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'बधाई दो' से पहले आईं 10 भारतीय फिल्में, जिनमें गे/लेस्बियन रिलेशनशिप की कहानी दिखाई गई

हाल ही में राजकुमार राव और भूमि पेडणेकर की फिल्म ‘बधाई दो’ का ट्रेलर रिलीज़ किया गया. ये फिल्म लैवेंडर मैरिज नाम के कॉन्सेप्ट पर बात करती है. इस कॉन्सेप्ट की उपज का क्रेडिट जाता है दुनियाभर में फैले होमोफोबिया को. एक बड़ा तबका गे और लेस्बियन मैरिज को गलत नज़रों से देखता है. इंडिया में तो लोगों को लगता है कि ये एक बीमारी है. इलाज करने से ठीक हो जाएगी. खैर, अगर आप लैवेंडर मैरिज को शॉर्ट में समझना चाहें, तो यहां क्लिक करें. आज हम आपको ‘बधाई दो’ से पहले आई उन इंडियन फिल्मों के बारे में बताएंगे, जिनमें होमोसेक्शुएलिटी वाले मसले पर बात हुई.


1) फायर (1996)

डायरेक्टर- दीपा मेहता
स्टारकास्ट- नंदिता दास, शबाना आज़मी, कुलभूषण खरबंदा

कहानी- ये राधा और सीता नाम की दो शादीशुदा महिलाओं की कहानी है. इन दोनों के ही पति अलग-अलग वजहों से इनके साथ शारीरिक संबंध स्थापित नहीं करते. राधा लंबे समय से ये सब झेल रही है. मगर सीता इन चीज़ों से फ्रस्ट्रेट हो जाती है. ऐसे में ये दोनों महिलाएं एक-दूसरे की इच्छाओं का पूरा करने बीड़ा उठाती हैं. समय के साथ ये चीज़ प्रेम में तब्दील हो जाती है. एक दिन ये चीज़ इनके पतियों को पता चल जाती है. फिर क्या होता है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है.

फिल्म 'फायर' के एक सीन में नंदिता दास और शबाना आज़मी.
फिल्म ‘फायर’ के एक सीन में नंदिता दास और शबाना आज़मी.

ये फिल्म 1996 में आई थी. जब भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से को पता भी नहीं था कि समलैंगिकता किस चिड़िया का नाम है. होमोसेक्शुएलिटी को लेकर इतने खुले ढंग से बात करने वाली ये पहली हिंदी फिल्म मानी जा सकती है. मगर इस फिल्म के साथ एक दिक्कत थी. वो ये कि इसने सेक्शुअल ओरिएंटेशन की बजाय सीता और राधा की मजबूरी को उनके लेस्बियन होने की वजह बताई. हालांकि किसी भी फिल्म को उसके काल-खंड से अलग करके देखने पर इस तरह की दिक्कतें आना लाज़मी है. क्योंकि तब इन चीज़ों को लेकर उतनी अवेयरनेस नहीं थी.


2) संचारम (2004)

डायरेक्टर- लिगी जे. पुलापल्ली
स्टारकास्ट- श्रुति मेनन, सुहासिनी नायर

कहानी- मलयालम भाषा की इस फिल्म को The Journey नाम से भी जाना जाता है. कहानी है दो स्कूल फ्रेंड्स किरण और डेलाइला की. ये दोनों लड़कियां बचपन से एक-दूसरे के साथ पढ़ी हैं. मगर इन्हें आगे जाकर रियलाइज़ होता है कि वो एक-दूसरे से प्रेम करती हैं. पहला मसला तो ये कि ये दोनों लड़कियां अलग-अलग धर्म की हैं. और दोनों ही धर्म इनके साथ आने को गलत मानते हैं. फिर वही सामाजिक और पारिवारिक झोल. डेलाइला की शादी किसी लड़के साथ तय करवा दी जाती है. मगर फिल्मों के साथ अच्छी चीज़ ये है कि यहां प्रेम मुकम्मल हो जाता है.

