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पीएम मोदी की नई टीम में यूपी से 7 मंत्री, चुनाव से पहले कहां-कहां निशाना साध रही BJP?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार 7 जुलाई को अपनी कैबिनेट का विस्तार कर लिया. राष्ट्रपति भवन में कुल 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. इनमें ज्यादातर नए चेहरे थे. वहीं, कुछ पुराने और बड़े नामों की कैबिनेट से विदाई कर दी गई. पीएम मोदी के नए मंत्रियों को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ अलग-अलग बातें कह रहे हैं. इनमें उत्तर प्रदेश के उन 7 नेताओं का काफी जिक्र है, जिन्हें पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में जगह दी है. जानकार इसके पीछे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को बड़ी वजह मान रहे हैं. आइए इन 7 नामों के बारे में संक्षेप में जान लेते हैं.

कौशल किशोर

उत्तर प्रदेश के दलित नेता और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से सांसद. 2013 में भाजपा में आने से पहले निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ते रहे हैं. 1989 में पहली बार चुनाव लड़ा. लेकिन पहली जीत मिली 2002 में. कौशल किशोर पासी समाज से आते हैं. जाटवों के बाद पासी दूसरी बड़ी दलित जाति मानी जाती है, जो भाजपा को वोट करती रही है. कौशल किशोर वही नेता हैं, जिन्होंने कोविड की सेकंड वेव में जब हालात बिगड़े तो अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ख़त लिखा था. इसमें उन्होंने प्रदेश में ऑक्सीजन और बेड की कमी का ज़िक्र किया था. ये ख़त उस समय काफी चर्चा में रहा था. इसके अलावा इसी साल मार्च में कौशल किशोर तब चर्चा में आए थे, जब उनके 30 साल के बेटे आयुष पर लखनऊ में गोली चली थी. बाद में जांच से पता चला था कि आयुष ने खुद पर ही गोली चलवाई थी.

Kaushal Kishore
कौशल किशोर.

एसपी बघेल

दलित और अति पिछड़ी जाति से आने वाले एसपी सिंह बघेल भी हैं. वे मूलतः पाल/गडेरिया जाति से हैं. बृज इलाके में यानी इटावा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, मथुरा, आगरा में इस जाति का अच्छा दबदबा है. एसपी सिंह बघेल पूर्व पुलिस अधिकारी हैं. पहले समाजवादी पार्टी से सांसद रह चुके हैं. बाद में भाजपा में आए और 2019 में आगरा से सांसद बने. 2017 विधानसभा चुनाव में ओबीसी लीडर बघेल ने अपना नामांकन एससी प्रत्याशी के तौर पर किया था. जबकि बघेल भाजपा के ओबीसी नेता थे. पर टूंडला विधानसभा से जब वे जीते, तभी यहीं के पूर्व बसपा विधायक राकेश बाबू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बघेल की जाति को लेकर केस कर दिया. कोर्ट ने बघेल को नोटिस भेजा. बघेल ने मीडिया में तर्क दिया था कि वे मूलतः धनगर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, और उत्तर प्रदेश सरकार ने धनगरों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया था. इसके पहले तक बघेल खुद को ओबीसी नेता की तरह पेश करते आ रहे थे. लेकिन इसके अगले साल यानी 2017 में हुए चुनाव में एससी नेता बनकर उभरे. इस पर काफी विवाद हुआ.

Baghel
एसपी बघेल.

पंकज चौधरी

महाराजगंज से सांसद. बरेली से 8 बार के सांसद संतोष गंगवार को इस बार कैबिनेट से हटा दिया गया है. उन्हीं की कुर्मी बिरादरी के पंकज चौधरी को लिया गया है. पंकज पूर्वांचल में बड़ा असर रखते हैं. योगी आदित्यनाथ से इनके अच्छे संबंध हैं. 8 जुलाई को पंकज की बेटी की शादी है. चौका पर बैठकर पूजन करा रहे थे, तभी फोन पर उनका दिल्ली बुलावा आ गया. पंकज चौधरी ने गोरखपुर नगर निगम में पार्षद से राजनीति का अपना सफर वर्ष 1989 में शुरू किया था. 1991 में प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति में सद्स्य के रूप में शामिल हुए. दसवीं लोकसभा के चुनाव में बीजेपी ने उन्हें महाराजगंज संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया. पहली बार में ही वह चुनाव जीत गए. इस जीत के साथ उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई. लेकिन 13वीं लोकसभा में चुनाव हार गए. हालांकि, चौदहवीं लोकसभा में फिर जीते. पंद्रहवी लोकसभा में फिर हारे. इसके बाद 16वीं व 17वीं लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की.

