Submit your post

Follow Us

2019 की वो 15 फिल्में जिन्हें कहीं से भी ढूंढकर आपको देखना ही चाहिए

हमारे हिसाब से 2019 में आईं 15 लल्लनटॉप फिल्में-

ज़ोया अख्तर डायरेक्टेड इस फिल्म में रणवीर सिंह के साथ आलिया भट्ट, सिद्धांत चतुर्वेदी, कल्कि केकलां, विजय वर्मा, विजय मौर्य, विजय राज, और अमृता सुभाष जैसे एक्टर्स ने काम किया था.
ज़ोया अख्तर डायरेक्टेड इस फिल्म में रणवीर सिंह के साथ आलिया भट्ट, सिद्धांत चतुर्वेदी, कल्कि केकलां, विजय वर्मा, विजय मौर्य, विजय राज, और अमृता सुभाष जैसे एक्टर्स ने काम किया था. फिल्म के एक सीन में रणवीर सिंह और विजय वर्मा. 

1) गली बॉय
[डायरेक्टर- ज़ोया अख्तर]

अमेरिका में रैप उस ऐतराज़ को ज़ाहिर करने का माध्यम बना, जो सदियों से जमा हो रहा था. रैप मनोरंजन का नहीं, क्रांति का माध्यम था. इसी विचार को इंडियन सेटिंग में दिखाती है गली बॉय. मुंबई की चॉल में रहने वाले मुराद माने रणवीर सिंह को समाज उसके बाप के पेशे तक महदूद रखना चाहता है. परिवार बिखर रहा है. ठीक वही हालात, जिनमें धारावी का रैप पैदा हुआ. तो फिल्म ज़िंदगी दिखाती है. गाती है. रैप करती है. लेकिन इन बातों से रोमैंस के चक्कर में प्लास्टिक हुए बिना. ज़रूर देखी जाए.

नीतेश तिवारी डायरेक्टेड इस फिल्म में तुषार पांडे, नवीन पॉलीशेट्टी, ताहिर राज भसीन, सुशांत सिंह राजपूत, वरुण शर्मा, सहर्ष कुमार शुक्ला (बाएं से दाएं) और श्रद्धा कपूर ने लीड रोल्स किए थे. श्रद्धा इस तस्वीर में नहीं हैं लेकि फिल्म में हैं.
नीतेश तिवारी डायरेक्टेड इस फिल्म में तुषार पांडे, नवीन पॉलीशेट्टी, ताहिर राज भसीन, सुशांत सिंह राजपूत, वरुण शर्मा, सहर्ष कुमार शुक्ला (बाएं से दाएं) और श्रद्धा कपूर ने लीड रोल्स किए थे. श्रद्धा इस तस्वीर में नहीं हैं लेकिन फिल्म में हैं.

2) छिछोरे
[डायरेक्टर- नीतेश तिवारी]

‘चिल्लर पार्टी’ और ‘दंगल’ वाले फिल्ममेकर की अगली पेशकश. फिल्म थी एक डिवोर्सी कपल (अनिरुद्ध और माया) के बारे में, जिनका बेटा एक इग्ज़ाम में फेल होने के बाद सुसाइड अटेम्प्ट करता है. क्योंकि उसे लूज़र नहीं बनना. बेसिकली कॉलेज और एजुकेशन सिस्टम के बैकड्रॉप में बसी ये सोशली काफी रेलेवेंट फिल्म थी. इसे ‘रंग दे बसंती’ और ‘3 इडियट्स’ का मिक्स्ड रिप-ऑफ कहा गया. लेकिन ऐसा कुछ था नहीं. कॉन्सेप्ट का एक्जीक्यूशन. बढ़िया परफॉरमेंसेज़. ज़रूरी आइडिया. रेलेवेंट मैसेज. इसलिए अच्छी फिल्म.

Besअभिषेक चौबे डायरेक्टेड इस फिल्म में मनोज बाजपेयी, रणवीर शोरे, आशुतोष राणा, सुशांत सिंह राजपूर और भूमि पेडणेकर ने काम किया था.t Films Of 2019 (2)
अभिषेक चौबे डायरेक्टेड इस फिल्म में मनोज बाजपेयी, रणवीर शौरी, आशुतोष राणा, सुशांत सिंह राजपूत और भूमि पेडणेकर ने काम किया था.

