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'खामोशीः द म्यूजिकल' की 12 मज़ेदार बातें: अमिताभ और करीना इसमें बाप-बेटी के रोल में होते

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हिंदी सिनेमा की बहुत अच्छी म्यूजिकल्स में से एक ‘खामोशी’ की रिलीज को 21 साल पूरे हो गए हैं. डायरेक्टर संजय भंसाली की इस डेब्यू फिल्म में नाना पाटेकर और सीमा बिस्वास ने जोसेफ और फ्लैवी को रोल किया था जो बोल-सुन नहीं सकते. गोवा में समंदर किनारे रहते हैं. उनकी बच्ची होती है – एनी, जो बहुत सुरीला गाती है. उसके छोटा भाई सैम भी होता है. लेकिन एक ट्रैजेडी एनी (मनीषा कोइराला) की जिंदगी से संगीत छीन लेती है. बड़ी होती है तो राज (सलमान) उसकी जिंदगी में आता है और संगीत भरता है. लेकिन उनके लव को जोसेफ स्वीकार नहीं करता. भावनात्मक उथल-पुथल भरी ये कहानी आगे बढ़ती है. 1996 में 9 अगस्त को रिलीज हुई ‘खामोशीः द म्यूजिकल्स’ ट्रेड की भाषा में फ्लॉप रही लेकिन ये एक यादगार और देखने लायक फिल्म है. जानते हैं फिल्म की मेकिंग से जुड़ी कुछ बातें.

#1. बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ में संजय भंसाली माधुरी दीक्षित को लेना चाहते थे. ये ऑफर लेकर वो माधुरी के पास गए भी लेकिन उन्हें रोल पसंद नहीं आया और उन्होंने फिल्म ठुकरा दी. बाद में ये किरदार मनीषा कोइराला ने किया. जहां तक माधुरी का सवाल है तो चार साल बाद भंसाली की ही फिल्म ‘देवदास’ में माधुरी ने काम करना कुबूल किया. शूटिंग शुरू भी नहीं हुई थी कि खबर फैल गई माधुरी शादी कर रही हैं! अकसर ऐसी स्थिति में फिल्मों की कास्टिंग बदलनी पड़ जाती है लेकिन भंसाली हिले नहीं. उन्होंने माधुरी से कह दिया कि वे ही उनकी चंद्रमुखी बनेंगी, और कोई भी नहीं. चाहे उनके बच्चे ही क्यों हो जाएं. उन्होंने माधुरी का पूरा इंतजार किया.

फिल्म 'देवदास' के सेट पर संजय भंसाली, शाहरुख और माधुरी दीक्षित. (फोटोः ट्विटर)
फिल्म ‘देवदास’ के सेट पर संजय भंसाली, शाहरुख और माधुरी दीक्षित. (फोटोः ट्विटर)

#2. नाना पाटेकर ने फिल्म में मनीषा कोइराला के पिता का रोल किया है. उसी साल उन्होंने फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ (1996) में उनके पति का रोल किया था. इन दो फिल्मों के दौरान ही इनका अफेयर हो गया जो लंबा नहीं चला. बताया जाता है कि नाना तब शादीशुदा थे और उन्होंने अपनी पत्नी से तलाक नहीं लिया जिससे मनीषा डिप्रेस हो गईं. कुछ रिपोर्ट्स में नाना के गुस्सैल स्वभाव को भी इस ब्रेकअप का कारण बताया जाता है.

फिल्म 'अग्निसाक्षी' के एक दृश्य में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला.
फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ के एक दृश्य में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला.

#3. ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ की एडिटिंग संजय की बड़ी बहन बेला सेगल ने की थी जो जिंदगी के हर मोड़ पर उनकी प्रेरणा रही हैं. बेला की भी ये पहली फीचर फिल्म थी, इससे पहले उन्होंने सिर्फ एक टेलीफिल्म ही एडिट की थी. बेला ने याद किया कि वे लोग बांद्रा में मंसूर अली के घर पर फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे. संजय की आदत है कि वे गुस्सा बहुत होते हैं और जब भी नाराज होते हैं तो उस जगह से चले जाते हैं और सब लोग अजीब स्थिति में फंस जाते हैं. लेकिन एक बार एडिटिंग के दौरान किसी बात को लेकर उनका झगड़ा हुआ तो बेला वहां से नाराज होकर चली गईं. बेला ने बताया कि ऐसा उन्होंने संजय को सबक सिखाने के लिए किया ताकि वे महसूस करें जब खुद ऐसा करते हैं तो दूसरों को कैसा लगता है. बाद में संजय बेसब्र होकर बेला इंतजार कर रहे थे और उनकी असिस्टेंट से पूछ रहे थे कि वो कहां चली गई है, उसको फोन करो.

बेला सेगल और संजय भंसाली.
बेला सेगल और संजय भंसाली.

#4. हैलेन ने इस फिल्म में मनीषा की ग्रैंडमदर का रोल किया जो उसे म्यूजिक की प्रेरणा देती हैं. फिल्मों से दूरी बना चुकी हैलेन ने ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ करने के लिए हां की तो अपने बेटे सलमान खान के कहने पर.

फिल्म में एनी और उसकी ग्रैनी के रोल में हैलेन.
फिल्म में एनी और उसकी ग्रैनी के रोल में हैलेन.

