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क्या 'ग्रहण' वेब सीरीज़ सिखों को ही 1984 के दंगों का दोषी दिखा रही है?

“हमारे दर्द के साथ खेलना बंद कीजिए. हम कड़े शब्दों में इसकी निंदा करते हैं और इस सीरीज़ को रिलीज़ न किए जाने की अपील करते हैं.”

“ये वेब सीरीज़ दिखा रही है कि 1984 के दंगे सिख समुदाय ने खुद किए थे.”

“प्लीज़ झूठ फैलाने की कोशिशें मत कीजिए. 1984 के पीड़ितों के ज़ख्मों पर नमक मत मलिए. पूरे समुदाय के साथ नाइंसाफी मत कीजिए.”

23 जून की सुबह इंडियन ट्विटर कुछ ऐसी अपीलों, गुहारों और गर्जनाओं के साथ जागा. कोई निंदा कर रहा था, कोई रिक्वेस्ट कर रहा था तो कोई धमकियाँ जारी कर रहा था. सबमें कॉमन सिर्फ एक बात थी. बात क्या बल्कि हैशटैग था. #BanGrahanWebSeries. ‘ग्रहण’ वेब सीरीज़ का प्रसारण रोक दो. क्यों रोक दो? क्या वजह हुई कि अमूमन देश के हिंदू-मुस्लिमों का प्रिय शगल समझे जाने वाले ‘बैन कल्चर’ की मशाल सिख समुदाय ने थाम ली? क्या था इस वेब सीरीज़ के ट्रेलर में कि न सिर्फ ट्विटर पर बवाल कटा, बल्कि 1984 के कुछ पीड़ितों ने सीरीज़ के मेकर्स को लीगल नोटिस तक भेज दिया? क्या सचमुच ये सीरीज़ 1984 के दंगों का नैरेटिव ट्विस्ट कर रही है? क्या ये सिख समुदाय को बैड लाइट में दिखाने की ‘साज़िश’ है? या फिर विरोध करने वालों ने जबरन रस्सी का सांप बनाया है? आइए जानते हैं.

फर्स्ट थिंग फर्स्ट.

# क्या है ‘ग्रहण’ का बेसिक प्लॉट?

‘ग्रहण’ हिंदी के पॉपुलर लेखक सत्य व्यास की किताब ‘चौरासी’ पर आधारित वेब सीरीज़ है. ‘चौरासी’ असल में एक प्रेम कहानी है. जिसके बैकग्राउंड में 1984 के दंगे हैं. यह कहानी झारखंड के बोकारो में घटित होती है. एक लड़का एक सिख परिवार को दंगे में मारे जाने से बचाने के लिए कुछ अनोखा काम कर जाता है. क्या काम! यही तो वो खूँटी है जिस पर गलतफहमियों का ज़खीरा टांग रहे हैं लोग. समस्या ये है कि हम ये बता देंगे तो सीरीज़ का बड़ा स्पॉइलर दे रहे होंगे. इसे आप सीरीज़ में ही देखें तो बेहतर.

सोशलमीडिया पर हो रहा है भारी विरोध.
सोशल मीडिया पर हो रहा है भारी विरोध.

‘ग्रहण’ वेब सीरीज़ असल में ‘चौरासी’ का विस्तार है. जहां ‘चौरासी’ एक लीनियर वे में कहानी कहती आगे बढ़ती है और एक थरारक क्लाइमैक्स तक पहुंचती है, वहीँ ‘ग्रहण’ में वेब सीरीज़ लायक मटेरियल बढ़ाने के लिए कहानी को विस्तार भी दिया गया है. 1984 से चली कहानी 2016 तक पहुंच रही है. ये एक्स्ट्रा कहानी और उत्सुकता बनाने के लिए ट्रेलर में क्रिएट किया गया सस्पेंस ही वजह है कि इसकी कथावस्तु को एकदम से मिस-रीड किया जा रहा है. मेकर्स भी यही बात लगातार कह रहे हैं.

