मेहरबानो का स्टेज नेम पूर्णिमा दास वर्मा है. पूर्णिमा हिंदी फिल्म एक्ट्रेस रह चुकी हैं. उन्होंने 40 और 50 के दशक में 100 से ज़्यादा फिल्मों में कैरेक्टर रोल्स किए. यानी इमरान हाशमी, महेश भट्ट के भांजे लगते हैं. इस नाते वो पूजा और आलिया भट्ट के सेकंड कज़िन हुए. क्लीयर है?

इमरान का जन्म 24 मार्च, 1979 को बॉम्बे में हुआ था. उनके पिता सय्यद अनवर हाशमी एयर इंडिया के कार्गो डिविज़न में काम करते थे. इमरान की मां एक मल्टी-नेशनल कंपनी में काम करती थीं. इमरान की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई जमनाबाई नारसी स्कूल में हुई. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सिंडहैम कॉलेज जॉइन किया. मगर पढ़ने में उनकी कुछ खास रुचि नहीं थी. अपने तमाम इंटरव्यूज़ में इमरान बताते हैं कि वो कॉलेज के नाम पर अपने दोस्तों के साथ यहां-वहां घूमते रहते थे. उनके घर के पास एक नुक्कड़ था, जहां बनी दुकान इमरान और उनके दोस्तों को अड्डा हुआ करती थी. फिल्म फैमिली से ताल्लुक रखने वाले इमरान कभी फिल्मों में काम नहीं करना चाहते थे. मगर नुक्कड़ वाली दुकान पर खड़े रहने की वजह से उन्हें फिल्मों में आना पड़ा.

अपने मेंटॉर और मामा महेश भट्ट के साथ इमरान हाशमी.
अपने मेंटॉर और मामा महेश भट्ट के साथ इमरान हाशमी.

फिल्मों में कैसे आए इमरान हाशमी?

महेश भट्ट के भाई और प्रोड्यूसर मुकेश भट्ट इमरान की दादी से मिलने उनके घर आते-जाते रहते थे. प्रोडक्शन कंपनी विशेष फिल्म्स में पैसे-रुपए से जुड़ा सारा काम मुकेश हैंडल करते हैं. बहरहाल, मुकेश ने इमरान को उस नुक्कड़ पर दोस्तों के साथ लफंगई करते हुए कई बार पकड़ा था. एक दिन वो इमरान के घर आए और उनकी दादी से कहा-

”ये क्या खड़ा रहता है आपके नुक्कड़ पे? उसे मेरे पास भेजिए”.

पूर्णिमा फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रह चुकी थीं. इसलिए उन्हें लगता था कि इमरान फिल्मों में कुछ नहीं कर पाएंगे. क्योंकि वो हीरो जैसे नहीं दिखते. ना ही उन्हें नाचना आता है. बावजूद इसके उन्होंने इमरान को मुकेश भट्ट के घर भेजा. मुकेश ने इमरान को लंबा-चौड़ा लेक्चर दिया और काम पर लगा दिया. विक्रम भट्ट ‘राज़’ फिल्म बना रहे थे. इमरान इस फिल्म में विक्रम के असिस्टेंट डायरेक्टर थे. साथ ही उन्होंने एक्टिंग क्लास लेनी भी शुरू कर दी. मगर कोर्स पूरा होने से पहले उन्हें ‘ये ज़िंदगी का सफर’ नाम की फिल्म ऑफर हुई. विशेष फिल्म्स के प्रोडक्शन में बन रही इस फिल्म को तनुजा चंद्रा डायरेक्ट कर रही थीं. इमरान ने कुछ दिन इस फिल्म पर काम किया. मगर बुरी एक्टिंग और खराब ऐटिट्यूड की वजह से उन्हें उस फिल्म से बाहर कर दिया गया. बाद में इमरान की जगह उस फिल्म में जिमी शेरगिल को ले लिया गया. ये चीज़ इमरान का इगो हर्ट कर गई. अब वो सबकुछ छोड़कर सिर्फ एक्टिंग करना चाहते थे. वो रेगुलर फिल्मों के सेट पर जाने लगे. ये समझने के लिए अच्छा एक्टर बनने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है. पिछले अनुभव से सबक लेते हुए इमरान अब सीन्सीयर हो गए थे. ये चीज़ महेश और मुकेश भट्ट ने नोटिस की. बदले हुए इमरान को लीड रोल में लेकर उन्होंने एक फिल्म प्लैन की. इस फिल्म का नाम था ‘फुटपाथ’.