#5. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ 1995 में रिलीज हुई थी. फिल्म ब्लॉकबस्टर थी और इसका म्यूजिक भी जबरदस्त साबित हुआ था. इसके कंपोजर्स जतिन और ललित थे. भंसाली ने इस ब्लॉकबस्टर के तुरंत बाद ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ के लिए उनको अप्रोच किया. वे एकदम नए डायरेक्टर थे फिर भी जतिन-ललित जैसे सुपरहिट कंपोजर ने उनकी फिल्म कुबूल की क्योंकि भंसाली की समझ से वे प्रभावित थे. उन्होंने गीत मज़रूह सुल्तानपुरी से लिखवाए थे जो 77 साल के हो चुके थे. ललित पंडित ने इसे लेकर कहा था कि संजय ने एक तरफ मज़रूह साहब को लिया और दूसरी तरफ डीडीएलजे के तुरंत बाद हमारी जोड़ी को, इससे जाहिर हुआ कि अपनी फिल्म के लिए वे कितना बेस्ट म्यूजिक चाहते थे.

'खामोशी' के कंपोजर भाई जतिन और ललित पंडित; गीतकार मज़रूह सुल्तानपुरी. (फोटोः ट्विटर)
‘खामोशी’ के कंपोजर भाई जतिन और ललित पंडित; गीतकार मज़रूह सुल्तानपुरी. (फोटोः ट्विटर)

#6. भंसाली इस फिल्म में करीना कपूर को भी लेना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि तब करीना ने फिल्मों में एंट्री नहीं ली थी. उन्होंने चार साल बाद 2000 में जेपी दत्ता की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से बॉलीवुड में प्रवेश किया.

'रेफ्यूजी' जो आखिर करीना की डेब्यू फिल्म बनी.
‘रेफ्यूजी’ जो आखिर करीना की डेब्यू फिल्म बनी.

#7. कविता कृष्णमूर्ति, कुमार सानू और अल्का याज्ञ्निक जैसे सिंगर्स ने फिल्म में गाने गाए थे जो अपने करियर में टॉप पर थे. उदित नारायण ने इसमें ‘जाना हम तुम पे मरते हैं’ गाना गाया था. पहले कंपोजर ललित पंडित को भरोसा नहीं था कि वे इतना सॉफ्ट गा पाएंगे. लेकिन उन्होंने गाया. किसी भी फिल्म में म्यूजिक उतना ही अच्छा होता है जितना डायरेक्टर की कल्पना होती है. कंपोजर ललित ने कहा था कि ‘खामोशी’ का म्यूजिक बहुत हद तक वैसा ही था जैसा संजय ने सोचा था. इसका म्यूजिक बहुत पसंद किया गया था.

#8. फिल्म में मनीषा ने गोवा में रहने वाली एनी का रोल किया था जिसके माता-पिता सुन-बोल नहीं सकते. वो सामान बनाते हैं और बचपन से एनी घर-घर जाकर उसे बेचती है. उसका छोटा भाई सैम भी होता है. संजय भंसाली ने इस हिस्से को अपने जीवन से प्रेरित होकर लिखा था. जब वे छोटे थे तो अपनी बहन और मां के साथ उन्हें भी ऐसा ही कुछ करना पड़ा था.

संजय अपनी मां लीला के साथ. उन्हीं के सम्मान में वो अपना मिडिल नेम लीला लिखते हैं.
संजय अपनी मां लीला के साथ. उन्हीं के सम्मान में वो अपना मिडिल नेम लीला लिखते हैं.

#9. कमर्शियली ये फिल्म हिट नहीं हुई थी लेकिन सिर्फ 33 साल के संजय की बहुत मैच्योर कहानी, ट्रीटमेंट और म्यूजिक से फिल्म इंडस्ट्री के लोग और आलोचक बहुत प्रभावित हुए. डायरेक्टर यश चोपड़ा और गीतकार आनंद बक्शी ने फिल्म के गीतों और संगीत को बहुत सराहा. खासकर उन्हें फिल्म के गाने की एक लाइन बहुत पसंद आई – “आज में ऊपर आसमां नीचे, आज मैं आगे ज़माना है पीछे”.

#10. ‘खामोशी’ की कहानी और स्क्रिप्ट संजय ने लिखी थी. वहीं इसके डायलॉग इरफान खान की पत्नी सुतापा सिकदार ने लिखे थे.

इरफान और सुतापा. (फोटोः यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)
इरफान और सुतापा. (फोटोः यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

#11. अकसर भारतीय फिल्मों पर विदेशी मूवीज की नकल करने का आरोप लगता है लेकिन ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ ऐसी फिल्म थी जिससे प्रेरित होकर जर्मन फिल्म ‘बियॉन्ड साइलेंस’ (1996) बनी.

फिल्म 'बियॉन्ड साइलेंस' और 'खामोशीः द म्यूजिकल' के पोस्टर.
फिल्म ‘बियॉन्ड साइलेंस’ और ‘खामोशीः द म्यूजिकल’ के पोस्टर.

#12. अपनी इस पहली फिल्म में भंसाली का इरादा नाना पाटेकर को लेने का नहीं था. उन्होंने वो रोल अमिताभ बच्चन को ध्यान में रखकर लिखा था. लेकिन बच्चन फिल्म का हिस्सा नहीं बने. बाद में भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ (2005) में उन्होंने लीड रोल किया. ‘खामोशी’ में भंसाली उन्हें एक ऐसे कैरेक्टर में देखना चाहते थे जो बोल-सुन नहीं सकता है, वहीं ‘ब्लैक’ में उन्होंने बच्चन से ऐसा रोल करवाया जिसमें वो एक ऐसी बच्ची को ट्रेनिंग देते हैं जो बोल, सुन और देख नहीं सकती.

'ब्लैक' के सेट पर संजय भंसाली और अमिताभ. (फोटोः अमिताभ बच्चन)
‘ब्लैक’ के सेट पर संजय भंसाली और अमिताभ. (फोटोः अमिताभ बच्चन)

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