3) सोन चिड़िया
[अभिषेक चौबे]

इस फिल्म को देखने बाद मेरी निजी राय ये है कि फिलहाल इंडिया में एक ही फिल्ममेकर है, जो अनुराग कश्यप को टक्कर दे सकता है. या उनसे भी बेहतर फिल्में बना सकता है. 1975 में चंबल के डाकुओं/बागियों पर बनी ये ऐसी फिल्म है, जिसके खत्म होते-होते आपका सिस्टम हिल जाता है. खालिस बुंदेली में डायलॉग्स फिल्म को भयानक ऑथेंटिसिटी देते हैं. और बचा-खुचा काम एक्टर्स का लुक कर देता है. बाकी फिल्म के पास कॉन्टेंट तो तगड़ा है ही. थोड़ी स्लो है लेकिन वैसा कुछ आपने पहले नहीं देखा होगा. मस्ट वॉच है.

अनुभव सिन्हा डायरेक्टेड इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, मो.ज़ीशान अयूब, सयानी गुप्ता, ईशा तलवार और आशीष वर्मा ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में आयुष्मान के साथ आशीष.
अनुभव सिन्हा डायरेक्टेड इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, मो.ज़ीशान अयूब, सयानी गुप्ता, ईशा तलवार और आशीष वर्मा ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में आयुष्मान के साथ आशीष.

4) आर्टिकल 15
[अनुभव सिन्हा]

इन्हें ‘मुल्क’ फेम अनुभव सिन्हा कहा जाना चाहिए. या अनुभव सिन्हा 2.0. ‘मुल्क’ उनका कमबैक थी. ‘आर्टिकल 15’ से पिच पर उन्होंने अपने पांव मजबूती से जमा लिए हैं. ये असल घटनाओं से प्रेरित डॉक्यूमेंट्रीनुमा फीचर फिल्म है. फिल्म का नाम जिस चीज़ के बारे में बात करता है वो है समानता का अधिकार. जात, धर्म, रंग, लिंग के आधार पर कोई छोटा या बड़ा नहीं है. अन्य शब्दों में कहें, तो सुपीरियर या इंफीरियर नहीं है. सब बराबर हैं. पहला सवाल तो ये है कि ये जाति होती क्या है? और दूसरा सवाल ये कि कोई जाति इतनी नीच कैसे हो सकती है कि उन्हें जीने का भी अधिकार न हो. और हम यहां समानता के अधिकार की बात कर रहे हैं. देश के इंटीरियर में निकलिए और इन सवालों के जवाब ढूंढ़िए. ये फिल्म बताती है कि जाति व्यवस्था में इतने लूप होल्स हैं कि इंसान सांस भी नहीं ले पा रहा. ये जो तमाचा मारती है, वो गाल पर नहीं दिल और दिमाग पर लगता है. लेकिन हमें अपनी बुद्धि खोलने के लिए अभी ऐसे बहुत सारे तमाचे और खाने पड़ेंगे.

वसन बाला डायरेक्टेड इस फिल्म में महेश मांजरेकर, अभिमन्यु दसानी, राधिका मदान, गुलशन देवैया और जिमित त्रिवेदी ने लीड रोल्स किए थे.
वासन बाला डायरेक्टेड इस फिल्म में महेश मांजरेकर, अभिमन्यु दसानी, राधिका मदान, गुलशन देवैया और जिमित त्रिवेदी ने लीड रोल्स किए थे. फिल्म के अलग-अलग सीन्स में नज़र आ रहे अजूबा, सूर्या, सुपड़ी और मास्टर मनी.

5) मर्द को दर्द नहीं होता
[वासन बाला]

सूर्या (अभिमन्यु दसानी) नाम के एक लड़के की कहानी, जिसे एक बीमारी है. उसे दर्द नहीं होता. डॉक्टर्स बताएंगे, तो ‘कंजेनिटल इंसेंसिटिविटी टू पेन’ बोलेंगे कंफ्यूज़ नहीं होने का. ये फिल्म इंट्रेस्टिंग इसलिए है क्योंकि काफी हटके टॉपिक पर बनी हुई है. अल्ट्रा ओरिजिनल कॉन्टेंट और गज़ब का रियलिस्टिक ट्रीटमेंट. इसके रेफरेंस दुरुस्त और मज़ेदार हैं. फिल्म का साउंडट्रैक ऐसा है, जिसे अलग से सुना और लिखा जाना चाहिए. इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में बहुत सराही गई और इंडिया में भी क्रिटिक्स को खूब पसंद आई. एक फिल्म से और क्या चाहिए!

