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4 फील गुड फ़िल्में जो ऑनलाइन देखने के बाद दूसरों को भी दिखाते फिरेंगे

‘चाची 420’ में एक गाना है-

दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा, वक़्त ये वक़्त है थोड़ा थोड़ा सा.

मगर, लॉकडाउन में बंद हमारी ज़िंदगी में फिलवक़्त कोई भागदौड़ नहीं. अभी वक़्त ही वक़्त है. जब हम छोटे थे, तो बड़े सिखाते थे. फिल्म देखना माने समय की बर्बादी. वो ग़लत थे. अच्छी फिल्में जीवन का हिस्सा होनी चाहिए (अगर आपके सामाजिक वर्ग का प्रिविलेज परमिशन देता हो तो). इसीलिए हम लेकर आए हैं कुछ सुझाव. ऐसी फिल्मों के, जो बिना बोर किए आपको जीवन के ज़रूरी सबक देती हैं.

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यहां क्लिक करें और बाकी रेकमेंडेशन लिस्ट का भी आनंद उठाएं.

1. हलो (हिंदी, 1996)

एक छोटी बच्ची है- साशा. एक दिन एक कुत्ता आता है उसकी ज़िंदगी में. भगवान की तरह माथे के पीछे रोशनी का गोला लिए. साशा और वो कुत्ता हलो, बेस्ट फ्रेंड हैं अब. एक दिन हेलो खो जाता है. साशा का एक हिस्सा ही गुम हो जाता है जैसे. साशा की सारी इंद्रियां बस हलो को खोज लाने पर टिक गई हैं. हलो मिलता भी, मगर तब साशा जो करती है वो देखकर आप अपनी इंसानियत टटोलेंगे.

डायरेक्टर- संतोष सिवन

कहां देखें: यूट्यूब पर.

2. केफ़रनॉम (लेबनीज़, 2018)

ये कहानी है 12 साल के एक बच्चे ‘ज़ैन’ की. जो बेरूत की एक झुग्गी में रहता है. उसने अपने मां-बाप पर केस कर दिया है. उसका कहना है कि जो पैरेंट्स बच्चे की परवरिश नहीं कर सकते सही से, उन्हें बच्चे पैदा करने का हक़ क्यों मिले? ज़ैन का ये सवाल फिल्म के आख़िर में आता है. तब, जब उसका ये सवाल आपके दिल में पैठ चुका होता है. तब, जब आप ख़ुद जज बनकर उसके हक़ में फैसला सुना देने के लिए कसमसा रहे होते हैं. ये फिल्म इस मायने में अद्भुत है कि इसमें आपको दिखेगा. अभाव और बर्बादी में इंसान के स्वार्थी हो जाने की बातें झूठी हैं. कुछ इंसान होते हैं, जो घुप्प अंधेरे में भी रोशन रहते हैं.

डायरेक्टर – नदीन लबाकी

कहां देखें: नेटफ्लिक्स पर.

3. टोगो (इंग्लिश, 2009)

ये बनी है एक सच्ची कहानी पर. एक कुत्ते और एक आदमी की कहानी. दोनों अलास्का में रहते हैं. साल है 1925. ये दोनों और इनके कुछ साथी कुत्ते मिलकर एक अद्भुत मिशन को अंजाम देते हैं. मिशन ऐसा मानो आप मरने की ठान कर ही घर से निकले हैं. मगर चारा क्या है? मिशन की कामयाबी पर बहुत सारे मासूमों की जान दांव पर लगी है. क्या होगा इन सबका? मिशन कामयाब रहेगा कि नहीं? वो बचेंगे कि नहीं?

ये कहानी है हिम्मत की. ये कहानी है मुहब्बत की. ये कहानी है एक रुखे-सूखे बिजनसमैन के इंसान बन जाने की. और सबसे बढ़कर तो ये कहानी है एक ऐसे जीनियस कुत्ते की, जिसे बोझ समझा गया, जिससे बार-बार गला छुड़ाने की कोशिश की गई. मगर वही कुत्ता बस मुहब्बत के नाम पर अपनी जान देकर शहर बचाने निकला है. ये फिल्म देखते हुए आप कई बार हंसेंगे. कई बार रोयेंगे. फिल्म ख़त्म होने के बाद भी आपके साथ बनी रहेगी. और शायद आप भी दूसरों को ये फिल्म रेकमेंड करते फिरें.

डायरेक्टर – एरिक्शन कोर

कहां देखें- हॉटस्टार पर. 

4. द लाइव्स ऑफ अदर्स (जर्मन, 2006)

ये 1984 के पूर्वी जर्मनी की कहानी है. वहां स्टेट सिक्योरिटी सर्विस है – स्टासी. अपने लोगों की जासूसी करना. उनपर चौबीस घंटे नज़र रखना. स्टासी ये सारे काम करता है. मकसद ये पता लगाना कि कोई कम्युनिस्ट सत्ता के ख़िलाफ साज़िश तो नहीं कर रहा. इसी स्टासी में काम करने वाले एक एजेंट को जिम्मेदारी मिलती है एक नाटककार पर नज़र रखने की. जासूसी करते-करते कुछ ऐसा होता है कि उसे उस नाटककार से हमदर्दी हो जाती है. ऐसी, मानो हाथ उसका कटे और दर्द इसे हो. वो अपनी नौकरी दांव पर लगाकर उसे बचाने लगता है. फिल्म का अंत कमाल का है.

डायरेक्टर- फ्लोरियन हेंकेल वोन डॉनरस्मार्क

कहां देखें: यूट्यूब पर.


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