# हंगामा है क्यों बरपा?

‘ग्रहण’ का ट्रेलर रिलीज़ होने के बाद से ही काफी हलचल है. कई लोग ये कह रहे हैं कि ये सीरीज़ 1984 दंगों के लिए सिख समुदाय को ही ज़िम्मेदार ठहरा रही है. जबकि ये सारा मामला ट्रेलर को रोचक बनाने के लिए डाले गए एलिमेंट्स से उभरा कन्फ्यूजन मात्र है. शायद इसी कन्फ्यूजन के चलते 1984 के कुछ पीड़ितों ने प्रड्यूसर्स और डिज़्नी प्लस हॉटस्टार को लीगल नोटिस भेज दिया. भेजने वालों के नाम हैं निरप्रीत कौर, सतनाम सिंह गंभीर और जसमीत सिंह. इन्होंने प्रड्यूसर्स से माफ़ी की मांग की और सीरीज़ के प्रसारण को रुकवाने की डिमांड की. इस नोटिस की एक कॉपी नेशनल मायनॉरिटी कमीशन और SGPC यानी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी को भी भेजी गई. नोटिस में इल्ज़ाम लगाया गया है कि सीरीज़ में एक सिख आदमी को लूटपाट और हिंसा में लिप्त दिखाया गया है. ये एक झूठा नैरेटिव सेट करने की कोशिश है. जानबूझकर सिख समुदाय को बदनाम करने की साज़िश है.

आरोप है कि 84 के दंगों का अलग नैरेटिव सेट किया जा रहा है.
आरोप है कि 84 के दंगों का अलग नैरेटिव सेट किया जा रहा है.

इस नोटिस को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी का भी समर्थन मिला. SGPC की प्रेसिडेंट बीबी जगीर कौर ने प्रेस कांफ्रेंस करके डिमांड की कि वेब सीरीज़ पर तत्काल बैन लगाया जाए. उन्होंने कहा,

“सीरीज़ में एक किरदार को आपत्तिजनक ढंग से पेश किया गया है. ‘ग्रहण’ में 1984 के दंगों का ज़िम्मेदार इस सिख करैक्टर को दिखाया जा रहा है, जो शर्मनाक है. बीबी निरप्रीत कौर द्वारा भेजे गए नोटिस का SGPC समर्थन करता है. इस वेब सीरीज़ द्वारा सिखों के ज़ख्मों पर नमक मसला जा रहा है, उनकी भावनाएं आहत की जा रही हैं. ऐसा कॉन्टेंट कम्युनल हार्मनी के लिए घातक है. सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.”

आगे उन्होंने ये भी कहा कि सेंसर बोर्ड में सिख प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि सिख समुदाय से जुड़े किसी भी आपत्तिजनक सीन को सेंसर किया जा सके. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐतराज़ के काबिल मटेरियल रिलीज़ किया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

उसके बाद फिर सोशल मीडिया पर भी जमकर बवाल हुआ. ट्विटर पर हैशटैग चलने लगा #BanGrahanWebSeries. ‘बैन करो, बंद करो, माफ़ी मांगो’ तो हुआ ही, लोगों ने इसे किसान आंदोलन तक से जोड़ डाला. कहा कि सिख समुदाय की उसमें एक्टिव शिरकत से नाराज़ लोगों ने उन्हें बदनाम करने का ये नया पैंतरा खोजा है.

# राइटर, मेकर्स क्या कह रहे हैं?

हमने ‘चौरासी’ के लेखक सत्य व्यास से बात की. उनसे पूछा कि क्या उनकी कहानी में वो सब चीज़ें हैं, जिनका इल्ज़ाम लग रहा है? क्या लिखा है उन्होंने? उन्होंने कहा,

“‘चौरासी’ का बेसिक प्लॉट एक रात की कहानी है, जो कि बेसिकली एक प्रेम कहानी है. 1984 के बैकड्रॉप में. इसमें एक लड़का एक सिख परिवार को बचाने के लिए कुछ अनोखा काम कर गुज़रता है. कहानी का केंद्र झारखंड का शहर बोकारो है. जहाँ किसी ज़माने में सिख कम्युनिटी ठीक-ठाक संख्या में थी. जो कि सन 84 के बाद बड़ी संख्या में माइग्रेट कर गए.”