रितेश बत्रा डायरेक्टेड इस फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, सान्या मल्होत्रा, विजय राज और जिम सार्भ ने मुख्य किरदार निभाए थे.
रितेश बत्रा डायरेक्टेड इस फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, सान्या मल्होत्रा, विजय राज और जिम सार्भ ने मुख्य किरदार निभाए थे. आधी फिल्म बीच में छोड़कर सिनेमाहॉल के बाहर बैठे रफी और मिलोनी.

6) फोटोग्राफ
[रितेश बत्रा]

रितेश बत्रा ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सान्या मल्होत्रा को लेकर बनी एक बड़ी प्यारी लव स्टोरी बनाई है. एक फोटोग्राफर, जो गेटवे ऑफ इंडिया पर लोगों की फोटो खींचता है. एक दिन एक लड़की की तस्वीर खींचता है और फिर प्यार धीमी आंच पर पकता है. ये फिल्म कहीं भी घट सकती थी. किसी कैब में या किसी चाय की टपरी पर. इतना प्रेम लिखने के भीतर कितना प्रेम चाहिए होता होगा? कोई इतनी प्यारी कहानी के लिए अन यूज़ुअल स्टारकास्ट चुनकर उसे और प्यारा और विश्वास लायक कैसे बना सकता है. ये कुछ दिलचस्प सवाल हैं, जिनके जवाब आपको ‘फोटोग्राफ’ देखने के बाद ही मिलेंगे.

एजाज़ खान डायरेक्टेड इस फिल्म में तल्हा अरशद रेशी, रसिका दुग्गल, विका कुमार और सुमित कौल ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में अपने पिता के साथ मिलकर नाव बनाता हामिद.
एजाज़ खान डायरेक्टेड इस फिल्म में तल्हा अरशद रेशी, रसिका दुग्गल, विकास कुमार और सुमित कौल ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में अपने पिता के साथ मिलकर नाव बनाता हामिद.

7) हामिद
[एजाज़ खान]

ये फिल्म बेस्ड है अमीन भट्ट के नाटक ‘फोन नं. 786’ पर. कहानी है कश्मीर में रहने 7 साल के बच्चे हामिद की. हामिद के पिता पिछले एक साल से गायब हैं. कश्मीर में कोई कहां गायब हो जाता है, इस बारे में एक और फिल्म है ‘नो फादर्स इन कश्मीर’ वो देखिएगा. और ‘हैदर’ तो देख ही रखी होगी. खैर, इस फिल्म की खासियत ये है कि वो बिना पॉलिटिक्स में घुसे कश्मीर की हालत दिखाती है. एक बड़े मासूम किरदार की मदद से वो कश्मीर की त्रासदी से हमें मिलवाती है, जिसके सामने सिर झुकाने के खड़े होने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है. फिल्म बताती है कि लोग इस तरह की चीज़ों के इतने आदि हो गए हैं कि वो अपने दुख को दिल में दबाए आगे बढ़ जाते हैं. अगली त्रासदी या दूसरे हामिद के इंतज़ार में.

प्रकाश कोवलमुडी डायरेक्टेड इस फिल्म में कंगना रनौत, राजकुमार राव, अमायरा दस्तूर, हुसैन दलाल, सतीश कौशिक, जिमी शेरगिल, कनिका ढिल्लौं और बृजेंद्र काला ने लीड रोल्स किए थे. फिल्म के एक सीन में कंगना और हुसैन.
प्रकाश कोवलमुडी डायरेक्टेड इस फिल्म में कंगना रनौत, राजकुमार राव, अमायरा दस्तूर, हुसैन दलाल, सतीश कौशिक, जिमी शेरगिल, कनिका ढिल्लौं और बृजेंद्र काला ने लीड रोल्स किए थे. फिल्म के एक सीन में कंगना और हुसैन.

