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ट्विटर पर 90's की ऐसी-ऐसी चीज़ें शेयर हो रही हैं कि कोई मुस्कुरा रहा है, किसी की आंखें नम हैं

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बस्ता उठा ही लिया था, दफ्तर से निकलने वाला था. लेकिन बॉस ने कहा “ट्विटर देखो क्या शानदार हैश टैग ट्रेंड कर रहा है” मैं रुक गया. लैपटॉप खोल कर देखा, तो बस लगातार देखता ही रह गया. ऐसा हो भी क्यों न 90 की पैदाइश जो थी हमारी.

ट्विटर पर #90sKidsRumors का हैश टैग ट्रेंड कर रहा था. लोग इस हैश टैग के साथ खूब पुरानी तस्वीरें और बातें शेयर कर रहे थे. तस्वीरों को देखने के बाद मैंने भी अपना बस्ता मैंने साइड में रखा और आपके लिए लिखना शुरू कर दिया. अब मान के चलिए आप 90’s के हैं, और इस हैश टैग के साथ अपलोड हो रही दिलचस्प तस्वीरें नहीं देख पाए. तो हमारा तो फर्ज बनता है आपको ये तस्वीरें दिखाना.

ये रबर और कटर का कॉम्बो, इश्श… क्या दिख गया यार. तीसरी क्लास में थे जब 5 रुपया देकर इसे गर्लफ्रेंड के लिए खरीदे थे. अब वो इसे ले तो ली थी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई. खैर हम आगे बढ़ जाते हैं.

शाकालाका बूम बूम, शाकालाका बूम बूम, नाम है संजू, मेरा सीक्रेट है मैजिक पैंसिल, जो भी बनाऊ झट बन जाए… ओहहह पूरा याद है मुझे, घर वालों को बोलता था, मम्मी मेरा नाम संजू क्यों नहीं रखा आप लोगों ने. फिर मेरे पास भी पेंसिल होती और जो बनाता वो सामने होता.

ये मोर पंख. चौथी क्लास में जब कंप्यूटर का पेपर था. उस वक्त सबसे ज्यादा What is computer वाले सवाल से डर लगता था. मुझे ही नहीं लगभग पूरी क्लास के बच्चे इस सवाल से दूर भागते थे. उस वक्त इस मोर पंख का बड़ा सहारा मिलता था. लोग कहते थे कि इसे कॉपी के बीच में रखने से जो भी लिखो उसे पढो वो याद हो जाता है. इंसान भूलता नहीं है. मैंने भी ऐसा किया था, और क्लास में पास होने के बाद यकीन मानिए मोर पंख को किस भी किया था.

बहुत मार पड़ती थी मम्मी से. जितनी भी पेंसिल मिलती थी सबको कुछ इसी तरीके चबा-चबा कर घर तक पहुंचाता था. फिर चौथी क्लास में पेंसिल की जगह कलम ने ली फिर एहसास हुआ कि बचपन ने एक कदम आगे की तरफ बढ़ा दिया है.

यकीन मानिए इसे देखने के बाद में 2 मिनट तक हंसा हूं. बचपन में ऐसा शायद ही होता था जब 2 बल्ले के साथ क्रिकेट ग्राउंड पर मैच होता था. उस वक्त जिसके पास बैट था वो राजा था. मैच के बाद 2 रुपये का समोसा भी खाता था घूस में. अब उस वक्त नॉन स्ट्राइकर एंड पर इसी तरह के जुगाड़ का सहारा होता था. कई बार तो ऐसे जुगाड़ के चक्कर में रन आउट भी होते थे और बेमानी भी करते थे.

क्या करके मानेंगे लोग? रात में मम्मी दूध देती थी ग्लास में पीने के लिए. दिन भर पेंसिल का छीला जमा करता था. कई बार तो पूरी की पूरी पेंसिल ही खत्म करता था ताकि उसके छिलके में दूध मिलाकर अगले दिन रबर बना सकूं. रबर तो नहीं बनता था लेकिन मम्मी से डांट ज़रूर पड़ती थी. हालांकि हम ढीठ थे, हार तब भी नहीं मानते थे.

गाड़ी की नहीं खुशियों की चाभी हुआ करती थी ये. पिताजी ने गिफ्ट दी थी गाड़ी, जो इसी चाभी से चलती थी. याद है मुझे गुम होने पर पूरा घर सिर पर उठा लिया था. फिर मिलने पर इतनी खुशी हुई थी, इतनी खुशी हुई थी, इतनी खुशी हुई थी, क्या बताए कितनी खुशी हुई थी.