जब ‘संचारम’ रिलीज़ हुई, तब सीधे इसकी तुलना दीपा मेहता की ‘फायर’ के साथ होनी शुरू हुई. मगर ‘फायर’ में असफल शादी को लेस्बियन बनने के पीछे की वजह बताई गई थी. ‘संचारम’ उस मामले में क्लियर कट रवैया रखती है. दो लोगों को प्रेम है और वो साथ होना चाहते हैं. इसमें जेंडर, सोसाइटी या किसी और चीज़ को कैटलिस्ट की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया. डेलाइला नाम से एक बड़ा सुंदर गाना याद आया है, यहां सुनिए-


3) हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड (2007)

डायरेक्टर- रीमा कागती
स्टारकास्ट- संध्या मृदुल, विक्रम चटवाल, अमीषा पटेल, करण खन्ना

कहानी- ये 6 अलग-अलग कपल्स की कहानी है, जो हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की बस से हनीमून मनाने गोवा जा रहे हैं. इनमें से एक कपल है मधु और बंटी. बंटी होमोसेक्शुअल है. मगर इस बारे में उसने किसी को बताया नहीं. परिवारवालों के प्रेशर से बचने के लिए उसने मधु से शादी कर ली. मधु भी अपने पिछले रिलेशनशिप के ग़म से उबरने के लिए शादी को राज़ी हो जाती है. उसी ट्रिप पर पिंकी और विकी नाम का एक कपल भी है. बंटी, विकी को देखते हुए उसके प्रति आकर्षित हो जाता है. मगर अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस नहीं करता.

ये फिल्म इसलिए खास है क्योंकि ये 12 अलग-अलग लोगों की कहानी दिखाती है. मगर उन्हें जज नहीं करती. होमोसेक्शुएलिटी को गलत नज़र से नहीं देखती. ना ही क्रांतिकारी बन सबकुछ ठीक करने की कोशिश करती है. ये बस चार दिनों के ट्रिप में उन लोगों की लाइफ में झांकती है. फिर वो लोग अपने रास्ते चले जाते हैं और फिल्म खत्म हो जाती है. सिंपल यट कॉम्प्लेक्स स्टोरीटेलिंग. फिल्म का ट्रेलर आप नीचे देख सकते हैं-


4) I Am (2010)

डायरेक्टर- ओनिर
स्टारकास्ट- राहुल बोस, अर्जुन माथुर, अभिमन्यु सिंह

कहानी- I Am एक एंथोलॉजी फिल्म है. इस फिल्म में चार अलग-अलग कहानियां दिखाई गई थीं. इन सभी कहानियों का सेंट्रल थीम था- डर. इस फिल्म की चौथी कहानी ‘ओमर’ गेशिप के बारे में बात करती है. कहानी है जय गौड़ा नाम के एक शख्स की जो बैंगलोर से मुंबई आता है. यहां उसकी मुलाकात एक स्ट्रगलिंग एक्टर ओमर से होती है. दोनों साथ में डिनर वगैरह करते हैं. मगर पब्लिक प्लेस पर सेक्स करते हुए उन्हें एक पुलिसवाला पकड़ लेता है. वो उन्हें ब्लैकमेल कर एक लाख रुपए की मांग करता. जब ओमर, जय का एटीएम कार्ड लेकर पैसे निकालने जाता है, तब वो पुलिसवाला जय का रेप करता है. ओमर लौटकर पुलिसवाले को 50 हज़ार रुपए देता है. मगर पुलिसवाला पैसे के साथ ओमर को भी अपने साथ ले जाता है. जय जब उसे छुड़ाने पुलिस स्टेशन जाता है, तब उसे पता चलता है कि ओमर उससे पैसे ठगने के प्लान का हिस्सा था.

I Am को बनाने के लिए फेसबुक पर लोगों से डोनेशन की अपील की गई. 400 लोगों ने पैसे डोनेट किए, तब जाकर ये फिल्म बनी. सबसे भयावह बात ये कि इस फिल्म की सभी कहानियां असल घटनाओं से प्रेरित थीं. ‘ओमर’ की कहानी ऑनलाइन पोर्टल Gay Bombay से मिले रिसर्च मटीरियल पर बनी थी.

फिल्म I Am के 'ओमर' सेग्मेंट में अर्जुन माथुर और राहुल बोस.
फिल्म I Am के ‘ओमर’ सेग्मेंट में अर्जुन माथुर और राहुल बोस.