8) जजमेंटल है क्या
[प्रकाश कोवलमुडी]

कंगना रनौत और राजकुमार की हालिया शाहकार. कहानी है बॉबी (कंगना) और केशव (राजकुमार) की.  ये फिल्म भी काफी आउट ऑफ द बॉक्स थी. पेस अच्छा था. सस्पेंस किसी थ्रिलर वाला है लेकिन ट्रीटमेंट कॉमिक है. इंडिया में बनी क्वॉलिटी डार्क कॉमेडी मानी गई. परफॉरमेंस आला दर्जे के थे. मानसिक रूप से बीमार लोगों को लेकर भी थोड़ी जागरूकता भी दिखाती है. अगर फिल्म रियलिटी वाला एंगल न रहे, तो फिक्शन तो ढंग से हो. ये फिल्म वही करती है.

तुषार हीरानंदानी डायरेक्टेड इस फिल्म में तापसी पन्नू, भूमि पेडणेकर, प्रकाश झा, सारा अर्जुन, विनीत कुमार और शाद रंधावा ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में शूटिंग करतीं तापसी और भूमि.
तुषार हीरानंदानी डायरेक्टेड इस फिल्म में तापसी पन्नू, भूमि पेडणेकर, प्रकाश झा, सारा अर्जुन, विनीत कुमार और शाद रंधावा ने मुख्य किरदार निभाए थे. फिल्म के एक सीन में शूटिंग करतीं तापसी और भूमि.

9) सांड की आंख
[तुषार हीरानंदानी]

उत्तर प्रदेश के जौहरी गांव की दो महिलाएं. प्रकाशी और चंद्रो तोमर. इन्होंने 60 साल की उम्र में शार्पशूटिंग शुरू की. आगे कई शूटिंग कंपटीशन में भाग लिया और मेडल जीते. ये फिल्म इन्हीं दोनों शूटर्स की बायोपिक है. वो महिलाएं सिर्फ अपने पतियों से नहीं पितृसत्तात्मक समाज से लड़ रही होती हैं. पुरुषों से नहीं उनकी इनसिक्योरिटीज़ से लड़ती हैं. उन्हें चैलेंज करती हैं. और हरा देती हैं. साबित करती हैं कि महिलाएं पुरुषों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं. उन्हें कोई पुरुष नहीं बताएगा कि उन्हें क्या करना चाहिए. वो खुद तय करेंगी कि उन्हें क्या करना है. क्या पहनना है. और कैसे रहना है.

अमर कौशिक डायरेक्टेड इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, भूमि पेडणेकर, यामी गौतम, सौरभ शुक्ला, अभिषेक बैनर्जी, जावेद जाफरी और सीमा पाहवा ने लीड रोल्स किए थे.
अमर कौशिक डायरेक्टेड इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, भूमि पेडणेकर, यामी गौतम, सौरभ शुक्ला, अभिषेक बैनर्जी, जावेद जाफरी और सीमा पाहवा ने लीड रोल्स किए थे. फिल्म में शाहरुख के फैन बने उनका सिग्नेचर पोज़ करते आयुष्मान.

10) बाला
[अमर कौशिक]

ये वो फिल्म है, जो कॉन्टेंट और कॉमर्स की खाई को पाटती है. पिछली कई आयुष्मान खुराना फिल्मों की तरह. कहानी है बाला (आयुष्मान) नाम के एक लड़के की, जिसके सिर के बाल जवानी में ही झड़ गए हैं. वो गंजा हो गया है. आगे क्या होता है ये तो फिल्म में मालूम चलता है लेकिन बाला आगे ख़ुद को खोज लेता है. उसे समझ आ जाता है कि सूरत सिर्फ ऊपरी दिखावा है, असल चीज़ होती है सीरत. इस फिल्म की अच्छी बात ये है कि ये बिना किसी शर्त खुद को स्वीकार करने की ज़रूरी बात कहती है.

साल 2019 की कुछ और अच्छी और ज़रूर देखने लायक फिल्में रहीं. उनकी बातः

11) द स्काई इज़ पिंक– डायरेक्टर शोनाली बोस की ये एक असल घटना से प्रेरित है. एक परिवार बिखरने की कगार पर है क्योंकि बच्ची को एक लाइलाज बीमारी है. इस फिल्म में एक मां और बाप का संघर्ष है, जिसे देखते वक्त आप हंसेंगे भी और रोएंगे भी. मृत्यु की बात करते हुए भी ये फिल्म आपको पॉज़िटिविटी से भर देती है. प्रियंका, फरहान और ज़ायरा – तीनों का काम तारीफ के लायक है.

