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वकीलों की 5 पंच लाइनें, जिनसे जॉली एलएलबी 2 और मजेदार हो सकती है

ashutosh pandey

हमारे लल्लनटॉप दोस्त हैं अनुतोष पांडेय. काशी से हैं. ओडिशा की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से कानून की मोटी-मोटी किताबें पढ़ कर दिल्लीआ गए हैं. हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं. एक कंपनी को कानूनी सलाह देते हैं. लेकिन वकालत की तल्खी एक तरफ करके, दिल पर हाथ रख कर कुछ कहते हैं, तो महफ़िल लूट लेते हैं. पढ़िए:


जॉली LLB 2 का ट्रेलर देखा, देशी अधिवक्ता के रोल में अक्की भइया खूब फैले हैं, पर भाई हम तो फिल्म क्रिटिक है नहीं कि ट्रेलर पे कुछ बोलें. हां, पर अक्की जी का एक डायलॉग सुन के दिल में कुछ ख़याल हिलोर मार गए हैं, वही उगल रहे हैं.

एक जगह अक्की साथी वकील से पैसे लेते हुए कहते हैं कि “बेटा जो वकील पैसे वापस कर दे ना, वो वकील नहीं होता ” बहुत-बहुत साधुवाद ये डायलॉग लिखने वाले को, गज़ब सफाई से वकीलों के फलसफे को एकदम क्लियर कट स्क्रीन पे ठेल दिया है. ज़ेहन में कुछ और ऐसे ही डायलॉग आ रहे हैं जो कोर्ट-कचहरी में वकीलों के सुंदर मुख से अक्सर सुने जाते हैं.

1 . ” इलाज में जितनी देर कराएंगे इलाज का खर्च उतना बढ़ेगा”

वकीलों की ये टिपिकल लाइन है. शायद ‘वकील-साब’ लोग खुद को डॉक्टरों के काफी करीब पाते हैं, इसीलिए अक्सर बातों में डॉक्टरी का एक्ज़ाम्पल देते हैं. जब भी नया बकरा फीस देने में कुछ देर करता है तो ‘वकील-साब’ लोग ये लाइन ठेल देते हैं.

“देखिए बीमारी है और इलाज वक़्त रहते करा लें, वरना इलाज में जितनी देर करेंगे मर्ज़ उतना बढ़ेगा और खर्चा उतना बढ़ेगा.”

 

2 . “मरीज़ बिना देखे दवा कैसे बताएं”

रिश्तेदार रूपी प्रकोप से सारी दुनिया त्रस्त है और ‘वकील-साब’ लोग भी इस से अछूते नहीं. जब भी कोई पास या दूर का रिस्तेदार  फ़ोन पर / शादी में / मुंडन पर अपने घर का कोई पुराना केस खोल के बैठ जाता है फ्रीकी सलाह लेने, तो वकील ये लाइन दाग देते हैं.

“अब भाई बिना मरीज़ को देखे कैसे दवा दे दें, मरीज़ को दिखाएं तभी सही इलाज बता पाएंगे.”

 

3. “हर क्लाइंट एक अलग फल है और हर फल को खाने का तरीका अलग होता है”

ये लाइन अक्सर जूनियर वकीलों को अपने सीनियर से सुनने को मिलती है. सीनियर जब जूनियर को क्लाइंट से पैसा निकालने की तरकीब सिखाता है तो ये लाइन टपका देता है.

“देखो बेटा हर फल अलग तरीके से खाया जाता है. केले को अनार की तरह और अंगूर को आम की तरह नहीं खा सकते. उसी तरह हर मुवक्किल अलग तरह का होता है, हर मुव्वकिल से अलग तरह से पैसा निकलता है.”

 

4. “अरे हम सब तो भाई हैं, बस यहां कर्मयुद्ध में एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं”

वकील कोर्ट के अंदर जज के सामने कितनी भी गर्मी दिखाएं, कितना भी तैश दिखाते हुए एक दूसरे को चैलेंज करें पर कोर्ट के बाहर आते ही एक दूसरे को ऐसे गले लगाते हैं जैसे बनारस की नाटी इमली से भरत मिलाप का सीधा प्रसारण आ रहा हो. कोई पूछे तो दांत चियार के हंसते हुए कहेंगे:

“अरे हम सब तो भाई हैं बस कर्मयुद्ध में एक दूसरे के सामने खड़े हैं.”

5. “हाईकोर्ट जाना है जरूरी काम है”

भले दिन भर कोर्ट की कैंटीन में बैठ के चाय के हज़ारों कप धकेल जाएं पर कोई पूछेगा कि ‘क्यों जी, फ्री हैं क्या’ तो तुरंत लपक के बोल देंगे ‘नहीं भाई, हाई कोर्ट जाना है. जरूरी काम है.’ ये लाइन जूनियर वकीलों के लिए राम बाण है, जब भी केस की तारीख आगे ठेलवानी हो, तो जज के सामने भकुआए सी शक्ल बना के बोल देते हैं:

“ज़नाब, वकील साब हाई कोर्ट गए हैं “

गाहे बगाहे अगर कभी कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगे तो आपको ये लाइनें सुनने को जरूर मिलेंगी. आप सब समझदार हैं. समझते हैं. लेकिन जो बेचारे नहीं हैं, उनके लिए नोटिस चस्पा किए दे रहे हैं:

ऊपर लिखा हुई बकैती मजाक में है, कृपया लाइट लें.

अभी तक नहीं देखा, तो जॉली LLB 2 का ट्रेलर यहां देखिए:


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