5) अलीगढ़ (2015)

डायरेक्टर- हंसल मेहता
स्टारकास्ट- मनोज बाजपेयी, राजकुमार राव

कहानी- ये फिल्म अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मराठी भाषा के प्रोफेसर रहे रामचंद्र सिरस की कहानी पर बेस्ड है. एक रात लोकल टीवी चैनल का क्रू रामचंद्र के घर में घुस जाता है. यहां उन्हें एक रिक्शे वाले के साथ सेक्स करते हुए पाया जाता है. इस घटना के बाद प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया जाता है. बाद में उनकी कहानी जानने के लिए एक जर्नलिस्ट उनसे मिलता है, जो प्रोफेसर के प्रति सहानुभूति का भाव रखता है. उसकी मदद से ये मामला कोर्ट पहुंचता है. कोर्ट प्रोफेसर सिरस को दोषी मानने से इन्कार कर देती है. मगर दोबारा कॉलेज जॉइन करने से ठीक पहले रामचंद्र सिरस मृत पाए जाते हैं.

‘अलीगढ़’ को हंसल मेहता की सबसे शानदार क्रिएशंस में गिना जाता है. क्योंकि ये फिल्म एक रियल मसले को उठाती और पूरी गंभीरता और सिम्पथी के साथ उसे डील करती है. रामचंद्र सिरस के साथ जो हुआ, वो कई मायनों में गलत था. ये फिल्म उस घटना के हर एंगल को कहानी में पिरोकर पब्लिक के सामने रखती है. और हमें अपनी गलती का अहसास करवाती है. क्योंकि प्रोफेसर सिरस के साथ जो हुआ, वो सिर्फ उस टीवी क्रू की नहीं, हम सबकी गलती थी. क्योंकि हम अब भी इस बात को मान नहीं पाए हैं कि होमोसेक्शुएलिटी रियल चीज़ है. और कोई अपनी निजी लाइफ में क्या कर रहा है, उससे हम सबका क्या लेना-देना. रामचंद्र सिरस की कहानी बताती है कि हम एक सोसाइटी के तौर पर फेल हुए हैं.

 फिल्म 'अलीगढ़' के एक सीन में मनोज बाजपेयी और राजकुमार राव.
फिल्म ‘अलीगढ़’ के एक सीन में मनोज बाजपेयी और राजकुमार राव.

6) मार्गरिटा विद अ स्ट्रॉ (2014)

डायरेक्टर- शोनाली बोस
स्टारकास्ट- कल्कि केकलां, सयानी गुप्ता

कहानी- ये कहानी है सेरीब्रल पॉल्सी नाम की बीमारी से जूझ रही लड़की लैला कपूर की. वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में पढ़ती है. साथ में एक बैंड के लिए म्यूज़िक भी बनाती है. लैला को अपने बैंड की लीड सिंगर से प्रेम हो जाता है. मगर उस सिंगर को लैला से प्यार नहीं होता. ठीक इसी समय लैला को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में एक सेमेस्टर की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिल जाती है. प्रेम में रिजेक्शन का दुख धुल जाता है. मैनहैटन में रहने रहने के दौरान लैला का दिल जैरेड नाम के एक लड़के पर आ जाता है, जो क्रिएटिव राइटिंग में उसकी मदद कर रहा है. दोनों के बीच सेक्स वगैरह हो जाता है. मगर इसी बीच लैला की मुलाकात खानम नाम की लड़की से होती है. खानम देख नहीं सकती. मगर वो इस चीज़ को अपनी कमज़ोरी की तरह नहीं देखती. लैला, जो कि व्हील चेयर से उठ नहीं पाती, उसे देखकर इंस्पायर्ड फील करती है. लैला और खानम सीरियस रिलेशनशिप में आ जाती हैं. मगर लैला अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन को लेकर कंफ्यूज़्ड है. उसे जैरेड भी अच्छा लगता है और खानम भी. फाइनली वो इस नतीजे पर पहुंचती है कि वो बाइ-सेक्शुअल है.

जैसा इस फिल्म की कहानी बताते हुए हमने पहली लाइन लिखी कि लैला सेरीब्रल पॉल्सी नाम की बीमारी से ग्रस्त है. आमतौर पर हम स्पेशली एबल्ड लोगों की बीमारी को उनकी पहचान बना देते हैं. हम उसके परे जाकर उन्हें नहीं देख पाते. ऐसे में ‘मार्गरिटा विद अ स्ट्रॉ’ इन सब चीज़ों से ऊपर उठकर लैला की सेक्शुअल ओरिएंटेशन की बात करती है. उसे किसी भी वजह से खास ट्रीट नहीं करती. उसे नॉर्मल बनाने की कोशिश नहीं करती. क्योंकि लैला जो है वो नॉर्मल ही है. फिल्म का ट्रेलर आप यहां देख सकते हैं-


