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पड़ताल: मोदी ने 1988 में डिजिटल कैमरे की बात की, राजीव गांधी के हाथ में 1983 में कैसे आ गया?

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नरेंद्र मोदी. जिन्हें संबित पात्रा सुप्रीम लीडर और बाकी सभी देश का प्रधानमंत्री कहते हैं. मोदी जी ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान ऐसी बातें कहीं, जिनपर लोगों को काफ़ी अच्छा कॉन्टेंट मिल गया है. उन्होंने सबसे पहले राडार और बादलों वाली कही. फिर उन्होंने 1988 में डिजिटल कैमरा के इस्तेमाल की बात कही. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि 1988 में डिजिटल कैमरा से फ़ोटो खींचने के बाद उन्होंने उस तस्वीर को ईमेल किया और अगले ही रोज़ वो अख़बार में छपी. ई-मेल वाली बात और डिजिटल कैमरा वाली बात पर विशेषज्ञों में कोई मतभेद नहीं है. कोई भी इन बातों को पचाने में सफ़ल नहीं दिख रहा है. हालांकि हमेशा की ही तरह मोदी जी की बातों को सही ठहराने वाले भी हैं लेकिन जनता जनार्दन उन्हें भी लगातार सच्चाई से वाकिफ़ करवा रही है.

ऐसे ही लोगों में, जो मोदी जी की बातों को एकदम सत्य मानकर बैठे हैं और तमाम तर्क पेश कर रहे हैं, एक साहब ऐसे दिखे जो कि राजीव गांधी को डिजिटल कैमरा चलाते देख गए. उन्होंने एक तस्वीर पेश की. फोटो के नीचे लिखे कैप्शन के मुताबिक राजीव गांधी साल 1983 में हिंडन एयरफ़ोर्स स्टेशन पर भारतीय वायु सेना का शो अपने कैमरे में कैद कर रहे थे. उनके हाथ में एक कैमरा दिख रहा है. तस्वीर के साथ फेसबुक पोस्ट में लिखा है – “कांग्रेस को दिक्कत ये है कि एक गरीब, पिछड़ी जाति के नरेन्द्र मोदी जी के पास 1988 में डिजिटल कैमरा आया कहा से? कैमरे और महंगी चीजों पर हक़ तो सिर्फ इस देश के राजा साहब का था न?” इस कैप्शन में सब कुछ ला दिया गया है. राजीव गांधी पर तंज़ भी है जो कि मोदी जी भी गांधी परिवार पर ‘नामदार’ के रूप में करते आये हैं. पिछड़ी जाति का कार्ड भी है. कांग्रेस तो निशाने पर हैय्ये है. और इसके साथ ही सुप्रीम लीडर का बचाव भी है. सब कुछ एक ही में. मिक्स्ड फ्रूट जूस जैसा. 

Rajiv Gandhi using a camera in 1983

अब आते हैं मुद्दे पर. ये डिजिटल कैमरा नहीं है. ये VHS कैमरा है. इसे कैमकॉर्डर कहते थे. साल 1983 में ही सोनी ने पहली बार बाज़ार में कंज़्यूमर कैमकॉर्डर उतारा था. इसी साल JVC नाम की कम्पनी ने दुनिया का पहला VH-S कैमकॉर्डर रिलीज़ किया था. चूंकि तस्वीर साल 1983 की है, इसलिए बहुत हद तक ये वही JVC कैमरा है जो 1983 में रिलीज़ हुआ था. आप राजीव गांधी की तस्वीर को ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि कैमरे पर JVC लिखा हुआ है.

ऐसी पोस्ट तमाम लोग शेयर करने लगे बिना सोचे-समझे.
ऐसी पोस्ट तमाम लोग शेयर करने लगे बिना सोचे-समझे.

राजीव गांधी के पास भले ही इफरात पैसा हो (जैसा कि फ़ेसबुक के कैप्शन से आप जान ही गए होंगे) लेकिन इतना तो तय है कि उनके पास टाइम मशीन नहीं थी और वो भविष्य में नहीं जा सकते थे. ऐसे में साल 1983 में उनके पास साल 1983 या उससे पहले आया कैमरा ही होगा. अतएव ये डिजिटल कैमरा नहीं था.

डिजिटल कैमरा और इस तरह के कैमरे में क्या फ़र्क होता है? सारी बात रिकॉर्डिंग कैसे होती है, इस पर निर्भर करती है. पुराने कैमरे ऐनलॉग सिग्नल के रूप में रिकॉर्डिंग करते थे. डिजिटल कैमरा में ऑडियो और वीडियो डेटा अंकों के रूप में रिकॉर्ड होता है. ऑडियो के मामले में स्टोर हुआ अंक उस पर्टिकुलर मौके पर माइक द्वारा रिसीव किये हवा के दबाव को रिकॉर्ड करता है. वीडियो के मामले में ब्राइटनेस को अंकों में बदला जाता है. ये काम सेंसर करता है. (ये डिजिटल रिकॉर्डिंग की एक मोटा-माटी परिभाषा है. ज़्यादा गहरे में जायेंगे तो मामला टेक्निकल हो जायेगा, जिसकी यहां किंचित ज़रूरत नहीं है.)

जबकि राजीव गांधी जो कैमरा यूज़ कर रहे हैं, उसमें कैसेट लगाकर रिकॉर्ड किया जाता था. ये डिजिटल रिकॉर्डिंग का हिस्सा नहीं था. और इसीलिए ये दावा कि ‘देश का राजा’ 1983 में डिजिटल कैमरा इस्तेमाल कर रहा था और ‘पिछड़ी जाति’ के एक इंसान ने 1988 में इस्तेमाल कर लिया तो हल्ला हो गया, ग़लत है.

कुछ लोग इस बात को उठाते हुए तमाम लोग लंबे-लंबे पोस्ट लिखने लगे.
कुछ लोग इस बात को उठाते हुए तमाम लोग लंबे-लंबे पोस्ट लिखने लगे.
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Facebook posts saying that Rajiv Gandhi was using digital camera in 1983 is false, here is why

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