‘फुटपाथ’ की शूटिंग शुरू हुई. जब इमरान कैमरे के सामने पहुंचे, तो नर्वस हो गए. अपने करियर का पहला सीन शूट करने में इमरान को 40 बार रीटेक देना पड़ा. ‘फुटपाथ’ बनकर तैयार हो गई. बस डबिंग समेत फिल्म पर कुछ छोटे-मोटे काम बचे थे. जब कोई पिक्चर शूट होती है, तब सब एक्टर्स अपने डायलॉग्स बोलते हैं. मगर फिल्म में एक्टर्स की उस आवाज़ को इस्तेमाल नहीं किया जाता. जब फिल्म बनकर तैयार हो जाती है, तब एक साउंड प्रूफ कमरे में एक्टर्स सामने फिल्म देखते हुए दोबारा से अपने डायलॉग्स रिकॉर्ड करते हैं. ताकि फिल्म देखने वाली जनता को डायलॉग्स क्लीयर सुनाई दें. इस प्रक्रिया को डबिंग कहते हैं. खैर, इमरान हाशमी अपनी डेब्यू फिल्म की डबिंग करने पहुंचे. इमरान नए थे, इसलिए एक असिस्टेंट ने उन्हें समझाते हुए कहा- ‘बच्चन की तरह डब करो’. मगर असिस्टेंट की ये सलाह इमरान के गले नहीं उतरी. वो उसके साथ गाली-गलौज करके वहां से निकल गए. फाइनली ‘फुटपाथ’ में इमरान की आवाज़ डायरेक्टर विक्रम भट्ट को डब करनी पड़ी.

फिल्म 'फुटपाथ' के एक सीन में इमरान हाशमी. अपने करियर का पहला सीन शूट करने में इमरान को 40 रीटेक्स देने पड़े.
फिल्म ‘फुटपाथ’ के एक सीन में इमरान हाशमी. अपने करियर का पहला सीन शूट करने में इमरान को 40 रीटेक्स देने पड़े.

‘मर्डर’ करके रातों-रात स्टार बन गए इमरान हाशमी

इमरान हाशमी की पहली फिल्म ‘फुटपाथ’ बहुत बड़ी हिट तो नहीं रही. मगर फिल्म ने अपनी लागत वसूल ली थी. इमरान के करियर की दूसरी फिल्म थी ‘मर्डर’. मल्लिका और इमरान के बीच फिल्माए गए किसिंग सीन्स इस फिल्म की हाइलाइट रहे. उसी फिल्म का गाना था- ‘भीगे होठ तेरे’. ‘मर्डर’ 2004 की सबसे बड़ी हिट मानी गई. इसी फिल्म के बाद इमरान को ‘सीरियल किसर’ कहा जाने लगा. इमरान ने आगे जो भी फिल्में की, वो कहीं न कहीं इसी टैग को चरितार्थ करने वाली रहीं. इस कड़ी में इमरान ने ‘ज़हर’, ‘आशिक़ बनाया आपने’, ‘अक्सर’ और ‘गैंगस्टर’ जैसी फिल्मों में काम किया. ये फिल्में बढ़िया बॉक्स ऑफिस रिटर्न दे रही थीं मगर एक एक्टर के तौर पर इमरान कुछ नया, कुछ अलग करना चाहते थे. 2007 में एक फिल्म रिलीज़ हुई, जिसका नाम था- ‘आवारापन’. ये एक ट्रैजिक लव स्टोरी थी. फिल्म के गाने ऐसे बवाल कि सुनकर सिंगल लड़कों के भी दिल टूट गए. मगर इसे परफॉरमेंस वाइज़ इमरान हाशमी के करियर की सबसे अच्छी फिल्मों में गिना गया. 2008 में आई ‘जन्नत’ ने इमरान को टॉप स्टार्स की लीग में लाकर खड़ा कर दिया. मैच फिक्सिंग पर बेस्ड इस फिल्म में इमरान ने एक बुकी का रोल किया था. इस फिल्म के प्रपोज़ल सीन का सेपरेट फैनबेस है. जब ये फिल्म पाकिस्तान में रिलीज़ हुई, तब लाहौर के एक सिनेमाघर में इसे देखने के लिए भगदड़ मच गई.

फिल्म 'जन्नत' के प्रपोज़ल सीन में इमरान हाशमी और सोनल चौहान.
फिल्म ‘जन्नत’ के प्रपोज़ल सीन में इमरान हाशमी और सोनल चौहान.

अपने करियर के शुरुआती दौर में इमरान अधिकतर भट्ट कैंप के साथ ही काम करते थे. मगर धीरे-धीरे उन्हें लगने लगा कि वो इस तरह की फिल्मों में अपने टैलेंट के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. 2009 में इमरान को अजय देवगन के साथ ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ नाम की फिल्म ऑफर हुई. महेश भट्ट अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं-

‘मैंने इमरान को सलाह दी थी कि करियर के इस स्टेज पर दाऊद इब्राहिम का रोल करना काफी खतरनाक हो सकता है. क्योंकि मैं इमरान को लेकर प्रोटेक्टिव था. मुझे लग रहा था कि इंडिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी का रोल करना इमरान के लिए सही नहीं रहेगा. मेरा ये मानना गलत था. मगर मैं इमरान के हिम्मत की दाद देता हूं कि उसने मुझे मना करके ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ में वो रोल किया.”

