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भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या पर बनने जा रही है फिल्म

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कई मशहूर शख्सियतों की जिंदगी पर फिल्में बनने के बाद अब भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पर एक बायोपिक बनने जा रही है. ये फिल्म कई मायनों में खास होने वाली है. ऐसे में आइए जानते हैं इसकी 5 सबसे जरूरी बातें:

#1. सन 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ था. इस युद्ध के बाद जनवरी 1966 में दोनों देशों के बीच रूस के ताशकंद में एक समझौता हो रहा था. समझौते वाली रात ही होटल में भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई. मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई थी. डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री इसी घटना के इर्द-गिर्द अपने फिल्म की कहानी बुन रहे हैं. विवेक इससे पहले ‘चॉकलेट’, ‘हेट स्टोरी’, ‘धन धना धन गोल’, ‘ज़िद’, ‘जुनूनियत’ और ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जैम’ बना चुके हैं.

ताशकंद समझौते के दौरान शास्त्री.
ताशकंद समझौते के दौरान शास्त्री.

#2. इस विषय पर फिल्म बनाने की घोषणा विवेक ने पिछले साल शास्त्री जी की डेथ एनिवर्सरी पर ही कर दी थी. उन्हें पता था कि इस फिल्म को बनाने के लिए बहुत सारी रिसर्च लगेगी. इसलिए उन्होंने पूरा एक साल सिर्फ इसी काम को दिया. उनकी इस रिसर्च में जनता ने भी उनकी बहुत मदद की. लाल बहादुर शास्त्री की मौत की कई सारी थ्योरीज़ पब्लिक डोमेन में घूमती हैं. विवेक ने इसी का फायदा उठाया और सारी रिसर्च पब्लिक से करवा ली. उन्होंने जनता से कहा कि उन्हें शास्त्री जी की मौत के बारे में जो कुछ भी पता है जानकारी दें. इसके बाद उन्हें इस मुद्दे से जुड़े ढेरों मेल मिले.

सैनिकों को संबोधित करते शास्त्री.
सैनिकों को संबोधित करते शास्त्री.

#3. कुलदीप नैय्यर (वो जर्नलिस्ट जो शास्त्री के साथ ताशकंद दौरे पर थे) ने अपनी दो किताबों Beyond The Lines और Scoop में बताया था कि शास्त्री जी की मौत को लेकर बहुत सारी अफवाहें उड़ी थीं. मौत के बाद शास्त्री के नीले पड़ चुके शरीर को लेकर ऐसी बातें होने लगीं कि उन्हें जहर दिया गया है. उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने इस बात पर बहुत जोर दिया. कुलदीप के मुताबिक डेड बॉडी पर बाम लगाया गया था ताकि वो खराब न हो. इसी वजह से शरीर नीला पड़ गया था. इसके अलावा उस रसोइये पर भी संदेह किया गया था, जिसने शास्त्री के लिए उस रात खाना बनाया था. लेकिन इस संदेह को भी पुख्ता नहीं किया जा सका क्योंकि शास्त्री के पिछले मॉस्को दौरे पर भी खाना उसी रसोइये ने बनाया था.

कुलदीप नैय्यर उस ताशकंद दौरे पर शास्त्री के साथ थे.
कुलदीप नैय्यर उस ताशकंद दौरे पर शास्त्री के साथ थे.

#4. मीडिया से बात करते हुए विवेक ने बताया ‘शास्त्री जी की मृत्यु बहुत ही रहस्यमयी घटना है और पब्लिक में इस मुद्दे से जुड़ी कई सारी थ्योरीज़ हैं. मेरा मानना है कि किसी भी कंट्रोवर्सी के दो पहलू होते हैं. मैं जनता को उन दोनों पहलुओं से रूबरू करवाना चाहता हूं. इस काम के लिए मिथुन दा और नसीर साहब से बेहतर और कौन हो सकता है? मुझे अपनी फिल्म में बड़े सितारों को लेकर उसे कॉमर्शियलाइज़ करने की कोई इच्छा नहीं है. मैं कास्टिंग मेरिट के आधार पर करता हूं. मुझे अपनी फिल्म में ऐसे एक्टर चाहिए थे जो उन किरदारों को पूरी विश्वसनीयता के साथ निभा सके.’ हालांकि फिल्म में लीड रोल (शास्त्री के रोल)  के लिए एक्टर की तलाश अभी भी जारी है.

फिल्म के लिए मिथुन और नसीरुद्दीन शाह को कास्ट कर लिया गया है.
फिल्म के लिए मिथुन और नसीरुद्दीन शाह को कास्ट कर लिया गया है.

#5. विवेक ने ये भी कहा ‘ये शास्त्री जी की जीवन पर पर सबसे बेहतरीन रिसर्च है. एक ‘पॉलिटिकल लीडर’ पर बनने वाली अब तक की सबसे ‘अपॉलिटिकल’ फिल्म है’. फिल्म का नाम होगा ‘द ताशकंद फाइल्स’. इसकी शूटिंग जनवरी के तीसरे हफ़्ते से शुरू होगी.  रिलीज़ की अभी कोई डेट तय नहीं की गई है.


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