Pankaj Chaudhary
पंकज चौधरी.

बीएल वर्मा

बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. वे लोधी ओबीसी समुदाय से आते हैं. कल्याण सिंह के करीबी रहे हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी इसी बिरादरी से आते हैं और इसे भाजपा का बड़ा समर्थक माना जाता है. बीएल वर्मा ने अपने करियर की शुरुआत 1980 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तहसील प्रमुख के रूप में की थी. 1984 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री बने. 1997 में भाजयुमो के प्रदेश मंत्री बने. 2003 से 2007 तक भाजपा के प्रदेश मंत्री भी रहे. कल्याण सिंह के करीबी रहे हैं. उनके साथ भाजपा छोड़ी और उन्हीं के साथ लौट भी आए.

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बीएल वर्मा.

अजय मिश्रा

अजय मिश्रा ब्राह्मण बिरादरी से आते हैं. लखीमपुर खीरी से सांसद हैं. लगातार दूसरी बार जीतकर संसद पहुंचे हैं. तराई के इलाके में अच्छा प्रभाव है इनका. स्थानीय तौर पर यह माना जा रहा है कि कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद को बैलेंस करने के लिए और कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए इन्हें ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मोदी कैबिनेट में लिया गया है. अजय मिश्रा की लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच समेत कई जिलों में ब्राह्मण वोटों पर अच्छी पकड़ है. 2012 में विधायक बनने के बाद से अजय मिश्रा का कद बढ़ता गया है. 14 में लोकसभा जीतने के बाद इसमें और इजाफा हुआ.

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अजय मिश्रा.

भानु प्रताप वर्मा

2019 में 5वीं बार लोकसभा सांसद बने हैं. पहली बार 1996 में सांसद बने थे. फिलहाल जालौन से सांसद हैं. यूपी विधानसभा के भी सदस्य रह चुके हैं. भानु प्रताप वर्मा दलितों की कोरी जाति से आते हैं. इसे भी दलितों में भाजपा की खास समर्थक जाति के तौर पर देखा जाता है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इसी जाति से आते हैं. 1996, 1998, 2004, 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव जीते हैं.

Bhanu Pratap
भानु प्रताप.

अनुप्रिया पटेल

भाजपा के सहयोगी दल अपना दल से हैं. मिर्जापुर से सांसद हैं. मोदी सरकार-1 में भी मंत्री रही हैं. पूर्वांचल का एक सिरा प्रधानमंत्री ने पंकज चौधरी के सहारे साधा है, तो दूसरा अनुप्रिया पटेल के सहारे. अनुप्रिया पटेल भी कुर्मी बिरादरी से आती हैं. इस जाति का अच्छा असर प्रधानमंत्री के क्षेत्र वाराणसी में भी है, इसलिए इस बार पूर्वांचल से दोनों मंत्री इसी बिरादरी से हैं. अनुप्रिया पटेल उस वक्त खासी सुर्खियों में रही थीं, जब पिता सोनेलाल पटेल के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालने की बात आई थी. अनुप्रिया और उनकी मां कृष्णा पटेल के बीच इसे लेकर काफी विवाद हुआ था और आखिरकार कृष्णा पटेल अपना गुट लेकर पार्टी से अलग हो गई थीं.

Anupriya Patel
अनुप्रिया पटेल.

बुधवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 10 मंत्रियों का प्रमोशन किया गया है, जबकि मंत्रिमंडल में 33 नए चेहरों को शामिल किया गया है. इस लिस्ट में कई बड़े नामों को जगह दी गई है. इनमें नारायण राणे, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. वीरेंद्र कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रामचंदर प्रसाद सिंह, अश्विनी वैष्णव, पशुपति कुमार पारस, किरेन रिजीजू, राज कुमार सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मांडविया समेत कई अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं. इनमें से बहुत से मंत्रियों ने गुरुवार को अपना पदभार संभाल लिया.


UP विधानसभा चुनाव में BJP का CM फेस कौन होगा, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य से सुनिए

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