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दे जूता, दे चप्पल, दे कुर्सी: हथियारबंद डकैतों को पति-पत्नी ने मार भगाया

रात का समय. अकेला बुजुर्ग जोड़ा. आस-पास मदद को कोई नहीं. न ही चीख-पुकार सुनने वाला ही कोई मौजूद. और ऐसे में दो हथियारबंद डकैतों का हमला.

क्या लगता है, क्या हुआ होगा? डकैत जीत गए होंगे?

सोशल मीडिया कभी-कभार बेहद सुंदर चीजें दिखाता है. जैसे- तमिलनाडु के एक बहादुर पति पत्नी का वायरल वीडियो. दोनों ने मिलकर डकैतों से लड़ाई की. और इतनी बहादुरी दिखाई कि डकैतों को भागना पड़ा.

घटना क्या हुई?
तमिलनाडु में तिरुनेलवी नाम की जगह है. यहीं की घटना है ये. 11 अगस्त की रात नौ बजे की बात होगी. 70 साल के शानमुगावेल लुंगी पहने अपने घर के बरामदे में बैठे थे. उन्हें पता ही नहीं चला कि कब पीछे की तरफ से हाथ में गंडासा लिए दो डकैतों ने हमला कर दिया. एक डकैत ने उनके गले में कपड़ा डालकर उन्हें पीछें खींचा. उनका दम घोंटने की कोशिश की. शानमुगावेल ने खूब हाथ-पैर मारा और खुद को उस डकैत की कैद से आज़ाद कर लिया. इतने में आवाज़ सुनकर उनकी 65 साल की पत्नी सेंथामाराई घर के अंदर से बाहर आईं. आपको वीडियो में उनकी फुर्ती देखनी चाहिए. हम और आप होते, तो भी शायद कुछ सेकंड तो हमें समझ ही नहीं आता कि क्या करें. हाथ-पांव फूल गए होते. मगर सेंथामाराई ने जैसे ही डकैतों को अपने पति पर हमला करते देखा, तो वो भी भिड़ गईं. चप्पल, जूता, कुर्सी, जो हाथ में आया वही फेंककर डकैतों को भगाने की कोशिश में लग गईं.

डकैतों को भागना पड़ा
दोनों पति-पत्नी लड़ते रहे डकैतों से. एक पल तो ऐसा हुआ कि शानमुगावेल ने प्लास्टिक की कुर्सी फेंककर डकैतों को मारा. कुर्सी टूट गई. उसका एक पैर बचा शानमुगावेल के पास. वो यही लिए डकैत से लड़ रहे थे. जबकि डकैत के पास था गंड़ासा. आखिरकार दोनों पति-पत्नी की हिम्मत ने डकैतों को भागने पर मजबूर कर दिया. बिल्कुल जिसको सिर पर पैर रखकर भागना कहते हैं, वैसे ही.

इस मौके का CCTV फुटेज वायरल हो गया है. खूब शेयर हो रहा है. न्यूज़मिनट में प्रियंका तिरुमूर्ति ने जाकर इन दोनों बहादुर पति-पत्नी से बात की. उन्होंने बताया कि वो गांव के एक किनारे पांच एकड़ के एक फार्महाउस में रहते हैं. पास ही में जंगल है. पिछले 40 सालों से यही रह रहे हैं ये.

दोनों पति-पत्नी को मालूम चल गया है कि उनकी बहादुरी का कारनामा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. कि लोग उनकी भर-भरकर तारीफें कर रहे हैं. इन तारीफों से दोनों खूब खुश हैं. खुश तो हम भी बहुत हैं. किसी के बुढ़ापे को इतना हिम्मती देखना फील गुड तो देता ही है.


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