7) एंग्री इंडियन गॉडेसेज़ (2015)

डायरेक्टर- पैन नलिन
स्टारकास्ट- संध्या मृदुल, तनिष्ठा चैटर्जी, सारा जेन डायस, राजश्री देशपांडे, अनुष्का मनचंदा

कहानी- फैशन फोटोग्रफर फ्रीडा अपनी शादी की घोषणा करने के लिए अपनी पांच दोस्तों की बुलाती है. इन पांच महिलाओ में बॉलीवुड सिंगर से लेकर बिज़नेसवुमन, स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस और एक एक्टिविस्ट भी शामिल हैं. थोडे़ सस्पेंस के बाद इन दोस्तों को पता चलता है कि फ्रीडा, नर्गिस नाम की लड़की से शादी करने जा रही है. मगर शादी से पहले ये लोग गोवा के एक बीच पर पिकनिक मनाने जाती हैं. यहां पर कुछ ऐसा हो जाता है, जिससे इन सभी महिलाओं की ज़िंदगी हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाती है. इस फिल्म की ओपन-एंडिंग होती है. हर दर्शक अपनी समझ के हिसाब से समझे कि इस कहानी का अंत कैसे होना चाहिए था.

‘एंग्री इंडियन गॉडेसेज़’ तब रिलीज़ हुई थी, जब इंडिया में सेम सेक्स मैरिज को कानूनी तौर पर वैलिड नहीं माना जाता था. मगर अच्छी चीज़ ये कि इस फिल्म का सारा फोकस लेस्बियन मैरिज पर नहीं था. ये फिल्म ओवरऑल इंडिया में महिलाओं के सोशल ट्रीटमेंट पर बात करती है. उन्हें आम जीवन में किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ‘एंग्री इंडियन गॉडेसेज़’ का ट्रेलर आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं-


8) कपूर एंड संस (2016)

डायरेक्टर- शकुन बत्रा
स्टारकास्ट- ऋषि कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, आलिया भट्ट, फवाद खान, रजत कपूर

कहानी- इस फिल्म की कहानी बड़ी सिंपल सी है. तमिलनाडु के कुन्नूर में कपूर फैमिली रहती है. फैमिली के सबसे बुजुर्ग सदस्य दादाजी उर्फ अमरजीत कपूर की इच्छा है कि मरने से पहले एक फैमिली फोटो खिंचाई जाए. इसीलिए विदेश में रह रहे दोनों लड़कों अर्जुन और राहुल को घर बुलाया जाता है. मगर ये प्रॉपर डिस-फंक्शनल फैमिली है. यहां किसी की लाइफ वैसी नहीं है, जैसी दिख रही है. राहुल राइटर है. उसका नॉवल छप चुका है. अर्जुन एक किताब लिख रहा है. साथ में बारटेंडिंग करके खर्च निकालता है. उनके पिता का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर चल रहा है. अर्जुन को इंडिया में टिया नाम की लड़की से प्यार हो जाता है. मगर राहुल शादी की बात से कतराता रहता है. बाद में पता चलता है कि वो होमोसेक्शुअल है.

एक रेगुलर इंडियन फैमिली में होमोसेक्शुएलिटी को कैसे डील किया जाता है, ‘कपूर एंड संस’ उस पोर्ट्रेयल के काफी करीब रहती है. मगर वो फिल्म का मेन इशू नहीं है. वो उस डिस-फंक्शनल फैमिली के तमाम मसलों में से एक है. यही चीज़ इस फिल्म को खास बनाती है. ये एक फैमिली फिल्म है, जिसे अपनी फैमिली के साथ देखने पर जूतम-पजार होने की भरपूर संभावना रहती है. क्योंकि हम अभी तक ये चीज़ स्वीकार नहीं कर पाए हैं कि हमारे बच्चे गे या लेस्बियन हो सकते हैं. या हमारे माता-पिता शादी से बाहर किसी के साथ प्रेम में पड़ सकते हैं.

फिल्म 'कपूर एंड संस' के एक सीन में ऋषि कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, फवाद खान और रजत कपूर.
फिल्म ‘कपूर एंड संस’ के एक सीन में ऋषि कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, फवाद खान और रजत कपूर.