बताया जाता है कि जब इमरान ने विशेष फिल्म्स के अलावा दूसरी प्रोडक्शन कंपनियों के साथ काम करना शुरू किया, तो ये चीज़ भट्ट भाइयों को खल गई. उन्होंने इमरान हाशमी के साथ काम करना बंद कर दिया. इस बारे में उनसे पूछा जाता, तो वो एक ही जवाब देते. कि भट्ट कैंप किसी स्टार के साथ काम नहीं करता. इमरान अब स्टार हैं, वो जो चाहें, जिसकी चाहें, उसकी फिल्म करें. ये बात सही है कि भट्ट कैंप ने साल 2000 के बाद किसी भी स्टार या सुपरस्टार के साथ काम नहीं किया. इसके पीछे की वजह थी स्टार्स की फीस, उनके नखरे और क्रिएटिव लेवल पर उनका हस्तक्षेप. हालांकि इमरान ने इस बारे में कभी अपना मुंह नहीं खोला. समय के साथ महेश और मुकेश भट्ट के साथ इमरान के संबंध ठीक हो गए.

इमरान को लॉन्च करने और उनका करियर बनाने का क्रेडिट उनके मामा महेश और मुकेश भट्ट को जाता है.
इमरान को लॉन्च करने और उनका करियर बनाने का क्रेडिट उनके मामा महेश और मुकेश भट्ट को जाता है.

जब इमरान के चार साल के बेटे को कैंसर हो गया

इमरान हाशमी फिल्मों में आने से पहले रिलेशनशिप में थे. 6 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद 14 दिसंबर, 2006 को उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड परवीन शहानी से शादी कर ली. उनसे लगातार पूछा जाता रहा है कि उनकी फिल्मों के बारे में उनकी पत्नी का क्या सोचना है. इस सवाल के जवाब में इमरान एक किस्सा सुनाते हैं. वो बताते हैं कि उन्होंने आज तक अपनी सिर्फ एक फिल्म परवीन के साथ देखी है. 2004 में आई ‘मर्डर’ की स्क्रीनिंग के दौरान वो अपनी पत्नी के साथ बैठे थे. फिल्म में जितनी भी जगह उनका किसिंग सीन आता, उनकी पत्नी उन्हें कस के नाखून गड़ाती. जब वो स्क्रीनिंग से बाहर निकले, तब तक उनके हाथ पर कई जगह नाखून से कटने के निशान बन चुके थे. मगर धीरे-धीरे परवीन समझ गईं कि जो इमरान स्क्रीन पर कर रहे हैं, वो एक्टिंग हैं.

अपनी पत्नी परवीन शहानी के साथ इमरान हाशमी.
अपनी पत्नी परवीन शहानी के साथ इमरान हाशमी.

2010 में इमरान और परवीन को एक बेटा पैदा हुआ. नाम रखा गया अयान. जब अयान चार साल के थे, तब उन्हें कैंसर डिटेक्ट हुआ. ये रेयर किस्म का किडनी कैंसर था. इमरान बताते हैं कि वो उनके लाइफ का सबसे मुश्किल वक्त था. अयान सुपरहीरोज़ के फैन हैं. इसलिए इमरान उन्हें फोन करके बैटमैन की आवाज़ में बात करते. अयान समझते कि उन्हें वाकई बैटमैन का फोन आया है. जब ये सबकुछ चल रहा था, तब इमरान की मुलाकात मशहूर पत्रकार और राइटर एस. हुसैन ज़ैदी से हुई. हुसैन ने इमरान को सलाह दी कि उन्हें उस वक्त जो भी महसूस हो रहा है या उनके बेटे के साथ जो कुछ भी हो रहा है, उस पर उन्हें एक किताब लिखनी चाहिए. इससे दूसरे कैंसर पेशेंट्स को बहुत मदद मिलेगी. इमरान ने हुसैन ज़ैदी की सलाह मान ली. 2016 में उन्होंने ‘किस ऑफ लाइफ’ नाम की एक किताब लॉन्च की. इसमें उन्होंने वो सब कुछ दर्ज किया, जिससे उनका बेटा और वो गुज़रे. पांच साल तक कैनडा में चले इलाज के बाद 2019 में अयान का कैंसर ठीक हो गया.

अपने बेटे अयान के साथ इमरान.
अपने बेटे अयान के साथ इमरान.

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अगर वर्क फ्रंट की बात करें, तो इमरान हाशमी लंबे समय से एक हिट फिल्म की तलाश में हैं. उन्होंने पिछले कुछ समय में अपनी सीरियल किसर वाली इमेज से इतर प्रयोगधर्मी काम किया. हालांकि इसमें उन्हें टिकट खिड़की पर सफलता तो नहीं मिली. मगर सैटिसफैक्शन भरपूर मिला. अगर नाम लेने पर आएं, तो इस लिस्ट में दिबाकर बैनर्जी की ‘शांघाई’, ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर डैनिस टैनोविक की ‘टाइगर्स’ और इंडियन एजुकेशन सिस्टम में फैले करप्शन पर बात करने वाली ‘व्हाई चीट इंडिया’ जैसी फिल्में शामिल हैं. अगले कुछ दिनों में वो अमिताभ बच्चन के साथ ‘चेहरे’, हॉरर फिल्म ‘एज़रा’ और सलमान खान के साथ ‘टाइगर 3’ जैसी फिल्मों में नज़र आने वाले हैं.


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