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इंडिया की वो पांच बेस्टमबेस्ट फिल्में, जो आपको देखनी ही चाहिए

आज मिले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार. पांच फिल्में उसी चयन से, जिनसे बॉलीवुड का दर्शक अभी तो अपरिचित है, लेकिन उसे परिचित होना चाहिए.

विसारनई

भाषा : तमिल

धनुष को तो जानते हैं ना. वही ‘रांझणा’ के हीरो. रजनीकांत के दामाद. उनको जिस फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड मिला था, वो वेत्री मारन ने ही निर्देशित की थी. अब उन्हीं वेत्री मारन की नई फिल्म ‘विसारनई’ आई है. पुलिस इंटेरोगेशन फिल्म. हार्डकोर सिनेमा. इस बार धनुष निर्माता हैं. अनुराग कश्यप फिल्म के फैन हो गए हैं. कश्यप ने इसे भारत में बनी साल की सबसे बेस्ट फिल्म कहा है. क्या देखने के लिए कोई अौर कारण चाहिए?

विजेता: बेस्ट तमिल फिल्म

visarnai

तिथि

भाषा : कन्नड़

सौ साल की उमर के दिलफैंक ‘सेंचुरी गौड़ा’ गुज़र गए. लेकिन दुनिया में इससे बड़े गम हैं. उनके बेटे, अौर बेटों के बेटे, अौर अनगिनत किरदारों से भरा परिवार इसे भुनाने में लगा है. मृत्यु यहां दुनिया की सबसे साधारण चीज़ है, अौर सबसे दुर्लभ भी. यह भारतीय जनमानस के सबसे कुटिल चेहरे को हंसी खुशी में खोल देती है. राम रेड्डी की ‘तिथि’ पिछले साल की सबसे ज़्यादा आलोचकीय तारीफ प्राप्त फिल्म थी. 2015 के ‘बॉम्बे फिल्म फेस्टिवल’ में ये अकेली हिन्दुस्तानी फिल्म थी जिसे कॉम्पिटीशन सेक्शन में मौका मिला. ‘शिप अॉफ थीसियस’ वाले अानंद गांधी अौर ‘मसान’ वाले नीरज घेवान ने इसे ही साल की बेस्ट फिल्म का तमगा दिया है.

विजेता: बेस्ट कन्नड़ फिल्म

thithi

कट्यार कालजात घुसली

भाषा : मराठी

मराठी भाषा की इस सफलतम फिल्म में कहानी सुनानेवाली एक कटार है. इस पीरियड ड्रामा फिल्म में सचिन पिलगांवकर (शोले फेम) खां साहेब की भूमिका में हैं. उनके मुकाबले पंडित भानु शंकर शास्त्री की भूमिका में सिंगर शंकर महादेवन ने अपना एक्टिंग डेब्यू किया है. शास्त्रीय संगीत के मुकाबले पर आधारित यह फिल्म इसी नाम से खेले जानेवाले मराठी नाट्य इतिहास के सफ़ल नाटक पर आधारित है. सुबोध भावे निर्देशक हैं. इसे साल की बेस्ट म्यूजिकल फिल्म का तमगा दे सकते हैं.

विजेता: बेस्ट प्लेबैक सिंगर मेल

‘चौथी कूट’

भाषा : पंजाबी

गुरविंदर सिंह की यह दूसरी फिल्म है. इससे पहले उन्होंने पंजाबी में ही ‘अन्हे घोड़े का दान’ बनाई थी, जिसने हमें पंजाब का वो असली खुरदुरा चेहरा दिखाया, जो यश चोपड़ा मार्का सिनेमा में नहीं दिखता. अब आई है ‘चौथी कूट’ जिसका चयन पिछले साल हिन्दी फिल्म ‘मसान’ के साथ प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल में हुआ. ‘चौथी कूट’ में है अस्सी के दशक का पंजाब, जिसे दसों दिशाअों से आतंक की गर्त में घसीटा जा रहा है. गुरविंदर की फिल्में संवादों से नहीं बोलतीं, दृश्यों से बोलती हैं. विश्व सिनेमा की नई बदलती भाषा को जानना चाहते हैं तो ‘चौथी कूट’ देखिए. ये हमारे देश से निकले सही मायने में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के फिल्मकार की फिल्म है.

विजेता: बेस्ट पंजाबी फिल्म

‘दूरंतो’

भाषा : हिन्दी

चार साल का लड़का 2006 में दौड़ा, भुवनेश्वर से पुरी तक. 65 किलोमीटर, कुल सात घंटे अौर दो मिनट में. अभूतपूर्व उपलब्धि. दुनिया चकाचौंध देखने लगी. लड़के का नाम बुधिया अौर कोच का नाम बिरंची. उम्मीदें की लड़का मैराथन में भारत का सचिन साबित होगा. लेकिन फिर कहानी पटरी से उतर गई. अब इसी ज़िन्दा कहानी पर फिल्म बनी है ‘दूरंतो’. निर्देशक सुमेन्द्र पढ़ी. कोच बिरंची की भूमिका में जानदार अभिनेता मनोज बाजपेयी. बुधिया की भूमिका में मास्टर मयूर, अौर मुखर अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम बुधिया की मां की भूमिका में.

विजेता: सर्वश्रेष्ठ बच्चों की फिल्म

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