9) पावा कदैगल (2020)

डायरेक्टर- सुधा कोंगड़ा
स्टारकास्ट- कालीदास जयराम, शांतनू भाग्यराज

कहानी- ‘पावा कदैगल’ तमिल एंथोलॉजी फिल्म है. इस फिल्म की पहली कहानी का नाम है ‘थंगम’. ये सत्तार नाम के एक लड़के की कहानी है. सत्तार को बचपन में ही पता चल गया था कि वो मर्द के शरीर में कैद एक महिला है. यानी ट्रांस वुमन. उसे अपने बचपन के दोस्त सर्वनन से प्यार है. वो पैसे जमा कर रही है कि एक दिन सेक्स-असाइनमेंट सर्जरी करवा के सर्वनन से शादी करेगी. मगर सर्वनन को सत्तार की बहन साहिरा से प्यार है. दोनों अलग धर्म के लोग हैं. ये बात फैलते ही साहिरा और सर्वनन को अलग करने की कवायद शुरू हो जाती है. ऐसे में सत्तार ने जो पैसे सेक्स-असाइनमेंट के लिए जमा किए थे, वो उन दोनों को देकर गांव से भगा देता है.

‘थंगम’ एक ऐसी कहानी है, जिसे देखने के बहुत देर बाद भी आप हिले हुए रहते हैं. क्योंकि वो कहानी ऐसे घटती है. आपको शर्म आती है कि आप इस सोसाइटी का हिस्सा हैं. मगर फिर से वही बात कि ये कहानी 1980 के दशक में घटती है. और तब ट्रांसजेंडर्स और होमोसेक्शुएलिटी जैसे टर्म्स भी कायदे से इजाद नहीं हुए थे. पब्लिक को इस कॉन्सेप्ट की जानकारी होने की तो बात ही रहने दीजिए.

'पावा कढैगल' के 'थंगम' सेग्मेंट के एक सीन में सर्वनन और साहिरा के साथ सथर (बीच में).
‘पावा कढैगल’ के ‘थंगम’ सेग्मेंट के एक सीन में सर्वनन और साहिरा के साथ सत्तार (बीच में).

10) शुभ मंगल ज़्यादा सावधान (2020)

डायरेक्टर- हितेश कैवल्य
स्टारकास्ट- आयुष्मान खुराना, जीतेंद्र कुमार, गजराज राव, नीना गुप्ता

कहानी- इलाहाबाद से आने वाले अमन त्रिपाठी दिल्ली में रहते हैं. उन्हें कार्तिक नाम के लड़के से प्रेम है. दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. बहन की शादी में शामिल होने के लिए अमन, कार्तिक के साथ घर आता है. यहां घरवाले अमन की शादी भी फिक्स करने की कोशिश करते हैं. मगर अमन खुलेआम कार्तिक के लिए अपने प्रेम का इज़हार कर देता है. अब आगे की कहानी ये है कि अमन की सेक्शुअल प्रेफरेंस से उसकी फैमिली कैसे डील करती है.

‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ बहुत ही घिसे-पिटे तरीके से बनाई हुई फिल्म है. बेहद लाउड, ओवर द टॉप, इल्लॉजिकल और काफी हद तक अनरियल भी. मगर सबसे बेसिक चीज़ जो ये फिल्म करती है, वो ये कि होमोसेक्शुएलिटी जैसे मसले को बड़े स्टेज पर लेकर आती है. गांव-कस्बों में रहने वाले जिन लोगों को सेम सेक्स रिलेशनशिप के बारे में पता नहीं था, उन्हें अब उस सब्जेक्ट के बारे में पता है. मगर हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि आप इस फिल्म को होमोसेक्शुएलिटी पर बनी अच्छी फिल्म मानकर देखें. क्योंकि ये फिल्म एक सही सब्जेक्ट को गलत तरीके से हैंडल करती है.

फिल्म 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान' के एक सीन में जीतेंद्र कुमार और आयुष्मान खुराना. इस फिल्म का बड़ा क्रांतिकारी सीन माना गया था.
फिल्म ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ के एक सीन में जीतेंद्र कुमार और आयुष्मान खुराना. इसे फिल्म का बड़ा क्रांतिकारी सीन माना गया था.

वीडियो देखें: ‘बधाई दो’ के ट्रेलर में हमें क्या खास देखने को मिला?

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