शोनाली बोस डायरेक्टेड इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर, ज़ायरा वसीम और रोहित सराफ ने मुख्य किरदार निभाए थे.
शोनाली बोस डायरेक्टेड इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा, फरहान अख्तर, ज़ायरा वसीम और रोहित सराफ ने मुख्य किरदार निभाए थे.

12) सुपर 30– बिहार बेस्ड मैथेमटिशियन आनंद कुमार की बायोपिक. किसी भी तरह की बदलाव की शुरुआत खुद से होती है. फिर उसके लिए चाहे जितना लड़ना पड़े, इसी बारे में है ये फिल्म. आखिरी हिस्से में थोड़ी फिल्मी हो जाती है, लेकिन है भी तो फिल्म ही.

विकास बहल डायरेक़्टेड इस फिल्म में ऋतिक रौशन, आदित्य श्रीवास्तव, पंकज, त्रिपाठी, नंदिश सिंह, मृणाल ठाकुर, विजय वर्मा, अमित साध और अली हाजी ने मुख्य किरदार निभाए थे.
विकास बहल डायरेक़्टेड इस फिल्म में ऋतिक रौशन, आदित्य श्रीवास्तव, पंकज त्रिपाठी, नंदिश सिंह, मृणाल ठाकुर, विजय वर्मा, अमित साध और अली हाजी ने मुख्य किरदार निभाए थे. जिस फिल्मी लिबर्टी की बात की गई थी, वैसे ही एक सीन में ऋतिक रौशन.

13) सेक्शन 375– जब मीटू और सेक्शुअल हैरसमेंट से जुड़े विवाद सुर्खियों में जगह बनाए बैठे थे, ऐसे समय में नैरेटिव के उलट बात करने वाली फिल्म. लेकिन बैलेंस ऐसा कि फिल्म टाइट रस्सी पर भी संभलकर निकल जाए. फिल्म का कहना ये बिलकुल नहीं है कि हर रेप और सेक्शुअल हैरसमेंट का आरोप फर्जी है. इसी बैलेंस की वजह से फिल्म को देखा जाना चाहिए. एक कोर्ट रूम ड्रामा, जो दोनों पक्षों पर की बात करती है. और आखिर में चौंकाते हुए अपनी बात रखती है.

अजय बहल डायरेक्टेड इस फिल्म में अक्षय खन्ना, ऋचा चड्ढा, राहुल भट्ट, मीरा चोपड़ा, संध्या मृदुल और किशोर कदम ने लीड रोल्स किए थे.
अजय बहल डायरेक्टेड इस फिल्म में अक्षय खन्ना, ऋचा चड्ढा, राहुल भट्ट, मीरा चोपड़ा, संध्या मृदुल और किशोर कदम ने लीड रोल्स किए थे.

14) इंडियाज़ मोस्ट वॉन्टेड– ये फिल्म थी इंडिया में कई बम ब्लास्ट करवाने वाले आतंकवादी यासीन भटकल को पकड़ने वाले मिशन की. ये फिल्म खास इसलिए है क्योंकि ये नौ आम लोग यानी अंडरडॉग्स की कहानी थी, जो बिना किसी उम्मीद, परमीशन या मेडल के लालच में सिर्फ देश की सेवा करना चाहते हैं. फिल्म अच्छी थी जिसमें बिना जिंगोइज़्म और छाती पीटने वाली देशभक्ति के अपनी बात कही गई.

राजकुमार गुप्ता डायरेक्टेड इस फिल्म में अर्जुन कपूर, सुदेव नैयर, राजेश शर्मा, प्रशांत एलेग्ज़ैंडर, शांतिलाल मुखर्जी, देवेंद्र मिश्रा, गौरव मिश्रा, आसिफ खान और बजरंगबली सिंह ने मुख्य किरदार निभाए थे.
राजकुमार गुप्ता डायरेक्टेड इस फिल्म में अर्जुन कपूर, सुदेव नैयर, राजेश शर्मा, प्रशांत एलेग्ज़ैंडर, शांतिलाल मुखर्जी, देवेंद्र मिश्रा, गौरव मिश्रा, आसिफ खान और बजरंगबली सिंह ने मुख्य किरदार निभाए थे.