सत्य आगे कहते हैं कि उन्हें इस सीरीज़ पर हो रहे बवाल से हैरानी है. बल्कि उन्हें तो उम्मीद है सीरीज़ देखने के बाद इसके विरोधी इसके फेवर में आ जाएंगे. उन्होंने कहा,

“जो भी सिख व्यक्ति ‘चौरासी’ को पढ़ेगा या इस सीरीज़ को देखेगा, वो इंसाफ को इसी से जोड़कर देखेगा. उनको लगेगा कि यही होना चाहिए था. जो भावनाएं आहत हो रही हैं, वो सीरीज़ देखने के बाद संतुष्ट होंगी. उन्हें लगेगा कि इस तरह भी हमें न्याय मिलता तो भी ठीक रहता. सीरीज़ रिलीज़ होने के बाद ये आहत होने वाला सीन चेंज हो जाएगा. ये सिख कम्युनिटी की तरफ से कही गई कहानी है. चाहे किताब पढ़िए, चाहे सीरीज़ देखिए.”

ये वेब सीरीज़ दंगों के बैकड्रॉप पर बनी एक प्रेम कहानी है.
ये वेब सीरीज़ दंगों के बैकड्रॉप पर बनी एक प्रेम कहानी है.

हमने सीरीज़ के शो रनर शैलेंद्र झा से भी बात की. उन्होंने बताया,

“कहानी में मिस्ट्री है. 1984 से संबंधित फैक्ट्स सभी को पता है. हमारी कहानी का वो थीम है नहीं. हमारी कहानी का थीम रिलेशनशिप है, लव स्टोरी है. प्लस पूरी कहानी काल्पनिक है. जो हिस्ट्री का बैकग्राउंड लिया गया है, उसमें छेड़छाड़ करने की हमें ज़रूरत नहीं थी. हमने ऐसा कुछ किया भी नहीं है. हमारी कहानी नफरत के खिलाफ प्रेम की कहानी है. मानवीय मूल्यों की कहानी है. बाप-बेटी के रिश्ते की कहानी है. इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर ऐतराज़ किया जा सके. हम तो यही कहेंगे कि लोग पहले देखें, फिर रिएक्ट करें. हमें भरोसा है कि इसे देखने के बाद लोग खुद ही इसके फेवर में मन बना लेंगे.

# घोड़े के आगे बग्गी जोतना

कुल मुलाकर नतीजा ये निकला कि लोग घोड़े के आगे बग्गी जोत रहे हैं. सीरीज़ को देखने से पहले ही जजमेंटल हो रहे हैं. क्रिएटर्स की इस बात को थोड़ी अहमियत दी जानी चाहिए कि भैया पहले देख लो, फिर कुछ दिक्कत हो तो बताना. अंदाज़ों पर टिका विरोध किस काम का! अभी किसी को ठीक-ठाक पता नहीं है कि ये जो सिख समुदाय को गलत ढंग से दिखाने का आरोप है, उसमें कितना दम है. एक बार सीरीज़ रिलीज़ हो जाए, तो किया जाएगा विमर्श. तब तक तो भावनाओं के उफान पर लगाम लगाई जा ही सकती है.

Grahan
‘ग्रहण’ के टोटल आठ एपिसोड हैं.

‘ग्रहण’ 24 जून से हॉटस्टार पर स्ट्रीम होगी. इसे रंजन चंदेल ने डायरेक्ट किया है. इसमें ‘मुक्काबाज़’ फेम ज़ोया हुसैन, पवन मल्होत्रा, वामिका गब्बी, अंशुमन पुष्कर और टीकम जोशी मुख्य भूमिकाओं में हैं.


वीडियो: ऐमज़ॉन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के ‘फ़्लैश सेल’ पर रोक लगा रही है सरकार

 

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