क्या बताए संजू वाली पेंसिल पाने के लिए ये वाला भी टेक्निक अपनाए थे. दीदी की जब दांत टूटी थी, फिर उसे मिट्टी में गाड़ने की जगह तकिया के नीचे छिपाए थे, भगवान से मनाए थे ‘हे भगवान कुछ नहीं बस संजू वाली पेंसिल दिला दो’

अब लिखना खत्म ही कर रहा था, लेकिन शक्तिमान दिख गया, बिना इसके जिक्र के बचपन की कहानी पूरी नहीं होती. प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था, लेकिन शनिवार के दिन परीक्षा से भाग गया था, क्योंकि शक्तिमान तमराज किलविस को मारने वाला था. वो एपिसोड मिस नहीं करना चाहता था.

बन्दे ने सही कैप्शन डाला है. उस वक्त एक दोस्त था मेरा उसके पास यही गेम था. 1 रुपये लेता था मेरे से आधे घंटे के लिए. तब जाकर खेलने देता था. उस वक्त का आईफोन था ये.

सनथ जयसूर्या याद है आपको? श्रीलंका के धांसू बल्लेबाज़ थे. 1996 में जब श्रीलंका विश्वकप जीती थी तब जयसूर्या मैन ऑफ द सीरीज बने थे. उस वक्त वो इतने फॉर्म में थे कि ज़रा सा बल्ला लगाते थे और गेंद सीमा रेखा के पार. विश्वकप के बाद खूब हल्ला हुआ कि उनके बैट स्टील में स्टील लगी हुई है, किसी ने हल्ला उड़ाया कि बल्ले में स्प्रिंग भी लगी था. अब स्प्रिंग की बात हुई फिर रिकी पॉन्टिंग याद आ गए. 2003 के विश्वकप का फाइनल याद है आपको. रिकी पॉन्टिंग दुश्मन था अपुन का. फाइनल में टीम इंडिया गई थी, लेकिन पॉन्टिंग ने इतने छक्के मारे थे इतने छक्के मारे थे, कि टीम इंडिया की हालत खराब हो गई थी. साढ़े तीन सौ से ऊपर रन बने थे. भारत हार गई थी. उस वक्त तो ऐसा लगा था कि बस पॉन्टिंग मिल जाए. उसके बैट को तोड़ दूंगा. दोस्तों के बीच कहता था ‘यार पॉन्टिंग के स्प्रिंग वाले बैट ने वर्ल्ड कप हरवा दिया’.

90’s के दौर में अंडरटेकर का भी गजब का भोकाल था. हम सोचते थे कि WWE में असली वाली लड़ाई होती है. कई बार अंडरटेकर मरे और फिर अगले फाइट में सामने आ जाते थे. सब कहते थे कि अंडरटेकर को 7 ज़िंदगी का वरदान मिला था. कसम से सोचते थे कि हमें भी 7 ज़िंदगी मिल जाती तो मज़ा आ जाता.

तरबूज़ और खरबूज़ खाते ज़रूर खाते होंगे, हम भी खाते थे. घर वाले बोलते थे उसका बीया (बिहार में बीज़ को बीया कहते हैं) फेंक देना, नहीं तो पेट में ही पेड़ निकल आएगा. घबरा-घबरा कर तरबूज़ खाते थे, और अगर गलती से भी एक बीज़ पेट में चला जाता था, उल्टी कर-कर के बाहर निकलता था. नहीं निकलने पर कई दिन परेशानी होती थी कि कहीं पेट में पेड़ न निकल जाए.

बस एक आखिरी बात, हम सभी को उस दौर में लगता था कि 31 दिसंबर 1999 के बाद जो 2000 साल आएगा, उस वक्त सब खत्म हो जाएगा. आपस में खूब बातें होती थी, कि जो भी करना है फटाफट करलो, 2000 साल आते ही सब खत्म हो जाएगा. कितनी बेचैनी होती थी उस वक्त. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. हम आज 2019 में चुके हैं.

बाकी स्मॉल वंडर, मिस्टर बीन, आहट, मारियो और न जाने कितनी चीज़ें हैं जिनके साथ कितनी यादें जुड़ी हैं. जो पीछे छूट गई, और छूट गया पीछे अपना बचपन. बस आज ये ट्रेंड दिखा तो सोचा कि आप लोगों तक भी ये ज़रूर पहुंचे. पहुंचा दिए हैं, थैक्यू मत बोलियेगा.

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