15) मिशन मंगल– इंडिया के पहले ही प्रयास में मार्स पर पहुंचने की कहानी. मिशन मंगलयान की कहानी. दुनिया का सबसे किफायती और कम समय में तैयार हुआ मार्स मिशन. फिल्म में अक्षय कुमार थे लेकिन हीरो थीं वो पांच एक्ट्रेस, जिन्होंने इस मिशन में अहम रोल प्ले करने वाली साइंटिस्ट लोगों का रोल किया था. ये ऐसी फिल्म रही जिसमें कॉन्टेंट भी था, थोड़े अलग माइंडसेट के साथ भी बनाई गई थी, जिसकी तारीफ भी हुई और पैसे भी कमाए.

जगन शक्ति डायरेक्टेड इस फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, नित्या मेनन, विद्या बालन, कीर्ति कुल्हाड़ी और शरमन जोशी ने लीड रोल्स किए थे.
जगन शक्ति डायरेक्टेड इस फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, नित्या मेनन, विद्या बालन, कीर्ति कुलहरि और शरमन जोशी ने लीड रोल्स किए थे.

इसके अलावा कुछ ऐसी फिल्में ऐसी भी रहीं, जो थिएटर्स में तो नहीं आईं लेकिन बेहतरीन फिल्मों की बात करते समय दिमाग में ज़रूर आईं. ये फिल्में थीं एक पुलिसवुमन की लाइफ पर बेस्ड ‘सोनी’ और एक अंजान रेलवे स्टेशन अनाउंसर और एक सरकारी नौकरी करने वाली अधेड़ उम्र की महिला के बीच घटने वाली एक अजीबोगरीब कहानी ‘योर्स ट्रूली’. ये दोनों ही फिल्मों को समय मिलते ही देख डालें. काफी सूदिंग हैं. स्वीट हैं. इमोशनल हैं. और ऑनलाइन आसानी से अवेलेबल हैं. इन फिल्मों के बारे में आप विस्तार से हमारी 2019 की बेस्ट वेब कॉन्टेंट वाली आर्टिकल में पढ़ सकते हैं.

बाकी साल खत्म हो रहा है. हम अभी भी हैं. सिनेमा भी है. आप भी हैं. नए साल में भी प्रेम बना रहे. जो सिर्फ दिखे नहीं महसूस भी हो. और रोमैंटिसाइज़ किए बिना नया साल मुबारक :)

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर की रगों में क्या है?

एक लघु टिप्पणी दोनों के बीच विवाद पर. जिसमें नसीर ने अनुपम को क्लाउन यानी विदूषक कहा था.

पंगा: मूवी रिव्यू

मूवी देखकर कंगना रनौत को इस दौर की सबसे अच्छी एक्ट्रेस कहने का मन करता है.

फिल्म रिव्यू- स्ट्रीट डांसर 3डी

अगर 'स्ट्रीट डांसर' से डांस निकाल दिया जाए, तो फिल्म स्ट्रीट पर आ जाएगी.

कोड एम: वेब सीरीज़ रिव्यू

सच्ची घटनाओं से प्रेरित ये सीरीज़ इंडियन आर्मी के किस अंदरूनी राज़ को खोलती है?

जामताड़ा: वेब सीरीज़ रिव्यू

फोन करके आपके अकाउंट से पैसे उड़ाने वालों के ऊपर बनी ये सीरीज़ इस फ्रॉड के कितने डीप में घुसने का साहस करती है?

तान्हाजी: मूवी रिव्यू

क्या अपने ट्रेलर की तरह ही ग्रैंड है अजय देवगन और काजोल की ये मूवी?

फिल्म रिव्यू- छपाक

'छपाक' एक ऐसी फिल्म है, जिसके बारे में हम ये चाहेंगे कि इसकी प्रासंगिकता जल्द से जल्द खत्म हो जाए.

हॉस्टल डेज़: वेब सीरीज़ रिव्यू

हॉस्टल में रह चुके लोगों को अपने वो दिन खूब याद आएंगे.

घोस्ट स्टोरीज़ : मूवी रिव्यू (नेटफ्लिक्स)

करण जौहर, अनुराग कश्यप, ज़ोया अख्तर और दिबाकर बनर्जी की जुगलबंदी ने तीसरी बार क्या गुल खिलाया है?

गुड न्यूज़: मूवी रिव्यू

साल की सबसे बेहतरीन कॉमेडी मूवी साल खत्म होते-होते आई है!